अर्थशिला में हुआ अरुंधति रॉय की पुस्तक ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ का लोकार्पण, रिश्तों, स्मृतियों और स्त्री-अस्मिता पर हुई गहन चर्चा

पटना: राजधानी पटना के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र अर्थशिला में प्रख्यात लेखिका और बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय की चर्चित पुस्तक ‘Mother Mary Comes to Me’ के हिंदी अनुवाद ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। साहित्य, संस्कृति और समाज से जुड़े अनेक बुद्धिजीवी, लेखक, शिक्षाविद, शोधार्थी और साहित्य प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह पुस्तक केवल एक आत्मकथात्मक संस्मरण नहीं, बल्कि मां-बेटी के रिश्ते, स्मृति, परिवार, पहचान, स्त्री-अस्मिता और भावनात्मक जटिलताओं की गहरी पड़ताल करती है। पुस्तक के हिंदी संस्करण के प्रकाशन ने हिंदी पाठकों को अरुंधति रॉय की संवेदनशील लेखन शैली और विचारों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया है।

साहित्यिक वातावरण में हुआ लोकार्पण

अर्थशिला सभागार में आयोजित समारोह का माहौल पूरी तरह साहित्यिक रंग में रंगा हुआ था। कार्यक्रम में लेखकों, अनुवादकों, शिक्षकों, छात्रों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

लोकार्पण के बाद पुस्तक पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने अरुंधति रॉय की लेखन शैली, उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और पुस्तक की विषयवस्तु पर विस्तार से चर्चा की।

मां-बेटी के रिश्ते की संवेदनशील कहानी

मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ मूलतः एक गहरे आत्मानुभव से निकली रचना है, जिसमें अरुंधति रॉय ने अपनी मां के साथ संबंधों को बेहद ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।

पुस्तक में प्रेम, दूरी, संघर्ष, संवाद, असहमति और आत्मीयता जैसे अनेक भाव एक साथ दिखाई देते हैं। यह केवल एक पारिवारिक कहानी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की कहानी बन जाती है जिसने अपने पारिवारिक रिश्तों में जटिलताओं का अनुभव किया है।

स्मृतियों की परतें खोलती है पुस्तक

पुस्तक में लेखिका ने अपने बचपन, परिवार, जीवन के अनुभवों और समय के साथ बदलते रिश्तों को स्मृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

इन स्मृतियों के जरिए पाठक केवल घटनाओं को नहीं पढ़ता, बल्कि उन भावनाओं को भी महसूस करता है जिनसे लेखिका स्वयं गुजरी हैं।

साहित्य समीक्षकों का मानना है कि यही पुस्तक की सबसे बड़ी ताकत है।

स्त्री-अस्मिता और पहचान पर गंभीर विमर्श

इस कृति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्त्री-अस्मिता और आत्मपहचान का प्रश्न है।

अरुंधति रॉय ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि एक महिला केवल परिवार की भूमिका तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी अपनी इच्छाएं, संघर्ष, सपने और स्वतंत्र पहचान भी होती है।

वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका और उनकी आत्मनिर्भरता पर महत्वपूर्ण विमर्श प्रस्तुत करती है।

परिवार की बदलती परिभाषा

पुस्तक पारंपरिक पारिवारिक ढांचे पर भी गंभीर सवाल उठाती है।

इसमें दिखाया गया है कि परिवार केवल रक्त संबंधों का नाम नहीं है, बल्कि विश्वास, संवाद, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव से ही रिश्ते मजबूत बनते हैं।

कई वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब परिवारों की संरचना और सामाजिक रिश्तों में तेजी से बदलाव आ रहा है, तब यह पुस्तक और अधिक प्रासंगिक हो जाती है।

हिंदी अनुवाद की सराहना

कार्यक्रम में पुस्तक के हिंदी अनुवाद की भी विशेष सराहना की गई।

वक्ताओं ने कहा कि अनुवाद ने मूल अंग्रेज़ी पुस्तक की संवेदनशीलता, भाषा की सुंदरता और भावनात्मक गहराई को हिंदी में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

उनका मानना था कि इससे हिंदी पाठकों तक विश्वस्तरीय साहित्य और व्यापक रूप से पहुंचेगा।

साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

लोकार्पण समारोह में बड़ी संख्या में युवा पाठकों और छात्रों की मौजूदगी विशेष आकर्षण रही।

कार्यक्रम के दौरान कई पाठकों ने पुस्तक के अंश पढ़े और अपने विचार साझा किए।

साहित्य प्रेमियों ने कहा कि ऐसी पुस्तकें समाज, परिवार और व्यक्तिगत जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती हैं।

अरुंधति रॉय की लेखन शैली

अरुंधति रॉय अपने सशक्त, संवेदनशील और विचारोत्तेजक लेखन के लिए विश्वभर में जानी जाती हैं।

उनकी रचनाओं में सामाजिक न्याय, राजनीति, पर्यावरण, मानवाधिकार और व्यक्तिगत अनुभवों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

'मेरी माँ मेरी गैंगस्टर' में भी उनकी वही विशिष्ट शैली देखने को मिलती है, जिसमें निजी अनुभव व्यापक सामाजिक प्रश्नों से जुड़ जाते हैं।

साहित्य और समाज का संबंध

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होता, बल्कि समाज को समझने और बदलने का भी एक महत्वपूर्ण साधन है।

ऐसी पुस्तकें पाठकों को अपने जीवन, रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

पाठकों में बढ़ी उत्सुकता

लोकार्पण के बाद पुस्तक खरीदने और पढ़ने को लेकर पाठकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

कई पाठकों ने इसे समकालीन हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पुस्तक लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।

अर्थशिला में आयोजित ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ के लोकार्पण समारोह ने यह साबित किया कि गंभीर साहित्य आज भी पाठकों को गहराई से प्रभावित करता है।

मां-बेटी के रिश्तों, स्मृतियों, परिवार, पहचान और स्त्री-अस्मिता जैसे विषयों पर आधारित यह पुस्तक केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि जीवन के जटिल अनुभवों को समझने का एक संवेदनशील दस्तावेज़ है। हिंदी में इसके प्रकाशन से अब बड़ी संख्या में पाठक अरुंधति रॉय के विचारों और उनकी साहित्यिक दृष्टि से परिचित हो सकेंगे।