सहरसा में जल निकासी व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित: जलजमाव वाले क्षेत्रों की पहचान, नागरिकों की परेशानियों और स्थायी समाधान के उपायों पर हुआ मंथन
सहरसा: बिहार के कोसी क्षेत्र के प्रमुख जिले सहरसा से प्रशासनिक गलियारों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ी खबर सामने आ रही है। सहरसा जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी (District Magistrate) की अध्यक्षता में जिले की सबसे बड़ी समस्याओं में शुमार जल निकासी व्यवस्था (Drainage System) की समीक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दिनों या आम दिनों में होने वाले जलजमाव वाले क्षेत्रों, इससे नागरिकों को पेश आने वाली गंभीर असुविधाओं तथा इस समस्या के त्वरित एवं स्थायी समाधान के लिए चल रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगर निगम के अधिकारियों, वार्ड पार्षदों, संबंधित विभागों के अभियन्ताओं और जिला प्रशासन के तमाम वरीय अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने साफ लफ्जों में निर्देश दिया कि जलजमाव की समस्या से आम जनता को निजात दिलाने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक का मुख्य एजेंडा: जलजमाव से त्रस्त सहरसा के नागरिकों की समस्याएं
सहरसा शहर के कई मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर जलजमाव एक नासूर बनता जा रहा है, जिससे आम जनता, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
नागरिकों की असुविधाओं पर गंभीर चिंता: बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी ने पिछले महीनों में बारिश के दौरान उत्पन्न हुई जलजमाव की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उन तमाम क्षेत्रों को चिन्हित किया जहां मामूली बारिश के बाद भी पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है।
निकास मार्गों का अवरुद्ध होना: समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई जगहों पर नालियों का अतिक्रमण हो चुका है, प्राकृतिक जल प्रवाह के रास्ते बंद कर दिए गए हैं और समय पर नालियों की उड़ाही (डिफिल्टिंग) नहीं होने के कारण पानी का निकास पूरी तरह बाधित हो गया है। जिलाधिकारी ने इन सभी बिंदुओं पर बारी-बारी से समीक्षा की।
जिलाधिकारी द्वारा दिए गए कड़े निर्देश और कार्ययोजना
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करने और युद्ध स्तर पर जल निकासी के स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया।
अतिक्रमण हटाने का अभियान: जिलाधिकारी ने नगर परिषद/निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े नालों, सोख्ता और प्राकृतिक जल स्रोतों (ड्रेनेज चैनल्स) का निरीक्षण करने तथा उनपर किए गए अवैध अतिक्रमण को तुरंत बुलडोजर या कानूनी कार्रवाई के जरिए हटाने का सख्त निर्देश दिया।
समयबद्ध उड़ाही कार्य: आगामी मानसून या बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए अभी से ही नालियों की सफाई और उड़ाही का कार्य शुरू करने को कहा गया, ताकि पानी के बहाव में कोई रुकावट न आए। लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
ड्रैनेज मास्टर प्लान पर चर्चा: शहर के दीर्घकालिक विकास और जलजमाव की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति पाने हेतु एक व्यापक 'ड्रैनेज मास्टर प्लान' (Drainage Master Plan) तैयार करने और उसे धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया।
प्रशासनिक प्रतिबद्धता और जनसहयोग की अपील
बैठक के अंत में जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि सहरसा को जलजमाव मुक्त बनाने के लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
अधिकारियों की जवाबदेही तय: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि हर वार्ड और हर जोन के लिए जल निकासी की मॉनिटरिंग हेतु अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है, जो नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
आम नागरिकों से अपील: प्रशासन ने शहर के नागरिकों से भी अपील की है कि वे नालियों में प्लास्टिक, कचरा या ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) न फेंके, क्योंकि कचरे के कारण ही अधिकांश नालियां जाम होती हैं। नागरिक सहयोग से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
सहरसा में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जल निकासी व्यवस्था की यह समीक्षा बैठक इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन शहर की बुनियादी समस्याओं के प्रति गंभीर है। यदि बैठक में लिए गए निर्णयों और दिए गए निर्देशों को पूरी ईमानदारी और समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा गया, तो सहरसा वासियों को आगामी दिनों में जलजमाव की नारकीय स्थिति से निश्चित रूप से मुक्ति मिल जाएगी।