जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, तटबंधों की निगरानी से लेकर राहत शिविरों तक के पुख्ता इंतजाम के निर्देश

बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र में हर वर्ष मानसूनी बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की विभीषिका एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है. इस प्राकृतिक आपदा से जनजीवन को सुरक्षित रखने और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है. इसी क्रम में सहरसा जिले में संभावित बाढ़ की पूर्व तैयारियों का जायजा लेने के लिए समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिला पदाधिकारी (DM) दीपेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में जिले के तमाम प्रमुख विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू करने के बजाय पहले से ही सभी जरूरी और पुख्ता व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं, ताकि आपदा की घड़ी में किसी भी प्रकार की जनहानि या असुविधा से बचा जा सके।

बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक के मुख्य बिंदु

सहरसा जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कोसी नदी और अन्य जलస्रोतों के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला पदाधिकारी दीपेश कुमार ने समीक्षा बैठक के दौरान एक-एक बिंदु पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए:

तटबंधों की नियमित निगरानी और सुरक्षात्मक कार्य: बाढ़ सुरक्षा कार्यों से जुड़े सभी अभियंताओं (Engineers) को कड़े निर्देश दिए गए कि वे संवेदनशील तटबंधों की लगातार मॉनिटरिंग करें। तटबंधों पर चल रहे सुदृढ़ीकरण और सुरक्षात्मक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि किसी भी स्थिति में तटबंधों पर दबाव न बढ़ सके।

बाढ़ आश्रय स्थलों (Flood Shelters) की तैयारी: बाढ़ के दौरान विस्थापित होने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए चिन्हित किए गए बाढ़ आश्रय स्थलों का संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया। इन भवनों में बिजली, शौचालय और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं समय रहते दुरुस्त करने को कहा गया है।

पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को निर्देशित किया गया कि वे सभी बाढ़ आश्रय स्थलों और प्रभावित होने वाले संभावित गांवों में पेयजल की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करें। खराब पड़े चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त चापाकल लगाए जाएं ताकि शुद्ध पेयजल की कोई कमी न हो।

नावों का सत्यापन और परिवहन व्यवस्था की समीक्षा

बाढ़ के दौरान आवागमन और राहत सामग्रियों के वितरण के लिए नावों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों (CO) को अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी और निजी नावों का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया।

अतिरिक्त नावों का प्रबंध: जिन क्षेत्रों में नावों की कमी महसूस हो सकती है, वहाँ समय रहते अतिरिक्त नावों के पंजीकरण और व्यवस्था का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।

सामग्री भंडारण: ऊंचे स्थानों पर राहत सामग्री, सूखा राशन, पॉलीथिन शीट और पशुओं के चारे की पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए ताकि आपातकाल में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

विभागों के बीच समन्वय और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने सभी संबंधित विभागों—जैसे आपदा प्रबंधन, ग्रामीण कार्य विभाग, पीएचईडी, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों—को आपसी बेहतर समन्वय के साथ काम करने की हिदायत दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की तरफ से लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

इस बैठक में अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, उप विकास आयुक्त, विभिन्न अनुमंडलों के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), अंचलाधिकारी और संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन के इन पुख्ता और समय रहते उठाए गए कदमों से यह स्पष्ट है कि सहरसा जिला प्रशासन संभावित बाढ़ की आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है