बिहपुर प्रखंड सभागार में बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की उच्चस्तरीय बैठक संपन्न; सड़क, जलजमाव और एमडीएम (मिड-डे मील) की गुणवत्ता पर गरमाई चर्चा

भागलपुर/बिहपुर, कार्यालय संवाददाता: बिहार सरकार के विकास एजेंडे को धरातल पर उतारने और आम जनता की समस्याओं के त्वरित निष्पादन के लिए स्थानीय स्तर पर गठित समितियों की भूमिका बेहद अहम होती है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड सभागार में प्रखंड बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गर्मा-गरम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष दिलीप महतो ने की। बैठक के दौरान क्षेत्र के विकास कार्यों, जनहित से जुड़ी बुनियादी समस्याओं और सरकारी योजनाओं में हो रही अनियमितताओं को लेकर खुलकर चर्चा हुई। विशेष रूप से मड़वा पंचायत में बदहाल सड़क और गंभीर जलजमाव की समस्या के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता पर सदस्यों ने तीखे सवाल उठाए।

बैठक का एजेंडा और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

बिहपुर बीआरसी या प्रखंड कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और बीस सूत्री समिति के तमाम सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे:

विकास योजनाओं की समीक्षा: बैठक की शुरुआत पिछले प्रस्तावों की समीक्षा के साथ हुई। अध्यक्ष दिलीप महतो ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को हिदायत दी कि जनता द्वारा चुनी गई इस समिति का मुख्य उद्देश्य आम आदमी की परेशानियों को दूर करना है, इसलिए किसी भी स्तर पर विकास कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनसमस्याओं पर केंद्रित रहा माहौल: बैठक जैसे ही आगे बढ़ी, विभिन्न पंचायतों से आए सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखना शुरू कर दिया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों जैसे सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर विस्तार से मंथन किया गया।

मड़वा पंचायत में सड़क और जलजमाव की समस्या छाई रही

बैठक के दौरान सबसे प्रमुख और गंभीर मुद्दा मड़वा पंचायत का उठा, जहां के निवासियों को इन दिनों भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है:

बदहाल सड़कें और कीचड़युक्त रास्ते: सदस्यों ने पुरजोर तरीके से उठाया कि मड़वा पंचायत के कई टोलों और मुख्य मार्गों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी नारकीय हो जाती है।

जलजमाव से त्रस्त ग्रामीण: पंचायत के कई रिहायशी इलाकों में जलजमाव की गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त की गई। नालियों की उचित साफ-सफाई न होने और जल निकास (Drainage System) की व्यवस्था ठप होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। अध्यक्ष दिलीप महतो ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिया कि वे प्राथमिकता के आधार पर मड़वा पंचायत में सड़क की मरम्मत और जलजमाव से मुक्ति के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू करें।

सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

बैठक का दूसरा सबसे बड़ा और चर्चित मुद्दा सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता से जुड़ा रहा:

घटिया भोजन पर तीखा आक्रोश: समिति के कई सदस्यों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि प्रखंड के कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता बेहद घटिया है। मेनू के अनुसार पौष्टिक भोजन देने के बजाय बच्चों को केवल खानापूर्ति के रूप में हल्का और निम्न स्तर का भोजन परोसा जा रहा है।

भोजन की मात्रा और सामग्री में गड़बड़ी: सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्कूलों में रसोई गैस, खाद्यान्न और अन्य सामग्रियों के आवंटन में भ्रष्टाचार हो रहा है, जिसका सीधा असर बच्चों की थाली पर पड़ रहा है। कई जगहों पर तो मानक से बहुत कम मात्रा में भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे अभिभावकों में भारी रोष है।

स्थानीय स्तर पर भोजन उपलब्ध कराने की उठी पुरजोर मांग

इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बैठक में एक नया और व्यावहारिक प्रस्ताव रखा गया:

स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की मांग: सदस्यों ने पुरजोर मांग उठाई कि मध्याह्न भोजन की वर्तमान व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए इसे बड़े स्तर पर सेंट्रलाइज्ड रसोई से भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर (यानी स्कूल प्रबंधन और स्थानीय महिला समूहों/सहयोग से) तैयार करवाया जाए, ताकि भोजन ताज़ा, गर्म और उच्च गुणवत्ता वाला मिल सके।

अधिकारियों की जवाबदेही तय: अध्यक्ष दिलीप महतो ने शिक्षा विभाग के बीईओ (BEO) और एमडीएम प्रभारियों को चेतावनी दी कि वे औचक निरीक्षण अभियान तेज करें। जिन विद्यालयों में एमडीएम की गुणवत्ता खराब पाई जाती है, वहां के प्रधानाध्यापकों और संबंधित एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

बिहपुर में आयोजित बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की यह बैठक जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाने के लिए मील का पत्थर साबित हुई। मड़वा पंचायत में सड़क व जलजमाव के निदान का आश्वासन और सरकारी स्कूलों के बच्चों के भोजन की गुणवत्ता सुधारने को लेकर उठी मांग ने यह साबित कर दिया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता के प्रति पूरी तरह संजीदा हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन प्रस्तावों पर कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से अमल करता है।