शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेरों से नारकीय बनी स्थिति, राहगीरों का चलना हुआ मुश्किल; भीषण दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों की आशंका से सहमे लोग
भागलपुर/कहलगांव (संवाद सूत्र): सरकार और स्थानीय नगर निकायों द्वारा भले ही शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर के विभिन्न मोहल्लों, मुख्य मार्गों और बाजारों में इन दिनों जगह-जगह कचरे के भारी ढेर लगे हुए हैं। नियमित साफ-सफाई न होने और कचरा उठाव की लचर व्यवस्था के कारण सड़कों पर कूड़े का साम्राज्य फैल गया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि राहगीरों का पैदल गुजरना भी दूभर हो गया है। कचरे के सड़ने से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर मच्छरों और मक्खियों के प्रकोप से क्षेत्र में गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से नागरिक सहमे हुए हैं।
मोहल्लों और सड़कों पर पसरा कूड़ा: नगर निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल
शहर के मुख्य चौराहों से लेकर घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों तक, हर तरफ कचरे के पहाड़ देखे जा सकते हैं:
नियमित सफाई का अभाव: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सफाई कर्मियों के नहीं आने के कारण घरों का कचरा सड़कों के किनारे और खाली प्लॉटों में फेंका जा रहा है। कई दिनों तक कचरा नहीं उठाए जाने के कारण वह सड़ने लगता है और उससे जहरीला पानी रिसने लगता है।
आवारा पशुओं का जमावड़ा: सड़कों पर फैले कचरे के ढेर के पास आवारा मवेशी (गाय, सुअर और कुत्ते) हर वक्त मंडराते रहते हैं। इसके कारण न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि कई बार राहगीर इन पशुओं की चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं।
राहगीरों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
इस गंदगी और बदहाली का सबसे बुरा असर उन आम नागरिकों पर पड़ रहा है जो रोजाना इन रास्तों से आवागमन करते हैं:
नाक पर रुमाल रखकर चलने की मजबूरी: मुख्य मार्गों और बाजारों से गुजरने वाले राहगीरों को कचरे की भीषण दुर्गंध के कारण अपनी नाक पर रुमाल रखकर चलना पड़ रहा है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिए इस रास्ते से निकलना किसी सजा से कम नहीं है।
जलजमाव और कीचड़ का खतरा: बारिश के मौसम में यह कचरा पानी के साथ मिलकर और अधिक खतरनाक हो जाता है, जिससे सड़कों पर फिसलन और बीमारियां दोनों बढ़ जाती हैं।
संक्रामक बीमारियों का मंडराता खतरा: स्वास्थ्य पर गंभीर संकट
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खुले में सड़ रहा कचरा मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है:
मच्छर-मक्खियों का प्रकोप: कचरे के ढेर पर पनपने वाले मच्छर और मक्खियां आसपास के घरों में पहुंचकर भोजन और पानी को दूषित कर रहे हैं।
बीमारियों का अंदेशा: इस अस्वच्छता के कारण टायफाइड, मलेरिया, डेंगू, दस्त, पीलिया और त्वचा संबंधी गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो किसी बड़े स्वास्थ्य संकट (महामारी) से इंकार नहीं किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
शहर की इस दयनीय स्थिति को लेकर अब आम नागरिकों और स्थानीय दुकानदारों का गुस्सा फूटने लगा है:
जनता की चेतावनी: लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित नगर परिषद और नगर निगम के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शहरभर में विशेष सफाई अभियान चलाकर कचरे का स्थायी निष्पादन नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रह की मांग: प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि शहर के हर वार्ड में डोर-टू-डोर कचरा उठाव की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए और कचरा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
जगह-जगह लगे कचरे के ढेर और उससे फैलती दुर्गंध केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह नगर प्रशासन की कार्यकुशलता और संवेदनहीनता का एक जीता-जागता प्रमाण है। स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बीच शहर की यह तस्वीर अत्यंत चिंताजनक है। यदि प्रशासन ने अब भी अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं तोड़ी, तो वह दिन दूर नहीं जब यह गंदगी शहरवासियों के लिए अभिशाप बन जाएगी। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस गंभीर चेतावनी को कितनी जल्दी संज्ञान में लेते हैं और जनता को इस नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाते हैं।