झंडापुर के मध्य विद्यालय में स्वामी विवेकानंद की 124वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, शिक्षकों और छात्रों ने याद किए उनके विचार
झंडापुर: महान दार्शनिक, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की 124वीं पुण्यतिथि शनिवार को झंडापुर स्थित मध्य विद्यालय में पूरी श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
जीवन दर्शन और प्रेरणा का केंद्र: स्वामी विवेकानंद
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी जी की तस्वीर पर माल्यार्पण के साथ हुई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव नयन ने स्वामी विवेकानंद के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक और युवाओं के ऐसे पथप्रदर्शक थे, जिन्होंने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक शक्ति का परिचय दिया।"
प्रधानाध्यापक ने छात्रों को संबोधित करते हुए स्वामी जी के सबसे प्रसिद्ध मंत्र— "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए"—को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब विद्यार्थी अक्सर तनाव और प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं, स्वामी जी के विचार उन्हें आत्मबल और एकाग्रता प्रदान करने में सबसे अधिक सहायक हो सकते हैं।
शिक्षा के प्रति स्वामी जी का दृष्टिकोण
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि 'मनुष्य निर्माण' (Man-making education) है। एक शिक्षक ने कहा, "स्वामी जी का मानना था कि शिक्षा वह है जो व्यक्ति को निडर बनाए और उसके भीतर की छिपी हुई प्रतिभा को बाहर लाए।"
विद्यालय के छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुछ छात्रों ने स्वामी जी के शिकागो धर्म सम्मेलन के ऐतिहासिक भाषण के अंशों को सुनाया, जिसे सुनकर पूरा विद्यालय परिसर देशभक्ति और गौरव की भावना से ओत-प्रोत हो गया। बच्चों ने स्वामी जी की जीवनी पर आधारित लघु नाटिका और विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया।
समाज में योगदान और संदेश
स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके त्याग, तपस्या और देशप्रेम के प्रति जागरूक करना था। झंडापुर मध्य विद्यालय में हुई इस सभा में यह संदेश दिया गया कि स्वामी जी का जीवन हमें सिखाता है कि किस प्रकार एक व्यक्ति अपने विचारों और पुरुषार्थ के बल पर पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के सभी सदस्यों ने मौन रहकर स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विद्यालय का वातावरण भक्तिमय और प्रेरणादायक बना रहा। प्रधानाध्यापक राजीव नयन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि विद्यालय का प्रयास है कि भविष्य में भी ऐसे महान पुरुषों की जीवनियों के माध्यम से छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास किया जाए।