सुल्तानगंज में बांग्ला सावन की शुरुआत के साथ ही कांवरियों की सेवा में जुटा स्वास्थ्य विभाग; सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने किया स्वास्थ्य शिविरों का औचक निरीक्षण, कांवरियों को मिल रही हैं अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) की पावन यात्रा पर निकलने वाले शिव भक्तों के लिए आस्था और विश्वास के सबसे बड़े केंद्र सुल्तानगंज में बांग्ला सावन (Bangla Sawan) के पावन अवसर पर स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। उत्तरवाहिनी गंगा तट से जल भरकर देवघर की कठिन और लंबी पैदल यात्रा पर निकलने वाले लाखों कांवरियों (Kanwariyas) के स्वास्थ्य और प्राथमिक उपचार की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (Civil Surgeon) डॉ. अशोक प्रसाद ने सुल्तानगंज के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए गए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का औचक निरीक्षण किया और वहां दी जा रही चिकित्सा सेवाओं का बारीकी से जायजा लिया।

क्या है पूरा मामला? बांग्ला सावन पर उमड़ी शिव भक्तों की भीड़ और स्वास्थ्य महकमे की तैयारी

बिहार और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ देश के विभिन्न कोनों से आने वाले शिव भक्तों के लिए बांग्ला सावन का महीना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दौरान सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम (गंगा तट) पर स्नान और जल उठाने के लिए भारी संख्या में कांवरियों का रेला उमड़ पड़ता है।

अत्यधिक भीड़भाड़, लगातार पैदल चलने के कारण पैरों में छाले, थकान, निर्जलीकरण (Dehydration), पेट दर्द, बुखार और अन्य आपातकालीन स्वास्थ्य समस्याओं से कांवरियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर कई रणनीतिक जगहों पर कैंप स्थापित किए हैं। सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद के निरीक्षण के दौरान इन शिविरों में तैनात मेडिकल टीमों की सक्रियता और दवाओं की उपलब्धता की चाक-चौबंद व्यवस्था देखने को मिली।

निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने परखी व्यवस्थाएं

मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक प्रसाद ने सुल्तानगंज के मुख्य कांवरिया पथ, जहाज घाट, कच्ची कांवरिया मार्ग और रेलवे स्टेशन के पास बनाए गए अस्थायी चिकित्सा शिविरों का एक-एक कर दौरा किया। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष रूप से समीक्षा की:

चिकित्सकों और पारा मेडिकल स्टाफ की तैनाती: शिविरों में रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और नर्सिंग स्टाफ की उपस्थिति की जांच की गई। सिविल सर्जन ने निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में कांवरिया पथ पर चिकित्सा शिविर खाली नहीं रहने चाहिए, 24 घंटे चिकित्सा कर्मियों की मुस्तैदी अनिवार्य है।

जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता: निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्राथमिक उपचार से जुड़ी जीवन रक्षक दवाएं (Essential & Life-saving Medicines), ओआरएस (ORS) के पैकेट, एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक गोलियां, पट्टियां और एंटीसेप्टिक क्रीम के स्टॉक का मिलान किया। साथ ही, सांप के काटने (Snake Bite) और लू से बचाने वाली दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में रखने का निर्देश दिया।

एंबुलेंस सेवा और रेफरल सिस्टम: कांवरियों की किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए शिविरों के पास एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की तैनाती की स्थिति का जायजा लिया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मरीज को अनुमंडल अस्पताल या मायागंज अस्पताल (भागलपुर) रेफर किया जा सके।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एक्शन मोड में स्वास्थ्य विभाग

निरीक्षण के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने बताया कि जिला पदाधिकारी (DM) के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में सुल्तानगंज से लेकर कांवरिया पथ तक स्वास्थ्य सेवाओं का महाजाल बिछाया गया है। जिलाधिकारी ने पहले ही यह सुनिश्चित करने को कहा था कि बाबा भोलेनाथ के दरबार में आने वाले किसी भी शिव भक्त को इलाज के अभाव में कोई कष्ट न उठाना पड़े।

सिविल सर्जन ने कहा कि कांवरियों की सेवा करना प्रशासन का सबसे बड़ा कर्तव्य है। विभाग द्वारा कांवरिया पथ पर हेल्प डेस्क (Help Desk) भी बनाए गए हैं, जहां से स्वास्थ्य संबंधी घोषणाएं और कांवरियों को लगातार स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।

कांवरियों और स्थानीय लोगों ने की सराहना

स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए गए इन कदमों से सुल्तानगंज में जल उठाने आए कांवरियों में काफी संतोष देखा जा रहा है। झारखंड और पश्चिम बंगाल से आए कई कांवरियों ने बताया कि रास्ते में पैर दर्द और थकान होने पर तुरंत शिविर में मुफ्त दवा और मरहम-पट्टी की सुविधा मिलने से उनकी यात्रा काफी आसान हो गई है। जगह-जगह डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी ने उन्हें एक मानसिक संबल दिया है।

सुल्तानगंज में बांग्ला सावन के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा खोले गए ये स्वास्थ्य शिविर केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि कांवरियों की आस्था और सुरक्षा का एक बड़ा संबल बन चुके हैं। मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक प्रसाद द्वारा खुद मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना यह साबित करता है कि जिला प्रशासन इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है। यह व्यवस्था न केवल कांवरियों की यात्रा को सुगम बना रही है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश कर रही है।