विभागाध्यक्ष पर लगा घिनौना आरोप, कैंपस से लेकर पुलिस महकमे तक खलबली!
बिहार के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थानों में शुमार पटना कॉलेज (Patna College) एक बार फिर विवादों के भंवर में है। इस बार मामला किसी छात्र गुट की आपसी लड़ाई या प्रशासनिक ढिलाई का नहीं, बल्कि मर्यादाओं को तार-तार करने वाले एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप का है। पटना कॉलेज के एक विभागाध्यक्ष (Head of Department - HOD) पर एक युवती ने बार-बार यौन शोषण (Sexual Harassment/Exploitation) करने का गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़िता का दावा है कि जब वह कॉलेज में काउंसलर के पद पर कार्यरत थी, तब रुतबे और पद का धौंस दिखाकर उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। इस मामले के सामने आते ही पटना यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? (The High-Profile Accusation)
घटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित युवती ने हिम्मत जुटाकर पटना के स्थानीय थाने में इस पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पत्र में युवती ने जो आपबीती सुनाई है, उसने कॉलेज प्रशासन की आंतरिक सुरक्षा और महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा (POSH Act) के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
काउंसलर के पद पर तैनाती: पीड़िता के मुताबिक, वह पटना कॉलेज में एक काउंसलर (Counselor) के रूप में काम कर रही थी। इसी दौरान विभाग के एचओडी (विभाध्यक्ष) के साथ उसका आधिकारिक संपर्क हुआ।
मदद के बहाने जाल: आरोप है कि शुरुआत में विभागाध्यक्ष ने काम सिखाने और नौकरी में मदद करने के बहाने युवती से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कीं।
कई बार यौन शोषण का आरोप: एफआईआर के लिए दिए गए आवेदन में युवती ने स्पष्ट किया है कि आरोपी प्रोफेसर ने उसके सीधेपन और नौकरी छूटने के डर का फायदा उठाया। युवती का आरोप है कि अलग-अलग मौकों पर उसका कई बार यौन शोषण किया गया। जब उसने विरोध करने की कोशिश की, तो उसे करियर बर्बाद करने और नौकरी से निकालने की धमकियां दी गईं।
थाने में शिकायत और पुलिसिया ऐक्शन
इस सनसनीखेज मामले की गूंज जैसे ही पुलिस स्टेशन पहुंची, पुलिस प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड में आ गया। चूंकि मामला पटना यूनिवर्सिटी के एक सीनियर प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष से जुड़ा है, इसलिए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
पुलिस जांच के मुख्य बिंदु:
धाराओं के तहत मामला दर्ज: पीड़िता के लिखित बयान के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसमें कार्यस्थल पर प्रताड़ना और डरा-धमकाकर यौन शोषण करने की धाराएं शामिल हैं।
पीड़िता का बयान: पुलिस ने पीड़िता का प्रारंभिक बयान दर्ज कर लिया है। कानूनन, इस तरह के मामलों में पीड़िता का कोर्ट में धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया जाता है, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मेडिकल जांच की तैयारी: नियमानुसार पीड़िता की मेडिकल जांच कराने और आरोपों से जुड़े डिजिटल या अन्य साक्ष्यों (जैसे व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग्स) को खंगालने का काम शुरू हो गया है।
कैंपस में आक्रोश: छात्रों और संगठनों का फूटा गुस्सा
जैसे ही यह खबर पटना कॉलेज के छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों (Student Unions) तक पहुंची, पूरे कैंपस में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया। 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहे जाने वाले इस संस्थान की साख पर लगे इस दाग से छात्र बेहद गुस्से में हैं।
"जिस शिक्षक को छात्र पिता तुल्य और मार्गदर्शक मानते हैं, अगर वही रक्षक भक्षक बन जाए, तो बेटियां पढ़ने और काम करने कहां जाएंगी?" — कैंपस में प्रदर्शन कर रहे एक छात्र प्रतिनिधि का बयान।
कॉलेज में विरोध की लहर:
इंसाफ की मांग: छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर और विवि प्रशासनिक भवन के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छात्रों की मांग है कि आरोपी विभागाध्यक्ष को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए।
सुरक्षा पर सवाल: इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में महिला कर्मचारी और छात्राएं सुरक्षित हैं?
विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख: जांच कमेटी का गठन?
इस पूरे मामले पर पटना विश्वविद्यालय (Patna University) प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है। बदनामी के डर से विवि के आला अधिकारी कैमरे पर कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक विवि स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC): सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, हर संस्थान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ एक आंतरिक जांच कमेटी (ICC) का होना अनिवार्य है। विवि प्रशासन इस मामले को आईसीसी को सौंपने की तैयारी में है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार: पुलिस की तफ्तीश जैसे ही आगे बढ़ेगी और यदि आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ प्राथमिक साक्ष्य मिलते हैं, तो राजभवन और विवि प्रशासन की ओर से उन पर निलंबन की गाज गिरना तय माना जा रहा है।
'पावर डायनेमिक्स' और कार्यस्थल पर उत्पीड़न का पुराना रोग
यह मामला केवल एक प्रोफेसर या एक युवती का नहीं है, बल्कि यह उस 'पावर डायनेमिक्स' (Power Dynamics) को दर्शाता है, जहां ऊंचे पदों पर बैठे लोग अपने से जूनियर या संविदा (Contract) पर काम करने वाले कर्मचारियों का शोषण करते हैं।
नौकरी जाने का डर: एक काउंसलर के रूप में काम कर रही युवती के लिए विभागाध्यक्ष की बात को टालना या उनका विरोध करना आजीविका खोने के डर जैसा था। आरोपी ने इसी लाचारी का फायदा उठाया।
ब्लैकमेलिंग का खेल: अक्सर ऐसे मामलों में देखा गया है कि पीड़ित समाज और बदनामी के डर से महीनों चुप रहते हैं, जिससे आरोपियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं। लेकिन इस युवती ने थाने पहुंचकर उस चुप्पी को तोड़ा है।
पटना कॉलेज का इतिहास गौरवशाली रहा है। यहां से पढ़कर निकले राजनेताओं, नौकरशाहों और विद्वानों ने देश-दुनिया में नाम कमाया है। ऐसे में एक विभागाध्यक्ष पर लगे इन सनसनीखेज आरोपों ने कॉलेज की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है।
अब पूरी नजर पुलिस की जांच और अदालत के रुख पर है। कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस को बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के निष्पक्षता से जांच करनी चाहिए, ताकि अगर आरोप सच हैं तो दोषी को सख्त से सख्त सजा मिले और अगर इसके पीछे कोई अन्य कहानी है तो वह भी साफ हो सके। बहरहाल, इस घटना ने पूरे पटना को हिलाकर रख दिया है।