मुजफ्फरपुर में 'हसीना गैंग' की दोबारा दस्तक: आर्केस्ट्रा से जुड़ी महिला ने बदमाशों के साथ मिलकर बनाई आपराधिक मंडली, हाईवे पर लूट और छिनतई का आतंक
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक बार फिर से 'हसीना गैंग' के सक्रिय होने की चर्चा ने पुलिस महकमे और आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। पुलिस सूत्रों से मिली गुप्त जानकारी के अनुसार, कभी आर्केस्ट्रा में काम कर चुकी एक महिला ने मुजफ्फरपुर के विभिन्न इलाकों जैसे कांटी, ब्रह्मपुरा और अहियापुर के शातिर बदमाशों को मिलाकर एक नया और खतरनाक गिरोह तैयार किया है। यह गिरोह मुख्य रूप से सुनसान रास्तों और राष्ट्रीय राजमार्गों (Highways) पर लूटपाट, हथियार के बल पर छिनतई और आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहा है। हालांकि, इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस के सामने थानों के बीच सीमा विवाद (Jurisdiction Dispute) एक बड़ी बाधा बनकर उभर रहा है।
क्या है 'हसीना गैंग' और इसका नया स्वरूप?
मुजफ्फरपुर के आपराधिक इतिहास में महिला सरगनाओं द्वारा गिरोह चलाने का पुराना ट्रेंड रहा है, और एक बार फिर 'हसीना गैंग' का नाम सामने आने से पुलिस सतर्क हो गई है:
आर्केस्ट्रा कनेक्शन: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह की मुख्य संचालिका या सरगना वह महिला है जो अतीत में विभिन्न आर्केस्ट्रा पार्टियों में काम कर चुकी है। इस दौरान उसके संपर्क में कई कुख्यात अपराधी, डांसर और स्थानीय बदमाश आए।
गैंग का विस्तार: उसने कांटी, ब्रह्मपुरा और अहियापुर जैसे अपराध के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले थानों के क्षेत्रों से शातिर अपराधियों को जोड़ा। इन बदमाशों का इस्तेमाल वह रेकी करने, हथियार छिपाने और मुख्य वारदातों को अंजाम देने के लिए करती है।
मुखौटा और रणनीति: महिला सरगना होने के कारण पुलिस और आम लोगों को आसानी से शक नहीं होता, जिसका फायदा उठाकर यह गैंग लंबे समय से सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहा था।
हाईवे पर लूट और छिनतई का तांडव
यह नया गिरोह मुख्य रूप से रात के समय या सुबह-सवेरे हाइवे पर चलने वाले वाहन चालकों, व्यापारियों और राहगीरों को अपना निशाना बना रहा है:
लूट का तरीका: गैंग के सदस्य पहले सुनसान सड़कों पर यात्रियों को रोकते हैं या उनकी गाड़ियों को ओवरटेक कर रोकते हैं। इसके बाद हथियार का डर दिखाकर नकदी, मोबाइल फोन, जेवर और कीमती सामान लूट लेते हैं।
अहियापुर, कांटी और ब्रह्मपुरा क्षेत्र बना सेफ जोन: मुजफ्फरपुर के ये तीनों इलाके हाइवे और मुख्य मार्गों से जुड़े हुए हैं। बदमाश वारदात को किसी एक थाना क्षेत्र में अंजाम देते हैं और तुरंत दूसरे थाना क्षेत्र की सीमा में फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस के हाथ आसानी से नहीं लगते।
पुलिस कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा: 'सीमा विवाद'
इस गैंग के खिलाफ शिकंजा कसने में मुजफ्फरपुर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थानों के बीच का सीमा विवाद साबित हो रहा है:
थानों की खींचतान: कांटी, ब्रह्मपुरा और अहियापुर थाने की सीमाएं कई जगहों पर आपस में मिलती हैं। जब भी कोई लूटपाट या छिनतई की घटना होती है, तो पीड़ित शिकायत लेकर थाने पहुंचता है, लेकिन पुलिसकर्मी अक्सर यह तय करने में समय गंवा देते हैं कि मामला किस थाने के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में आता है।
अपराधियों को फायदा: इस कागजी प्रक्रिया और क्षेत्राधिकार की खींचतान का सीधा फायदा 'हसीना गैंग' के सदस्य उठाते हैं। पुलिस की सुस्त प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय की कमी के कारण बदमाश आसानी से राज्य या जिले की सीमा से बाहर निकलने में कामयाब हो जाते हैं।
पुलिस प्रशासन की रणनीति और आगे की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस गिरोह के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं:
इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत: पुलिस ने आर्केस्ट्रा संचालकों, संदिग्ध होटलों और हाइवे के किनारे स्थित ढाबों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। महिला सरगना और उसके खास गुर्गों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
ज्इंट ऑपरेशन: सीमा विवाद की समस्या को खत्म करने के लिए कांटी, ब्रह्मपुरा और अहियापुर थानों की पुलिस को आपस में समन्वय बनाकर संयुक्त छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह के सभी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और हाईवे पर आतंक का पर्याय बन चुके इस 'हसीना गैंग' का पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा।