बुद्धूचक थाना क्षेत्र में बढ़ते अपराध और पुलिस-प्रशासन की शिथिलता पर उठ रहे सवाल; ग्रामीणों में आक्रोश

कहलगांव (भागलपुर): भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत बुद्धूचक थाना क्षेत्र इन दिनों अपराध की बढ़ती घटनाओं और पुलिस की कथित उदासीनता के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में एक गांव में हुई घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जिससे आमजन में असुरक्षा का भाव गहराता जा रहा है।

घटना की पृष्ठभूमि: क्या हुआ बुद्धूचक में?

बुद्धूचक थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव में हुई हालिया घटना ने पूरे इलाके को सकते में डाल दिया है। हालांकि पुलिस इस मामले में आधिकारिक तौर पर बहुत कम जानकारी साझा कर रही है, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना की सूचना देने के घंटों बाद भी पुलिस मौके पर समय से नहीं पहुंची, जिससे अपराधियों को भागने का पर्याप्त मौका मिल गया।

पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि बुद्धूचक पुलिस की कार्यशैली 'देर और अंधेर' वाली बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस की गश्त (Patrolling) न के बराबर है और छोटे-मोटे विवादों पर भी समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती। इससे बड़े अपराधों की जड़ें मजबूत हो रही हैं।

जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन की आलोचना करते हुए कुछ प्रमुख बिंदु उठाए हैं:

विलंबित कार्रवाई: किसी भी घटना के बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी करना।

गश्त का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त न होना, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं।

संवादहीनता: पुलिस और जनता के बीच बढ़ती दूरी, जिससे खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान लगभग बंद सा हो गया है।

ग्रामीणों का बढ़ता गुस्सा

गांव के निवासियों का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए अब खुद ही चिंतित हैं। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "पहले पुलिस का नाम सुनकर अपराधी डरते थे, अब पुलिस के सामने ही गुंडागर्दी हो रही है और वे मूकदर्शक बने रहते हैं। यदि प्रशासन ने अपनी भूमिका नहीं सुधारी, तो हमें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ेगा।"

वरिष्ठ अधिकारियों का रुख

इस मामले पर जब हमने प्रशासनिक दृष्टिकोण जानना चाहा, तो विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुलिस अपनी सीमाओं के भीतर रहकर काम कर रही है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि क्षेत्र में मैनपावर की कमी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण गश्त में कुछ दिक्कतें आती हैं। वरीय पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बुद्धूचक थाने की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर कार्रवाई होगी।

असुरक्षा के साये में लोग

बुद्धूचक के इस गांव में रहने वाले लोगों की दिनचर्या अब डर के साये में कट रही है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी शाम होते ही घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि पुलिस को केवल औपचारिक केस दर्ज करने से ऊपर उठकर धरातल पर अपराधियों के खिलाफ 'सर्च ऑपरेशन' चलाने चाहिए।

समाधान की राह: अब आगे क्या?

स्थानीय बुद्धिजीवियों का सुझाव है कि:

थाने में जन-सुनवाई: थाना प्रभारी को सप्ताह में कम से कम दो बार गांवों में जाकर जन-सुनवाई करनी चाहिए।

सीसीटीवी सर्विलांस: गांव के मुख्य चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए।

युवा सुरक्षा समिति: गांव स्तर पर पुलिस और युवाओं की एक समन्वय समिति बने, जो अपराध की सूचना समय पर पुलिस को दे सके।

कहलगांव का बुद्धूचक इलाका आज बदलाव की मांग कर रहा है। पुलिस-प्रशासन को यह समझना होगा कि वर्दी का रौब जनसेवा के लिए है, न कि जनता को उनके हाल पर छोड़ने के लिए। जब तक पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सक्रियता नहीं आएगी, तब तक अपराध पर अंकुश लगाना नामुमकिन होगा।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिला प्रशासन कहलगांव के इस संवेदनशील इलाके में शांति बहाली के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह सिलसिला इसी तरह चलता रहेगा।