मुरारका कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छह वर्ष पूरे होने पर भव्य विशेष व्याख्यान का आयोजन; प्रो. डॉ. राहुल कुमार और डॉ. विवेक कुमार सिंह ने नई शिक्षा नीति को बताया भारत के शैक्षणिक पुनर्जागरण का मील का पत्थर
भागलपुर, विशेष संवाददाता: देश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, रोजगारपरक और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सफल छह वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित प्रतिष्ठित मुरारका महाविद्यालय (Murarka College) के सभागार में एक विशेष और उच्चस्तरीय व्याख्यान सह सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में एनईपी-2020 के दूरगामी प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की चुनौतियां थीं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के प्रख्यात शिक्षाविदों और वक्ताओं ने इस दौरान अपने बहुमूल्य विचार साझा किए और छात्रों तथा शिक्षकों को इस नीति के बहुआयामी पहलुओं से अवगत कराया।
दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों का भव्य स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई:
विशिष्ट वक्ताओं की उपस्थिति: इस विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि के रूप में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. डॉ. राहुल कुमार और डॉ. विवेक कुमार सिंह ने शिरकत की। महाविद्यालय के प्राचार्य और वरिष्ठ अध्यापकों ने अंग वस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह भेंट कर दोनों आगत अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
छात्र-छात्राओं की भारी भागीदारी: कार्यक्रम में कॉलेज के विभिन्न संकाय (कला, विज्ञान और वाणिज्य) के सैकड़ों छात्र-छात्राएं, शोधार्थी (Scholars) और प्राध्यापक उपस्थित रहे। सभागार का पूरा माहौल अकादमिक चर्चा और जिज्ञासा से सराबोर नजर आया।
डॉ. विवेक कुमार सिंह का संबोधन: "पारंपरिक रटने की शिक्षा से मुक्ति और कौशल विकास पर जोर"
व्याख्यान सत्र की शुरुआत करते हुए डॉ. विवेक कुमार सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूलभूत सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला:
छात्र-केंद्रित और लचीला पाठ्यक्रम: डॉ. सिंह ने बताया कि एनईपी-2020 केवल सिलेबस में बदलाव नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षण पद्धति में एक आमूल-चूल परिवर्तन है। इस नीति के तहत मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (Multiple Entry and Exit System) की सुविधा दी गई है, जिससे छात्रों का वर्ष बर्बाद नहीं होता। यदि कोई छात्र पढ़ाई के बीच में कोई कोर्स छोड़ना चाहे, तो उसे सर्टिफिकेट या डिप्लोमा मिल जाता है और वह बाद में अपनी पढ़ाई वहीं से दोबारा शुरू कर सकता है।
रटन विद्या का अंत: उन्होंने कहा कि यह नीति छात्रों कोतात्विक समझ (Conceptual Understanding) और क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking) की ओर ले जाती है, न कि पुरानी रटन विद्या पर आधारित है। इसमें कौशल विकास (Skill Development), इंटर्नशिप और व्यावहारिक ज्ञान को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।
प्रो. डॉ. राहुल कुमार का मुख्य व्याख्यान: "वैश्विक स्तर पर भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एनईपी एक विजन"
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. राहुल कुमार ने अपने ओजस्वी और विश्लेषणात्मक संबोधन से उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया:
ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण: प्रो. राहुल कुमार ने कहा कि पिछले छह वर्षों में एनईपी-2020 ने देश के शैक्षणिक परिदृश्य में जो सकारात्मक बदलाव लाए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। यह नीति भारत को प्राचीन नालंदा और तक्षशिला की तर्ज पर पुनः एक वैश्विक 'ज्ञान महाशक्ति' (Knowledge Superpower) के रूप में स्थापित करने का एक ठोस विजन है।
भारतीय मूल्यों और आधुनिक विज्ञान का समन्वय: उन्होंने रेखांकित किया कि यह नई शिक्षा नीति आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और इनोवेशन को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मातृभाषा के साथ खूबसूरती से जोड़ती है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में पठन-पाठन पर जोर देने से ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार और अधिक सुगम हो गए हैं।
शिक्षकों की भूमिका पर विचार: प्रो. कुमार ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले मार्गदर्शक न रहें, बल्कि छात्रों के मार्गदर्शक (Mentors) बनकर उन्हें नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें।
प्रश्नकाल और संवाद सत्र (Interactive Session)
व्याख्यान के उपरांत एक बेहद रोचक प्रश्नोत्तरी और संवाद सत्र का आयोजन किया गया:
छात्रों की जिज्ञासाएं: विद्यार्थियों ने एनईपी के तहत मिलने वाले चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (4-Year Undergraduate Course), क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम (ABC ID) और रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई सवाल पूछे।
संतोषजनक समाधान: मंच पर मौजूद प्रो. राहुल कुमार और डॉ. विवेक कुमार सिंह ने छात्रों के सभी सवालों के बड़े ही सरल और व्यावहारिक उत्तर दिए, जिससे विद्यार्थियों की कई शंकाएं दूर हुईं।
सुल्तानगंज के मुरारका महाविद्यालय में आयोजित यह विशेष व्याख्यान इस बात का प्रतीक रहा कि सुदूर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थान भी राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों को लेकर पूरी तरह जागरूक और तत्पर हैं। एनईपी-2020 के छह वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों और शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के फायदों से रूबरू कराया, बल्कि उन्हें देश के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया।