'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत भव्य रैली का आयोजन, गायत्री मंदिर से निकलकर जिला समाहरणालय तक पहुँचा जनसैलाब
बिहार के पूर्णिया जिले में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सौहार्द के बीच भारतीय संस्कृति की रीढ़ मानी जाने वाली गो माता के संरक्षण और सम्मान के लिए एक ऐतिहासिक व विशाल आयोजन देखने को मिला। जिले में 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत एक भव्य और विशाल रैली निकाली गई, जिसमें हजारों की संख्या में धर्मप्रेमी, साधु-संत, युवा और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। गोवंश की रक्षा, उनके प्रति सम्मान का भाव जागृत करने और समाज में गो सेवा का संदेश फैलाने के उद्देश्य से आयोजित यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। यह रैली शहर के प्रसिद्ध गायत्री मंदिर से प्रारंभ हुई और विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए बजरंगबली मंदिर के रास्ते जिला समाहरणालय तक पहुँची। इस दौरान पूरा शहर "गो माता की जय" और वंदे मातरम के नारों से गूंज उठा।
क्या था इस भव्य अभियान और रैली का मुख्य उद्देश्य?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, इस गो सम्मान आह्वान अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को गो माता के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाना और गोवंश के संरक्षण के लिए एक जन-आंदोलन खड़ा करना है। आयोजकों का मानना है कि आधुनिकता की दौड़ में गोवंश की उपेक्षा हो रही है, जिससे आवारा घूमने वाले पशुओं की संख्या बढ़ रही है और उन्हें उचित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।
इस अभियान के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख संकल्पों को दोहराया गया:
गो माता का संरक्षण: गोवंश की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाना और समाज में गोपालन को बढ़ावा देना।
अधिकार और सम्मान: गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और उन्हें यथोचित सम्मान प्रदान करने की दिशा में आवाज बुलंद करना।
जागरूकता फैलाना: आम जनमानस को यह समझाना कि भारतीय कृषि और संस्कृति में गोवंश का क्या महत्व है और इसके बिना पर्यावरण व स्वास्थ्य की कल्पना अधूरी है।
गायत्री मंदिर से बजरंगबली मंदिर होते हुए जिला समाहरणालय तक निकला रूट
रैली के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह से ही गायत्री मंदिर के प्रांगण में लोगों का जुटना शुरू हो गया था। हाथों में तख्तियां, बैनर और भगवा झंडे थामे श्रद्धालु गो सेवा के नारे लगा रहे थे। गायत्री मंदिर में विधिवत पूजन और मंत्रोच्चार के बाद रैली का भव्य शुभारंभ हुआ।
रैली का मार्ग शहर के अति व्यस्त और संवेदनशील स्थानों से तय किया गया था:
प्रारंभिक बिंदु - गायत्री मंदिर: यहाँ से रैली ने अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी यात्रा शुरू की।
मध्य मार्ग - बजरंगबली मंदिर: रैली जब बजरंगबली मंदिर के समीप पहुँची, तो वहाँ स्थानीय श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर जुलूस का स्वागत किया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
अंतिम पड़ाव - जिला समाहरणालय: हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला समाहरणालय पहुँची, जहाँ यह एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गई।
समाहरणालय के समक्ष सभा और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया ज्ञापन
जिला समाहरणालय पहुँचने के बाद रैली में शामिल प्रमुख संतों, विचारकों और अभियान के संयोजकों ने एक सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि गो सेवा केवल एक धार्मिक विषय नहीं है, बल्कि यह देश की कृषि और अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। गोवंश के संरक्षण से ही जैविक खेती और शुद्ध पर्यावरण की कल्पना को साकार किया जा सकता है।
सभा के उपरांत, अभियान के शिष्टमंडल ने महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि:
गोवंश की तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और दोषियों पर रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई हो।
हर पंचायत और जिले स्तर पर गोशालाओं का निर्माण कराया जाए तथा उन्हें सरकारी सहायता प्रदान की जाए।
सड़कों पर लावारिस घूम रहे गोवंश के लिए स्थायी आश्रय स्थलों की व्यवस्था हो।
समाज में व्यापक प्रभाव और शांतिपूर्ण समापन
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के बावजूद अनुशासन और शांति का पूरा परिचय दिया गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि यातायात बाधित न हो और रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
पूर्णिया में हुए इस 'गो सम्मान आह्वान अभियान' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समाज के लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति कितने जागरूक हैं। इस रैली के माध्यम से पूर्णिया की धरती से पूरे उत्तर बिहार में गो सेवा और संरक्षण का एक सशक्त संदेश गया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में लंबे समय तक बनी रहेगी।