सबौर कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूरे होने पर भव्य एकदिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन; 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और NEP-2020 के जरिए विकसित भारत 2047' विषय पर वक्ताओं ने रखे विचार

भागलपुर, विशेष संवाददाता: शिक्षा के क्षेत्र में देश को एक नई दिशा और आधुनिक पहचान देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सफल और महत्वपूर्ण छह वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भागलपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सबौर कॉलेज में विशेष शैक्षणिक गतिविधियों का भव्य आयोजन किया गया। प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 5 अगस्त को कॉलेज परिसर में एकदिवसीय राष्ट्रीय स्तर की व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य केंद्रीय विषय 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और NEP-2020 द्वारा विकसित भारत 2047' रखा गया था। इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य, प्रबुद्ध शिक्षकों, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया, जिससे पूरा कॉलेज परिसर अकादमिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

दीप प्रज्ज्वलन और कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर और कुलगीत के साथ की गई:

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति: मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ डॉ. आभा कुमारी विशेष रूप से उपस्थित थीं। उनके साथ कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसरों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मंच की शोभा बढ़ाई।

अकादमिक माहौल: कॉलेज के सभाकक्ष को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था, जहां छात्र-छात्राओं में नई शिक्षा नीति और भविष्य के भारत को लेकर भारी उत्सुकता देखने को मिली। वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आज का दौर तकनीक और शिक्षा के अनूठे संगम का दौर है।

मुख्य वक्ता डॉ. आभा कुमारी का प्रेरणादायी संबोधन

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य वक्ता डॉ. आभा कुमारी का सारगर्भित और ज्ञानवर्धक व्याख्यान रहा। उन्होंने अपने संबोधन में 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता' (AI) और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के बीच के गहरे और दूरगामी संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला:

शिक्षा में तकनीकी क्रांति: डॉ. आभा कुमारी ने कहा कि NEP-2020 केवल पारंपरिक शिक्षा पद्धति में बदलाव का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भविष्य की उन चुनौतियों और संभावनाओं के लिए युवाओं को तैयार करने का एक मजबूत माध्यम है, जहां तकनीक और मानवी संवेदनाओं का समन्वय जरूरी है।

विकसित भारत 2047 का रोडमैप: उन्होंने स्पष्ट किया कि जब देश अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा (वर्ष 2047), तब भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' के रूप में स्थापित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी शिक्षा की रीढ़ की हड्डी जैसी भूमिका होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज के युवा ही इस महाअभियान के असली सिपाही हैं।

NEP-2020 के छह वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा

व्याख्यानमाला के दौरान पिछले छह वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और उसके सकारात्मक परिणामों पर भी गहन मंथन किया गया:

बहु-विषयक शिक्षा प्रणाली (Multidisciplinary Education): वक्ताओं ने बताया कि कैसे इस नीति के लागू होने से अब विद्यार्थियों को पारंपरिक धाराओं से बाहर निकलकर अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न विषयों (Arts, Science, Commerce and Tech) को एक साथ पढ़ने की स्वतंत्रता मिली है।

कौशल विकास और अनुसंधान (Skill Development and Research): शिक्षा नीति मेंतात्विक सुधार करते हुए रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर प्रायोगिक और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है, जिससे छात्र पढ़ाई पूरी करते ही रोजगार पाने या स्वरोजगार स्थापित करने में सक्षम हो रहे हैं।

छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी

इस एकदिवसीय आयोजन के दौरान कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं और ओपन डिस्कशन सत्र भी आयोजित किए गए:

सवालों का दौर: छात्रों ने मुख्य वक्ता डॉ. आभा कुमारी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, उसकी नैतिकता और रोजगार के नए अवसरों पर कई तीखे और प्रासंगिक सवाल पूछे, जिनका वक्ता ने बड़े ही सहज और वैज्ञानिक तरीके से जवाब दिया।

शिक्षकों और कर्मचारियों का योगदान: कॉलेज के सभी शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सराहनीय भूमिका निभाई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपने संस्थानों में NEP-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।

सबौर कॉलेज में आयोजित यह एकदिवसीय व्याख्यानमाला इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर के शैक्षणिक संस्थान बदलते दौर के साथ कदमताल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और NEP-2020' के इस अनूठे संगम पर हुई चर्चा ने न केवल विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन किया, बल्कि उन्हें वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए एक नई प्रेरणा भी दी। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस सफल आयोजन का समापन हुआ।