भागलपुर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंग प्रदेश में प्रथम आगमन के 100 वर्ष पूरे भव्य राष्ट्रीय समारोह का आयोजन, वक्ताओं ने बापू की ऐतिहासिक भागलपुर यात्रा को किया याद

भागलपुर (संवाद सूत्र): रेशम नगरी भागलपुर के इतिहास में गुरुवार का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंग प्रदेश (भागलपुर) की धरती पर पहली बार ऐतिहासिक आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर देश के प्रतिष्ठित गांधीवादी विचारकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग के छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में शिरकत की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बापू के उन आदर्शों, विचारों और उनके द्वारा भागलपुर की जनता को दिए गए संदेशों को आज की युवा पीढ़ी तक पहुँचाना था, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस क्षेत्र की दिशा तय की थी।

शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ और दीप प्रज्ज्वलन

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य आतिथ्य कक्ष में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई:

गांधीवादी विचारकों की उपस्थिति: समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ गांधीवादियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के भौतिकवादी युग में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, और ग्राम स्वराज के सिद्धांत प्रासंगिक ही नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं।

गांधी विचार विभाग की सक्रिय सहभागिता: TMBU के गांधी विचार विभाग के छात्रों ने इस अवसर पर बापू की भागलपुर यात्रा से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों, दुर्लभ चित्रों और पत्रों की एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई, जिसने उपस्थित अतिथियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

बापू की ऐतिहासिक भागलपुर यात्रा (100 वर्ष पूर्व) का स्मरण

समारोह के मुख्य सत्र में वक्ताओं ने महात्मा गांधी की भागलपुर यात्रा के इतिहास और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला:

स्वतंत्रता आंदोलन को मिली थी ऊर्जा: वक्ताओं ने बताया कि जब महात्मा गांधी पहली बार भागलपुर आए थे, तब यहाँ के युवाओं, किसानों और बुद्धिजीवियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ था। बापू के ओजस्वी भाषणों ने असहयोग आंदोलन और स्वदेशी अपनाओ अभियान को अंग प्रदेश में तीव्र गति प्रदान की थी।

अस्पृश्यता निवारण और शिक्षा पर जोर: अपनी भागलपुर यात्रा के दौरान गांधीजी ने न केवल स्वतंत्रता की अलख जगाई, बल्कि सामाजिक समरसता, छुआछूत के अंत, और बुनियादी शिक्षा के प्रसार पर भी जोर दिया था। उनके इन विचारों ने यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

वक्ताओं के विचार: "आज के दौर में और अधिक प्रासंगिक हैं गांधी के विचार"

समारोह को संबोधित करते हुए प्रमुख वक्ताओं और गांधीवादी विचारकों ने वर्तमान समय में बापू के सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर विचार रखे:

पर्यावरण और शांति की सीख: वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी पर्यावरण संरक्षण के सबसे बड़े पैरोकार थे। उनका मानना था कि प्रकृति हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन हमारे लालच को नहीं। आज जब दुनिया प्रदूषण और युद्ध की विभीषिका झेल रही है, तब गांधी का मार्ग ही एकमात्र विकल्प है।

युवाओं को संदेश: वरिष्ठ वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और दिखावे की दुनिया से बाहर निकलकर गांधी के विचारों को अपने जीवन में उतारें। अहिंसा और सत्य का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन इसका परिणाम हमेशा चिरस्थायी और सुखद होता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और शोध पत्रों का वाचन

इस राष्ट्रीय समारोह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं:

भजन और देशभक्ति गीत: विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने गांधी जी के प्रिय भजन "वैष्णव जन तो तेने कहिए..." का गायन कर पूरे सभागार को बापू की स्मृतियों से सराबोर कर दिया।

शोध सत्र: एक विशेष तकनीकी सत्र में शोधार्थियों ने 'गांधी दर्शन और आधुनिक भारत' विषय पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में गांधीवादी मॉडल पर गहन चर्चा हुई।

भागलपुर में महात्मा गांधी के प्रथम आगमन के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह राष्ट्रीय समारोह केवल एक ऐतिहासिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह अंग प्रदेश की धरती पर बापू के विचारों को पुनर्जीवित करने का एक महाअभियान था। वरिष्ठ गांधीवादियों और युवाओं की इस सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि समय चाहे जितना भी बदल जाए, महात्मा गांधी के विचार और मूल्य हमेशा अमर रहेंगे। यह शताब्दी समारोह भागलपुर के सांस्कृतिक और वैचारिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा सत्य और राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।