विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का भव्य आगाज; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुल्तानगंज में किया शुभारंभ, कांवरियों के लिए पहली बार ‘जीविका दीदी की रसोई’ और विशेष सुविधाओं का प्रबंध

भागलपुर, विशेष संवाददाता: शिवभक्ति और आस्था के सबसे बड़े अनुष्ठान कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले (Shravani Mela) का आज से आधिकारिक और भव्य आगाज हो चुका है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर जिले के ऐतिहासिक ऐतिहासिक नगरी सुल्तानगंज स्थित पावन नमामि गंगे घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ इस एक महीने तक चलने वाले मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह के दौरान सुल्तानगंज से लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाने वाले कांवरिया मार्ग में गजब का उत्साह और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। इस बार मेले को लेकर सरकार और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है।

सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट पर भव्य उद्घाटन समारोह

श्रावणी मेले के उद्घाटन को लेकर सुल्तानगंज क्षेत्र को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंगलवार को आयोजित इस भव्य उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ-साथ बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।

दिग्गजों की मौजूदगी: कार्यक्रम में बिहार के दोनों उप मुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद, विधायक और कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।

अजगैबीनाथ धाम से जलार्पण का संकल्प: उद्घाटन के साथ ही देश के कोने-कोने से पहुंचे लाखों कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा तट सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से पवित्र गंगा जल भरकर अपनी कठिन पैदल यात्रा (बोल बम कांवर यात्रा) का संकल्प लेना शुरू कर दिया है।

श्रावणी मेले का मुख्य आकर्षण: पहली बार ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत

इस वर्ष के श्रावणी मेले की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता कांवरियों के लिए शुरू की गई ‘जीविका दीदी की रसोई’ है, जिसका उद्घाटन के बाद से ही कांवरियों द्वारा स्वागत किया जा रहा है।

पूरी तरह सात्विक और शुद्ध भोजन: मेले के इतिहास में यह पहला अवसर है जब कांवरियों को मार्ग में रियायती और निर्धारित दरों पर ‘जीविका दीदी की रसोई’ के माध्यम से गर्मागर्म, सात्विक और शुद्ध भोजन मिलेगा

बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक का इस्तेमाल: कांवरियों की धार्मिक मान्यताओं और उपवास/शुद्धता के नियमों का विशेष ध्यान रखते हुए भोजन में लहसुन और प्याज का बिल्कुल उपयोग नहीं किया गया है। इसके साथ ही खाने में केवल सेंधा नमक का प्रयोग किया जा रहा है ताकि व्रत रखने वाले या शुद्ध आहार चाहने वाले शिवभक्त बिना किसी संकोच के भोजन का आनंद ले सकें।

ताजगी और स्वच्छता की गारंटी: प्रशासन की ओर से कड़े निर्देश दिए गए हैं कि रसोई में केवल ताजा भोजन ही परोसा जाएगा। बासी भोजन या सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी पाबंदी है, और बचा हुआ भोजन तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं की सेहत से कोई खिलवाड़ न हो। ग्रामीण महिलाओं (जीविका दीदियों) द्वारा संचालित इस व्यवस्था से उन्हें रोजगार और आर्थिक मजबूती भी मिल रही है।

कांवरियों की सुगमता के लिए इस बार की गई विशेष व्यवस्थाएं

लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए इस बार मेला क्षेत्र में कई आधुनिक और अभिनव प्रयोग किए गए हैं:

सड़क पर मैट बिछाने की व्यवस्था: चिलचिलाती धूप और गर्म बालू या पक्की सड़कों पर नंगे पांव चलने वाले कांवरियों के पैरों को राहत देने के लिए मुख्य कांवरिया पथ पर विशेष मैट (चटाई) बिछाई गई है, ताकि वे आसानी से अपनी यात्रा पूरी कर सकें

13 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र और कड़ी सुरक्षा: भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 13 प्रमुख सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर में मजिस्ट्रेट और पुलिस बलों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही सुल्तानगंज से देवघर मार्ग पर रात के वक्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शाम से लेकर सुबह तक लगातार पुलिस गश्त की व्यवस्था की गई है।

आधुनिक तकनीक और मोबाइल ऐप: श्रद्धालुओं की सहायता के लिए इस बार विशेष श्रावणी मेला मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिसके जरिए रूट, स्वास्थ्य शिविरों, विश्राम स्थलों और जरूरी आपातकालीन नंबरों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा भागलपुर के सुल्तानगंज में उद्घाटित यह श्रावणी मेला 2026 अपनी बेहतरीन व्यवस्थाओं और लोक-कल्याणकारी पहलों के कारण ऐतिहासिक बनता जा रहा है। कांवरियों के लिए पहली बार शुरू की गई ‘जीविका दीदी की रसोई’ (बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक युक्त सात्विक भोजन) ने सरकार की संवेदनशीलता को साबित कर दिया है। प्रशासन के पुख्ता इंतजामों और इन नई सुविधाओं के चलते इस वर्ष शिवभक्तों की यह कांवड़ यात्रा और अधिक सुरक्षित, सुगम और आनंददायक होने की पूरी उम्मीद है।