विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का भव्य आगाज; सुलतानगंज में कांवरिया पथ पर गूंजे 'बम-बम भोले' के जयकारे, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया उद्घाटन
भागलपुर, विशेष संवाददाता: पावन मास सावन के आगमन के साथ ही सिल्क सिटी भागलपुर के अंतर्गत आने वाला ऐतिहासिक शहर सुलतानगंज (अजगैबीनाथ धाम) पूरी तरह से शिवमय हो चुका है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं, और उत्तरवाहिनी गंगा तट से लेकर कांवरिया पथ तक केसरिया वस्त्रधारी शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। मेले के इस भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का विधिवत उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा मंगलवार को किया गया। इस अवसर पर विधि-व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और कांवरियों की सुविधाओं से जुड़े तमाम इंतजामों को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे देश-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
नमामि गंगे घाट पर भव्य उद्घाटन समारोह
श्रावणी मेले के उद्घाटन को लेकर सुलतानगंज के ऐतिहासिक नमामि गंगे घाट और मेला क्षेत्र को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हेलीकॉप्टर से सुलतानगंज पहुंचकर विधिवत रूप से मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक व पुलिस महकमे के वरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में साधु-संत व श्रद्धालु मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह के दौरान पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान मेला क्षेत्र में की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कांवरियों की सेवा और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गंगाजल भरने के लिए उमड़ा कांवरियों का जनसैलाब
सुल्तानगंज की पहचान यहां की उत्तरवाहिनी गंगा से है, जहां देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं।
उत्तरवाहिनी गंगा से जलार्पण: अजगैबीनाथ धाम स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्नान करने के बाद कांवरिया अपने पावन कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरते हैं। इसके बाद यहां से लगभग 105 किलोमीटर की कठिन और श्रद्धा से भरी पैदल यात्रा तय कर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ के लिए रवाना होते हैं।
केसरियामय हुआ संपूर्ण मार्ग: उद्घाटन के साथ ही पूरा सुल्तानगंज इलाका और कांवरिया पथ पूरी तरह से केसरिया रंग में रंग गया है। दूर-दराज से पहुंचे 'डाक बम' और सामान्य कांवरियों के उत्साह और उनकी ऊर्जा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।
कांवरियों के लिए चाक-चौबंद सुविधाएं और टेंट सिटी का निर्माण
बिहार सरकार के पर्यटन और नगर विकास विभाग द्वारा इस वर्ष श्रावणी मेले में कांवरियों की सुख-सुविधा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं:
टेंट सिटी और विश्राम स्थल: सुल्तानगंज से लेकर बिहार-झारखंड सीमा (दुम्मा) तक कांवरियों के रात्रि विश्राम और ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस टेंट सिटी का निर्माण कराया गया है। इनमें पंखे, कूलर, गद्देदार बिस्तर, पेयजल, शौचालय और प्रकाश की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य सेवाएं और एम्बुलेंस: कांवरिया पथ पर हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल रिलीफ कैंप बनाए गए हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और जीवन रक्षक दवाओं के साथ एम्बुलेंस चौबीसों घंटे तैनात रहेंगी।
रोशनी और सुरक्षा के कड़े प्रबंध: कांवरियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मेला क्षेत्र और कांवरिया मार्ग पर हाई-मास्ट लाइटें, सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा बलों और पुलिस कर्मियों की चप्पे-चप्पे पर तैनाती की गई है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और आधुनिक आकर्षण
इस बार मेले को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई नई पहलें की गई हैं। उद्घाटन संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा शिव भजनों की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के मनोरंजन और आकर्षण के लिए विशेष लेजर शो और नियमित गंगा महाआरती का प्रबंध भी किया गया है, जो इस बार के मेले का मुख्य आकर्षण केंद्र बने हुए
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा श्रावणी मेले के उद्घाटन के साथ ही सिल्क सिटी भागलपुर और सुलतानगंज का यह पावन क्षेत्र पूरी तरह से शिव आराधना में लीन हो गया है। प्रशासन की मुस्तैदी, आधुनिक सुविधाओं के प्रसार और कांवरियों के अटूट विश्वास के बल पर यह उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष का श्रावणी मेला पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए अत्यंत सुरक्षित, दिव्य और भव्य रूप से संपन्न होगा।