बिहार में नदियों का बढ़ा जलस्तर, डुमरियाघाट में गंडक लाल निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर; बलतारा में कोसी 73 सेंटीमीटर ऊपर
पटना। बिहार में मानसून की सक्रियता के बीच प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। नदी के बढ़े जलस्तर के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ की आशंका को लेकर लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, गोपालगंज और सारण जिले में फिलहाल गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है।
वहीं, खगड़िया जिले के बलतारा में कोसी नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से काफी ऊपर है। यहां कोसी 73 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। गंडक और कोसी के अलग-अलग हिस्सों में खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है।
डुमरियाघाट में गंडक लाल निशान से ऊपर
चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। नदी में पानी बढ़ने के साथ ही तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
गंडक नदी का जलस्तर नेपाल और उसके आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश से भी प्रभावित होता है। ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर नदी में अचानक पानी बढ़ सकता है। ऐसे में डुमरियाघाट और इसके आसपास के क्षेत्रों में नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। तटबंधों और नदी किनारे के इलाकों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी तरह की समस्या सामने आने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
गोपालगंज और सारण में फिलहाल राहत
गंडक नदी डुमरियाघाट में खतरे के निशान से ऊपर है, लेकिन गोपालगंज और सारण जिले में फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य है। इन दोनों जिलों में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बताया गया है।
इससे फिलहाल इन इलाकों के लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
यदि ऊपर के क्षेत्रों में लगातार बारिश होती है या नदी में पानी की मात्रा बढ़ती है, तो गोपालगंज और सारण में भी जलस्तर बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी संभावित बदलाव के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
बलतारा में कोसी 73 सेंटीमीटर ऊपर
गंडक के साथ-साथ कोसी नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। खगड़िया जिले के बलतारा में कोसी नदी खतरे के निशान से 73 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
कोसी नदी को बिहार की सबसे संवेदनशील नदियों में माना जाता है। बारिश के मौसम में इसके जलस्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है। तेज बहाव और नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है।
बलतारा में खतरे के निशान से 73 सेंटीमीटर ऊपर जलस्तर दर्ज होने के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। प्रशासन के लिए भी यह जरूरी है कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जाए।
तटबंधों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। गंडक और कोसी जैसी नदियों के किनारे बने तटबंध बाढ़ से बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
पानी का दबाव बढ़ने पर तटबंधों में कटाव या कमजोर हिस्सों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए जल संसाधन विभाग की टीमों द्वारा संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण करना जरूरी है।
यदि किसी स्थान पर कटाव, रिसाव या तटबंध पर अधिक दबाव की स्थिति बनती है तो तत्काल बचाव और मरम्मत कार्य शुरू करना आवश्यक होगा। इससे संभावित बाढ़ के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की बढ़ी चिंता
नदियों का जलस्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को होती है। ऐसे क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने पर पानी खेतों, सड़कों और घरों तक पहुंच सकता है।
किसानों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खेतों में अधिक पानी जमा होने से फसलों को नुकसान हो सकता है। वहीं ग्रामीण सड़कों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील गांवों की पहचान, आवश्यक राहत सामग्री और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पहले से तैयार रखनी पड़ती है।
नेपाल में बारिश का भी असर
गंडक और कोसी दोनों नदियों के जलस्तर पर नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। वहां भारी बारिश होने पर बिहार में आने वाले पानी की मात्रा बढ़ सकती है।
गंडक नदी के मामले में नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्र में बारिश का सीधा असर नदी के जलस्तर पर पड़ता है। इसी तरह कोसी के ऊपरी इलाकों में बारिश होने पर खगड़िया और आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ सकता है।
इसलिए बिहार में नदी की स्थिति का आकलन करते समय केवल स्थानीय बारिश को देखना पर्याप्त नहीं होता। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों की स्थिति भी लगातार देखनी पड़ती है।
प्रशासन के लिए अलर्ट मोड जरूरी
नदी के बढ़े जलस्तर के बीच प्रशासन के लिए अलर्ट मोड में रहना जरूरी है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारी करनी होती है।
नाव, राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित स्थानों की पहचान जैसे कदम संभावित बाढ़ की स्थिति में महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
इसके अलावा ग्रामीणों को समय पर सूचना देना भी जरूरी है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
किसानों के लिए भी चुनौती
गंडक और कोसी के बढ़े जलस्तर का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। बिहार के कई हिस्सों में खेती नदी और मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। सामान्य बारिश किसानों के लिए लाभकारी होती है, लेकिन अत्यधिक पानी खेतों में जमा होने से फसल खराब हो सकती है।
यदि नदी का पानी खेतों तक पहुंचता है तो धान और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा।
स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी बढ़ सकता है
बाढ़ या जलभराव की स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। दूषित पानी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए संभावित प्रभावित इलाकों में साफ पेयजल की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
लंबे समय तक पानी जमा रहने पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को भी संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखनी पड़ सकती है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों को अनावश्यक रूप से नदी के किनारे जाने से बचना चाहिए। बच्चों को विशेष रूप से नदी और तेज बहाव वाले पानी से दूर रखना जरूरी है।
ग्रामीणों को किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करना चाहिए। यदि जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में स्थिति पर रहेगी नजर
फिलहाल डुमरियाघाट में गंडक खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर है, जबकि गोपालगंज और सारण में नदी खतरे के निशान से नीचे है। दूसरी ओर, खगड़िया के बलतारा में कोसी 73 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पानी की मात्रा के आधार पर दोनों नदियों के जलस्तर में बदलाव हो सकता है। यदि बारिश कम होती है तो जलस्तर में कमी आने की संभावना बन सकती है, जबकि लगातार भारी बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कुल मिलाकर बिहार में गंडक और कोसी नदी के बढ़े जलस्तर ने बाढ़ की आशंका को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर 28 सेंटीमीटर ऊपर और बलतारा में कोसी का जलस्तर 73 सेंटीमीटर ऊपर है। हालांकि गोपालगंज और सारण में फिलहाल गंडक खतरे के निशान से नीचे है।
प्रशासन और जल संसाधन विभाग के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखना, तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक तैयारियां करना है। वहीं, नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।