गृहाणैली और कसबा नगर में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात: जलजमाव ने बढ़ाई मुश्किलें, प्रमुख सड़कें तब्दील हुईं तालाब में; नालियों के अभाव से नारकीय जीवन जीने को मजबूर स्थानीय लोग

पूर्णिया (कसबा/गृहाणैली): बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा नगर परिषद क्षेत्र और उससे सटे गृहाणैली इलाके में मानसूनी बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते इस पूरे क्षेत्र में जलजमाव की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। गृहाणैली से लेकर कसबा नगर के मुख्य बाजारों और आवासीय कॉलोनियों तक पानी भर जाने के कारण आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस इलाके में उचित जल निकासी और पक्की नालियों के पूर्ण अभाव के कारण बारिश का यह पानी कई दिनों तक जमा रहता है, जिससे मुख्य सड़कों पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोगों का घरों से निकलना तक दूभर हो गया है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

बारिश बनते ही तालाब में बदल जाती हैं सड़कें: आवागमन ठप

गृहाणैली और कसबा नगर के बीच की मुख्य सड़कें हों या भीतर की गलियां, लगातार हो रही बारिश के बाद हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है।

सड़कों पर पानी और गड्ढों का अदृश्य जाल: सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो जाने के कारण वाहन चालकों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ता है। सड़क और गड्ढों के बीच का अंतर समाप्त हो जाने के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और वृद्धों के लिए इन रास्तों से गुजरना असंभव सा हो गया है।

दुकानों और घरों के अंदर घुसा पानी: पानी की सही निकासी न होने के कारण बारिश का गंदा पानी स्थानीय लोगों के घरों, परिसरों और दुकानों के अंदर तक प्रवेश कर रहा है। इससे व्यापारियों का सामान खराब हो रहा है और आम परिवारों को घुटने भर गंदे पानी के बीच रहकर अपनी दिनचर्या बितानी पड़ रही है।

नालियों का अभाव: समस्याओं की असली जड़

स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि इस जलजमाव की समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में उचित जल निकासी प्रणाली (Drainage System) का पूरी तरह से न होना है।

विकास के दावों की पोल: लोगों का आरोप है कि नगर निकाय और स्थानीय प्रशासन द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर गृहाणैली और कसबा के कई इलाकों में आज तक मुख्य नालियों का निर्माण नहीं कराया गया है। जहाँ छोटी-मोटी नालियां हैं भी, उनकी नियमित रूप से साफ-सफाई या उड़ाही नहीं होती है, जिससे वे कचरे से पूरी तरह पटी रहती हैं।

कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात: जब भी आसमान में बादल घिरते और मूसलाधार बारिश होती है, तो पानी के निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। नतीजतन, पानी सड़कों पर जमा होकर कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देता है। गंदा पानी सड़ने के कारण अब इलाके में बदबू और संक्रमण का खतरा भी तेजी से मंडराने लगा है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश और प्रशासन से गुहार

लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे गृहाणैली और कसबा के ग्रामीणों व शहरवासियों का गुस्सा अब प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है।

जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल: स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद के अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाकर मामले को टाल दिया गया। ज़मीन पर कोई भी ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया है।

शीघ्र कार्रवाई की मांग: आक्रोशित जनता ने जिला प्रशासन और नगर प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि युद्धस्तर पर इस इलाके में जल निकासी की व्यवस्था की जाए। मानसून के इस मौसम में यदि जल्द ही नालियों का निर्माण और पानी की निकासी के लिए पंप सेट आदि की व्यवस्था नहीं की गई, तो लोग सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

गृहाणैली और कसबा नगर में लगातार बारिश के चलते उत्पन्न जलजमाव की यह समस्या सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता परिणाम है। जब तक शहरों और ग्रामीण सीमाओं पर नियोजित तरीके से बुनियादी ढांचे जैसे कि पक्की नालियों और सड़कों का निर्माण नहीं होगा, तब तक हर साल मानसून के समय आम जनता इसी तरह नरकीय जीवन जीने को विवश होती रहेगी। अब देखना यह है कि प्रशासनिक महकमा इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और जनता को राहत पहुँचाता है।