वन क्षेत्र पदाधिकारी की पहल पर रेलवे पर प्राथमिकी दर्ज
भागलपुर: जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर वन विभाग अब और अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। हाल ही में नवगछिया रेलवे स्टेशन परिसर में वर्षों पुराने पाकड़ के पेड़ की डालियां काटे जाने के मामले में वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। इस घटना में कई पक्षियों के घोंसले उजड़ने और एक चूजे की मौत होने के बाद, वन क्षेत्र पदाधिकारी (Range Officer) की सूचना पर वन विभाग ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
क्या है पूरा मामला?
नवगछिया रेलवे स्टेशन के पास एक वर्षों पुराना पाकड़ का पेड़ स्थित है। यह पेड़ न केवल छाया का स्रोत था, बल्कि बड़ी संख्या में पक्षियों का बसेरा भी था। स्थानीय लोगों और वन विभाग की जांच में यह सामने आया कि बिना किसी पूर्व अनुमति के रेलवे परिसर में पेड़ की उन डालियों को काट दिया गया, जिन पर कौवों और बगुले जैसे पक्षियों के घोंसले बने हुए थे।
अंधाधुंध कटाई के कारण घोंसले जमीन पर आ गिरे, जिससे कई अंडे और चूजे क्षतिग्रस्त हो गए। इस दौरान एक चूजे की मौत भी हो गई, जो पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के आक्रोश का कारण बना।
वन विभाग की सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने इसे 'वन अधिनियम' (Forest Act) का खुला उल्लंघन माना। वन क्षेत्र पदाधिकारी राजीव कुमार को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, उन्होंने इसे पर्यावरण के प्रति घोर लापरवाही करार दिया। उनकी दिशा-निर्देशन में वनपाल सोनी कुमारी ने इस मामले में अज्ञात लोगों और रेलवे विभाग के जिम्मेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
विभाग ने 'भारतीय वन अधिनियम 1972' की धारा 50 के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि विकास या रखरखाव के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की किसी को भी अनुमति नहीं है।
रेलवे की सफाई और जांच के आदेश
घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि पेड़ की डालियां काटना उनकी "मजबूरी" थी, क्योंकि वे सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरनाक हो रही थीं। हालांकि, रेलवे ने पक्षियों को पहुंचे नुकसान पर खेद व्यक्त किया है। दूसरी ओर, वन विभाग ने पूरे घटनाक्रम की गहन जांच के आदेश दिए हैं। विशेष जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि डालियां काटने के दौरान पक्षियों की सुरक्षा के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भागलपुर में यह पहली बार नहीं है जब वन विभाग ने पेड़ों की अवैध कटाई पर सख्त रुख अपनाया हो। इससे पहले भी सुल्तानगंज और अकबरनगर जैसे इलाकों में वन भूमि पर अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई के मामलों में वन क्षेत्र पदाधिकारी की ओर से जुर्म प्रतिवेदन (Offense Report) और कानूनी कार्रवाई की गई है।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी भी परियोजना के लिए पेड़ों को काटने की आवश्यकता है, तो पहले वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति हरे-भरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है।
वन विभाग द्वारा रेलवे पर की गई यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह घटना न केवल पेड़ों के महत्व को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के प्रति संवेदनशीलता सभी सरकारी और निजी संस्थानों के लिए उतनी ही जरूरी है। फिलहाल, वन विभाग मामले