किसानों को कम अवधि वाले छिटका धान उपजाने की सलाह, जिले में अब तक लक्ष्य का सीमित रकबा ही हुआ आच्छादित

जिला संवाददाता। जिले में मानसून की अनियमित गतिविधियों और पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण धान की खेती प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों की खेती करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि जिन किसानों की अब तक धान की रोपनी नहीं हो सकी है, वे समय की कमी को देखते हुए कम अवधि वाली छिटका धान (ब्रॉडकास्टिंग विधि) की खेती अपनाएं, ताकि मौसम की अनिश्चितता के बावजूद बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खेतों में नमी बनाए रखने, जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और विभाग द्वारा अनुशंसित बीजों का ही उपयोग करने की अपील की है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष धान की खेती के लिए निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अब तक काफी कम क्षेत्र में ही बुआई और रोपाई का कार्य पूरा हो पाया है। लगातार बारिश में देरी और खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण अधिकांश किसान अभी भी रोपनी शुरू नहीं कर सके हैं। ऐसे में विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों और कृषि समन्वयकों को गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने का निर्देश दिया है।

कम अवधि वाली किस्मों पर जोर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धान की रोपाई में अधिक विलंब होता है तो लंबी अवधि वाली किस्मों से उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को 90 से 120 दिनों में तैयार होने वाली कम अवधि की धान किस्मों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा जहां रोपाई संभव नहीं है, वहां छिटका विधि से धान की बुआई भी एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कम अवधि वाली किस्में कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम होती हैं। यदि समय पर खाद, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण किया जाए तो किसानों को अच्छी उपज प्राप्त हो सकती है।

कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि सभी प्रखंडों में किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की गई है। किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करने, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने और खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है। साथ ही जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां समय पर पानी देकर फसल को बचाने की सलाह दी गई है।

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की ओर से आने वाले पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जैसे ही अच्छी बारिश होगी, रोपाई की गति तेज हो जाएगी। तब तक किसान जल्द तैयार होने वाली किस्मों को प्राथमिकता दें।

लक्ष्य के मुकाबले कम हुआ रकबा आच्छादित

विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में धान की खेती के लिए निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक सीमित क्षेत्र में ही बुआई और रोपाई हो सकी है। कई प्रखंडों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि कुछ इलाकों में वर्षा की कमी के कारण खेती काफी पीछे चल रही है। कृषि विभाग प्रतिदिन प्रखंडवार प्रगति की समीक्षा कर रहा है और अधिकारियों को नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो धान की खेती में तेजी आ सकती है। हालांकि अधिक विलंब होने की स्थिति में किसानों को फसल चयन में बदलाव करना पड़ सकता है।

किसानों को मिल रही तकनीकी सहायता

कृषि विभाग की ओर से किसान सलाह केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्र और प्रखंड कृषि कार्यालयों के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। खेतों की तैयारी, बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा सिंचाई संबंधी सलाह लगातार दी जा रही है।

किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि बीज बोने से पहले उसका उपचार अवश्य करें, ताकि शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा कम हो। साथ ही पौधों की उचित दूरी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

मौसम की भूमिका अहम

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खरीफ सीजन की सफलता काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। इस वर्ष मानसून की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन बाद में बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया। इसका असर धान की नर्सरी, रोपाई और खेतों की तैयारी पर पड़ा है।

हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान सही साबित होता है तो किसानों को राहत मिलेगी और धान की खेती में तेजी आएगी।

वैकल्पिक फसलों पर भी विचार

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि अत्यधिक विलंब के कारण धान की खेती संभव नहीं हो पाती है तो वे मक्का, दलहन, तिलहन या अन्य कम अवधि वाली वैकल्पिक फसलों की खेती पर भी विचार करें। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान कम होगा और भूमि का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।

सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील

कृषि विभाग ने किसानों से सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की भी अपील की है। प्रमाणित बीज, कृषि यंत्र, सिंचाई सुविधाओं और अन्य कृषि योजनाओं के लिए किसान संबंधित प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि किसानों को हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

किसानों से सतर्क रहने की अपील

अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी सलाह का ही पालन करें। समय पर खेती की तैयारी, वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग और मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि विभाग को उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा होती है और किसान विभाग की सलाह के अनुसार कम अवधि वाली धान की किस्मों एवं छिटका विधि को अपनाते हैं, तो जिले में धान उत्पादन के लक्ष्य को काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा। इसके लिए विभाग ने सभी कृषि अधिकारियों को लगातार किसानों के संपर्क में रहने और आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।