श्री स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य ने मोतीपुर गांव में आयोजित एक धार्मिक प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित
मोतीपुर: "मनुष्य के जीवन में संगति का बहुत बड़ा महत्व होता है। यदि संगति अच्छी हो तो साधारण व्यक्ति भी महान बन सकता है, लेकिन यदि संगति गलत हो जाए तो भीष्म पितामह जैसे महापुरुष भी उसके प्रभाव से अछूते नहीं रह सकते।" यह प्रेरणादायक संदेश श्री स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने मोतीपुर गांव में आयोजित एक धार्मिक प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिया।
प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग उपस्थित रहे। स्वामी जी ने धर्म, आचरण, संस्कार, भोजन और जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन उसके कर्मों और संगति से निर्मित होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव अच्छे लोगों का साथ चुनना चाहिए और अपने जीवन को सात्विकता एवं नैतिक मूल्यों के अनुरूप ढालना चाहिए।
संगति का जीवन पर गहरा प्रभाव
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने कहा कि मनुष्य अपने आसपास के वातावरण और जिन लोगों के साथ रहता है, उनसे बहुत कुछ सीखता है। यदि व्यक्ति की संगति सज्जनों, संतों और विद्वानों के साथ होगी तो उसके विचार, व्यवहार और जीवन भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर यदि व्यक्ति गलत संगति में पड़ जाता है तो धीरे-धीरे उसके विचार और आचरण भी प्रभावित होने लगते हैं। इसी कारण शास्त्रों में सदैव सत्संग को जीवन का सबसे बड़ा धन बताया गया है।
भीष्म पितामह का उदाहरण
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि भीष्म पितामह महान योद्धा, धर्मज्ञ और नीति के ज्ञाता थे। फिर भी परिस्थितियों और जिस पक्ष के साथ वे खड़े रहे, उसके कारण उन्हें कई कठिन नैतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस प्रसंग से यह सीख मिलती है कि केवल महान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सत्य, धर्म और उचित मार्ग का साथ देना भी उतना ही आवश्यक है।
स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में ऐसे निर्णय लें जो सत्य, न्याय और धर्म के अनुरूप हों।
पाप और बुरी आदतों का करें त्याग
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने कहा कि मनुष्य को पाप, छल, कपट, क्रोध, लोभ, अहंकार और अन्य बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशा, हिंसा, असत्य और अनैतिक कार्य व्यक्ति के जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं। इन बुरी प्रवृत्तियों का त्याग कर ही मनुष्य आत्मिक शांति और वास्तविक सुख प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे आधुनिक जीवन की नकारात्मक प्रवृत्तियों से बचें और अपने चरित्र को मजबूत बनाएं।
सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण का महत्व
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने सात्विक भोजन और शुद्ध जीवनशैली पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि जैसा भोजन होगा, वैसा ही मन और विचार बनेंगे। शुद्ध, पौष्टिक और सात्विक भोजन मन को शांत, संयमित और सकारात्मक बनाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे स्वच्छता, संयम और संतुलित जीवनशैली को अपनाएं तथा अपने दैनिक जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन करें।
धर्म का वास्तविक अर्थ
स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, ईमानदारी से जीवन जीना, दूसरों की सहायता करना, माता-पिता और गुरु का सम्मान करना तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे तो समाज में अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
युवाओं को दिया विशेष संदेश
प्रवचन में युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है।
उन्होंने युवाओं से नशे, हिंसा, गलत संगति और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुशासन, परिश्रम और संस्कार ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं।
उन्होंने युवाओं को नियमित अध्ययन, योग, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए भी प्रेरित किया।
समाज में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को नैतिक मूल्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यदि परिवारों में बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाएं और समाज में सत्संग की परंपरा मजबूत हो, तो अपराध, हिंसा और सामाजिक बुराइयों में स्वतः कमी आएगी।
उन्होंने लोगों से परिवार में प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग का वातावरण बनाए रखने का आग्रह किया।
श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
प्रवचन समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचन को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
मोतीपुर गांव में आयोजित धार्मिक प्रवचन में श्री स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने जीवन में अच्छी संगति, शुद्ध आचरण, सात्विक भोजन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गलत संगति का प्रभाव किसी भी व्यक्ति पर पड़ सकता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। उनके संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दी तथा समाज में सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया।