दरभंगा नगर निगम में आठ दिवसीय हड़ताल का सफल समापन: बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर सफाई कर्मियों का आंदोलन रहा पूरी तरह कामयाब

दरभंगा: बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर दरभंगा में पिछले कुछ दिनों से लगातार गहरा रहा सफाई संकट और प्रशासनिक অচलता आखिरकार एक सकारात्मक समझौते के साथ समाप्त हो गया है। बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (Bihar Rajya Sthaniya Nikay Karamchari Mahasangh) द्वारा अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को मनवाने के लिए बुलाई गई आठ दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल दरभंगा नगर निगम क्षेत्र में पूरी तरह सफल और असरदार साबित हुई। इस हड़ताल के दौरान निगम के सफाई कर्मियों, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों और दैनिक वेतनभोगियों ने सरकार तथा स्थानीय प्रशासन के अड़ियल रवैये के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। हड़ताल के आठवें दिन शासन-प्रशासन और कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय और सफल वार्ता के बाद आखिरकार सभी पक्षों में सहमति बन गई, जिसके उपरांत आंदोलन की समाप्ति की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इस आंदोलन के समाप्त होने से दरभंगा के आम नागरिकों और नगर निगम प्रशासन ने ने राहत की सांस ली है।

हड़ताल की पृष्ठभूमि और कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ लंबे समय से राज्यभर के नगर निकायों में कार्यरत संविदा कर्मियों, दैनिक वेतनभोगियों और नियमित सफाई कर्मियों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।

अड़ियल रवैये के खिलाफ हुंकार: कर्मचारियों का आरोप था कि सरकार और नगर निगम प्रशासन उनकी बुनियादी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर लगातार उदासीन रुख अपनाए हुए है। बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो महासंघ को बाध्य होकर आठ दिवसीय हड़ताल का कड़ा कदम उठाना पड़ा।

प्रमुख मांगें: कर्मचारियों की मुख्य मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, संविदा कर्मियों का स्थायीकरण, समय पर मानदेय का भुगतान, सामाजिक सुरक्षा लाभ (पीएफ और ईएसआई), और सेवा शर्तों में सुधार शामिल था। इन मांगों के समर्थन में दरभंगा नगर निगम के तमाम सफाई कर्मी पहले दिन से ही काम-काज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए थे।

दरभंगा नगर निगम में हड़ताल का व्यापक असर

आठ दिनों तक चली इस हड़ताल का दरभंगा नगर निगम क्षेत्र के जनजीवन और स्वच्छता व्यवस्था पर गहरा और व्यापक असर देखने को मिला।

शहर में फैला कचरा और बदहाली: सफाई कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण शहर के तमाम मुख्य बाजारों, मोहल्लों, चौराहों और गलियों में कचरे का उठान पूरी तरह ठप हो गया था। जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए थे, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही थी बल्कि महामारी फैलने का खतरा भी मंडराने लगा था।

कर्मचारियों की एकजुटता: दरभंगा नगर निगम परिसर में रोजाना हजारों की संख्या में कर्मचारी इकठ्ठा होकर सरकार विरोधी प्रदर्शन करते थे और जोरदार नारेबाजी करते थे। महिला सफाई कर्मियों ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे संघ की ताकत और एकता स्पष्ट रूप से नजर आई।

सफल वार्ता और समझौते के बाद आंदोलन की समाप्ति

हड़ताल के आठवें दिन जब स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी, तब जिला प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहल करते हुए बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय और स्थानीय नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की।

सकारात्मक माहौल में चर्चा: वार्ता के दौरान कर्मचारियों की सभी 14 सूत्री और अन्य प्रमुख मांगों पर बिंदुवार और गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। शासन की ओर से मांगों के समाधान के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने का आश्वासन दिया गया।

हड़ताल वापस लेने की घोषणा: सरकार और प्रशासन द्वारा मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाने और लिखित आश्वासन मिलने के बाद महासंघ के नेतृत्व ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन अपने वादों से मुकरा, तो वे पुनः उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

शहरवासियों को मिली राहत और सामान्य हुई व्यवस्था

हड़ताल समाप्त होने की खबर मिलते ही दरभंगा नगर निगम प्रशासन और शहरवासियों ने चैन की सांस ली।

युद्ध स्तर पर सफाई अभियान: आंदोलन खत्म होने के तुरंत बाद नगर निगम द्वारा शहर में युद्ध स्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया, ताकि आठ दिनों से जमे कचरे के ढेरों को हटाकर शहर को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सके।

 बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में दरभंगा नगर निगम में चली यह आठ दिवसीय हड़ताल कर्मचारियों की एकजुटता और उनके संघर्ष की बड़ी जीत साबित हुई है। यह आंदोलन इस बात का प्रमाण है कि जब तक श्रमिक अपने अधिकारों के प्रति संगठित होकर आवाज नहीं उठाते, तब तक व्यवस्था उनकी सुध नहीं लेती। सफल वार्ता के बाद अब शहर का जनजीवन एक बार फिर पटरी पर लौट आया है।