सीढ़ी घाट और मंदिर घाट पर फिसलन बढ़ने से नेपाल के श्रद्धालु समेत कई घायल, प्रशासन की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

भागलपुर/सुल्तानगंज: सुल्तानगंज के प्रसिद्ध उत्तर वाहिनी गंगा तट पर इन दिनों देवघर जाने वाले कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने श्रद्धालुओं की राह को बेहद कठिन और खतरनाक बना दिया है। अजगैवीनाथ धाम के मुख्य सीढ़ी घाट और मंदिर घाट पर बारिश के कारण भारी फिसलन बढ़ गई है, जिससे जल भरकर बाबा बैद्यनाथ की ओर प्रस्थान करने वाले कांवरियों का चलना मुहाल हो गया है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि घाटों पर लगातार हादसे हो रहे हैं, और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न किए जाने के कारण श्रद्धालुओं में भारी रोष देखने को मिल रहा है।

घाटों पर पसरा कीचड़ और काई, बना मौत का कुआं

सावन या सामान्य दिनों में भी सुल्तानगंज के सीढ़ी घाट और मंदिर घाट पर कांवरियों की भारी आवाजाही रहती है। गंगा स्नान और जल उठाने के दौरान पानी और मिट्टी के मिलने से सीढ़ियों पर अत्यधिक काई और चिकनी मिट्टी जमा हो जाती है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने इस स्थिति को और अधिक गंभीर कर दिया है। घाट की सीढ़ियों पर रेलिंग या पर्याप्त एंटी-स्किड मैटिंग (फिसलन रोकने वाले मैट) की व्यवस्था न होने के कारण हर कदम पर फिसलने का खतरा बना हुआ है। भारी-भरकम कांवर और कंधे पर गंगाजल का भार उठाए जब श्रद्धालु इन गीली सीढ़ियों पर पैर रखते हैं, तो उनका संतुलन बिगड़ जाता है और वे धड़ाम से नीचे गिर जाते हैं।

गंभीर रूप से घायल हुईं 62 वर्षीय धर्म शिला देवी, यात्रा अधूरी छोड़ लौटना पड़ा घर

बारिश और फिसलन भरी इस व्यवस्था का शिकार बनीं 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला धर्म शिला देवी। अपनी उम्र और स्वास्थ्य की परवाह किए बिना वे बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की अगाध आस्था लेकर सुल्तानगंज पहुंची थीं। सीढ़ी घाट पर गंगा स्नान करने के बाद जब वे जल भरने के लिए सीढ़ियां चढ़ रही थीं, तभी उनका पैर अचानक फिसल गया।

फिसलन इतनी ज्यादा थी कि वे खुद को संभाल नहीं पाईं और सीधे सीढ़ियों पर जोरदार तरीके से जा गिरीं। इस दुर्घटनावश हुए हादसे में उनके शरीर और पैरों में गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद अन्य कांवरियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत उठाया और प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर चोट के चलते पूरी तरह आराम करने और यात्रा तुरंत रद्द करने की सलाह दी। नम आंखों और टूटे हुए हौसले के साथ धर्म शिला देवी को अपनी मनोकामना पूरी किए बिना ही बीच रास्ते से अपने घर वापस लौटना पड़ा। उनकी यह स्थिति वहां मौजूद हर एक व्यक्ति को झकझोर कर रख गई।

नेपाल से आए नंदलाल सरदार भी हुए हादसे का शिकार

सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं। नेपाल से अपनी लंबी और आस्था से भरी यात्रा तय कर पहुंचे नंदलाल सरदार भी इस खतरनाक फिसलन की चपेट में आ गए।

नंदलाल सरदार जब मंदिर घाट के पास गंगा जल भरने के लिए आगे बढ़ रहे थे, तो अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे फिसलन के कारण सीढ़ियों पर गिर पड़े। गनीमत यह रही कि उन्हें जानलेवा या अत्यधिक गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उनके हाथ और घुटने बुरी तरह छिल गए। इस घटना के बाद वे बुरी तरह सहम गए। नेपाल से आए नंदलाल ने बताया कि वे बाबा की आराधना के लिए हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे थे, लेकिन यहां की प्रशासनिक व्यवस्था और घाटों की बदहाली ने उनकी यात्रा को शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा बना दिया है।

स्थानीय लोगों और कांवरियों में प्रशासन के प्रति आक्रोश

घटनाओं के बाद सीढ़ी घाट और मंदिर घाट पर मौजूद अन्य कांवरियों और स्थानीय पंडा समाज के लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद को पहले से ही पता होता है कि बारिश के दिनों में गंगा घाटों पर फिसलन बढ़ जाती है, इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

एंटी-स्किड मैट की कमी: घाटों की सीढ़ियों पर रबर मैट या बोरियां नहीं बिछाई गई हैं, जिससे पैर टिक सकें।

सफाई की अनदेखी: नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर या चूने का छिड़काव न होने से काई की परत और अधिक चिकनी हो गई है।

सुरक्षा कर्मियों की सुस्ती: घाट पर फिसलन रोकने के लिए कांवरियों को निर्देश देने या बुजुर्गों की मदद करने के लिए पर्याप्त स्वयंसेवक या पुलिसकर्मी तैनात नजर नहीं आते।

प्रशासन की नींद कब खुलेगी?

धर्म शिला देवी जैसी बुजुर्ग माताएं और नेपाल से आए नंदलाल सरदार जैसे विदेशी श्रद्धालु जब आस्था की डुबकी लगाने के बाद प्रशासनिक लापरवाही के कारण चोटिल होकर लौटते हैं, तो यह व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। समाचार लिखे जाने तक स्थानीय प्रशासन की ओर से घाटों पर फिसलन रोकने के लिए युद्धस्तर पर कोई विशेष उपाय शुरू नहीं किए गए थे।

यदि समय रहते प्रशासन ने सीढ़ी घाट और मंदिर घाट पर बालू की बोरियां, रबर मैटिंग और निरंतर साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह फिसलन किसी और बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। कांवरियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि तुरंत प्रभाव से सभी मुख्य घाटों पर सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि कोई अन्य शिवभक्त इस तरह की दुर्घटना का शिकार न हो।