डीएमसीएच ने चिकित्सा के क्षेत्र में रचा इतिहास, अत्याधुनिक यूरेटरोस्कोपी (URS) मशीन से सफल ऑपरेशन
उत्तर बिहार के सबसे प्रमुख चिकित्सा केंद्र 'दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' (DMCH) ने स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। यूरोलॉजी (मूत्र रोग) विभाग में अत्याधुनिक 'यूरेटरोस्कोपी' (Ureteroscopy - URS) मशीन का शुभारंभ किया गया है। इस नई तकनीक के आने से अब गुर्दे और मूत्र नली की जटिल बीमारियों का इलाज बिना किसी बड़े चीरे के संभव हो गया है। हाल ही में वरिष्ठ सर्जन डॉ. विजेंद्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पहली सफल यूआरएस प्रक्रिया को अंजाम देकर संस्थान ने अपनी नई क्षमताओं का परिचय दिया है।
अत्याधुनिक यूरेटरोस्कोपी तकनीक क्या है?
यूरेटरोस्कोपी एक न्यूनतम इनवेसिव (Minimal Invasive) प्रक्रिया है, जिसमें एक पतले, दूरबीन जैसे उपकरण (यूरेटरोस्कोप) का उपयोग किया जाता है। इस मशीन के जरिए सर्जन मूत्र मार्ग के माध्यम से गुर्दे या मूत्र नली (Ureter) तक पहुँचते हैं और वहां मौजूद पथरी या अन्य अवरोधों को लेजर या अन्य आधुनिक माध्यमों से तोड़कर बाहर निकालते हैं।
पहली सफल सर्जरी: एक नया अध्याय
DMCH के यूरोलॉजी विभाग के लिए यह दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर रहा।
सर्जिकल टीम: इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का नेतृत्व प्रख्यात वरिष्ठ सर्जन डॉ. विजेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। उनकी टीम में अनुभवी एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और ओटी स्टाफ शामिल थे, जिन्होंने पूर्ण समन्वय के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
प्रक्रिया: जिस मरीज की सर्जरी की गई, वह गुर्दे की नली में फंसी गंभीर पथरी से परेशान था। इस नई तकनीक का उपयोग करते हुए, बिना किसी बाहरी घाव के सफलतापूर्वक पथरी को हटा दिया गया।
परिणाम: ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से हुई और उसे बहुत कम समय में अस्पताल से छुट्टी मिलने की स्थिति हो गई।
तकनीक के प्रमुख लाभ
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| न्यूनतम चीरा | शरीर पर कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं करना पड़ता, केवल प्राकृतिक रास्तों का उपयोग। |
| त्वरित रिकवरी | मरीज को सर्जरी के अगले ही दिन या कुछ घंटों के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है। |
| कम दर्द | पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें दर्द और रिकवरी का समय न्यूनतम होता है। |
| उच्च सफलता दर | आधुनिक कैमरों और लेजर तकनीक के उपयोग से जटिल पथरी को पूरी तरह साफ करना आसान। |
डीएमसीएच के लिए इसका महत्व
दरभंगा एम्स के समानांतर, डीएमसीएच में इस प्रकार की अत्याधुनिक मशीनों का आना यह दर्शाता है कि संस्थान अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है।
मरीजों पर भार में कमी: अब तक गंभीर पथरी के इलाज के लिए लोगों को पटना या दिल्ली जैसे बड़े महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था। अब यही सुविधा दरभंगा में उपलब्ध होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का समय और पैसा दोनों बचेगा।
क्षेत्रीय हब: डीएमसीएच का यूरोलॉजी विभाग अब मिथिलांचल ही नहीं, बल्कि नेपाल से आने वाले मरीजों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
शिक्षण और प्रशिक्षण: इस मशीन के आने से मेडिकल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा, जो भविष्य में कुशल सर्जन बनाने में सहायक होगा।
डॉ. विजेंद्र कुमार मिश्रा का दृष्टिकोण
इस उपलब्धि पर बात करते हुए डॉ. विजेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा:
"यह हमारे विभाग के लिए गर्व का क्षण है। अत्याधुनिक यूरेटरोस्कोपी तकनीक न केवल इलाज की सटीकता को बढ़ाती है, बल्कि मरीजों के लिए जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को सुरक्षित और सुलभ बनाती है। हमारा लक्ष्य डीएमसीएच को यूरोलॉजी के क्षेत्र में उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ केंद्र बनाना है।"
डीएमसीएच प्रशासन आने वाले समय में यूरोलॉजी विभाग में और भी उन्नत उपकरण, जैसे कि लिथोट्रिप्सी (Lithotripsy) और लेजर यूनिट्स को और अधिक विस्तार देने की योजना बना रहा है।
इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि यदि सही संसाधनों और कुशल नेतृत्व का मेल हो, तो सरकारी अस्पताल भी निजी अस्पतालों के समकक्ष अत्याधुनिक सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। दरभंगा की जनता के लिए यह किसी बड़े उपहार से कम नहीं है। अब, पथरी जैसी बीमारियों के लिए मरीजों को न तो लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता है और न ही महंगे निजी अस्पतालों की ओर भागने की।