टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई ताकत, जिला यक्ष्मा विभाग को मिले तीन नए टेक्निशियन
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला यक्ष्मा विभाग को तीन नए लैब टेक्निशियन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे क्षय रोग (टीबी) की जांच, पहचान और उपचार संबंधी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अतिरिक्त तकनीकी मानव संसाधन मिलने से मरीजों की जांच प्रक्रिया तेज होगी, रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होगी और टीबी उन्मूलन अभियान को नई मजबूती मिलेगी।
जिला यक्ष्मा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित 100 दिवसीय "टीबी मुक्त भारत अभियान" के तहत जिले में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ऐसे समय में तीन नए टेक्निशियनों की नियुक्ति विभाग के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगी रफ्तार
भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी उद्देश्य से विभिन्न राज्यों और जिलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पूर्णिया जिले में भी स्वास्थ्य विभाग लगातार गांव-गांव जाकर संभावित मरीजों की पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। ऐसे में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब तीन नए टेक्निशियन मिलने से जांच कार्य पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
जांच क्षमता में होगा इजाफा
जिला यक्ष्मा विभाग के अनुसार नए टेक्निशियनों की नियुक्ति के बाद टीबी जांच की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पहले सीमित कर्मचारियों के कारण कई बार जांच रिपोर्ट आने में विलंब हो जाता था, लेकिन अब सैंपल की जांच तेजी से हो सकेगी।
अधिकारी बताते हैं कि टीबी जैसी संक्रामक बीमारी में समय पर जांच और शीघ्र उपचार अत्यंत आवश्यक है। जितनी जल्दी मरीज की पहचान होगी, उतनी ही जल्दी उसका इलाज शुरू किया जा सकेगा और संक्रमण फैलने की संभावना भी कम होगी।
100 दिवसीय विशेष अभियान जारी
जिले में चल रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान कर रही हैं। लगातार खांसी, वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना आना और कमजोरी जैसे लक्षण वाले लोगों की जांच कराई जा रही है।
आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्वास्थ्य कर्मी और यक्ष्मा विभाग की टीमें मिलकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। अभियान के दौरान जरूरतमंद लोगों के बलगम के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
आधुनिक जांच सुविधाओं का लाभ
जिला यक्ष्मा विभाग का कहना है कि वर्तमान में जिले में आधुनिक तकनीक के माध्यम से टीबी की जांच की जा रही है। सीबी-नैट (CBNAAT) और अन्य आधुनिक जांच पद्धतियों के जरिए कम समय में सटीक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है।
नए टेक्निशियन इन आधुनिक मशीनों के संचालन और जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएंगे, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
मरीजों को मिलेगा समय पर इलाज
टीबी की पुष्टि होने के बाद मरीजों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क दवाएं और नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। विभाग का कहना है कि उपचार के दौरान मरीजों की लगातार निगरानी की जाती है ताकि वे निर्धारित अवधि तक दवाओं का नियमित सेवन करें।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसलिए लोगों को बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
जागरूकता पर भी विशेष जोर
स्वास्थ्य विभाग केवल जांच और उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। गांवों, पंचायतों, स्कूलों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी के प्रति सामाजिक भेदभाव और गलत धारणाओं को समाप्त करना भी अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है, ताकि मरीज बिना किसी झिझक के इलाज करा सकें।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने जताई उम्मीद
जिला यक्ष्मा विभाग के अधिकारियों ने विश्वास जताया कि अतिरिक्त टेक्निशियन मिलने से अभियान को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या अन्य टीबी संबंधी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
सामुदायिक भागीदारी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। यदि लोग समय पर जांच कराएं, उपचार पूरा करें और दूसरों को भी जागरूक करें, तो टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है।
जिले के लिए सकारात्मक पहल
तीन नए टेक्निशियनों की उपलब्धता को जिले के स्वास्थ्य तंत्र के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल जांच व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि टीबी मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं भी मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अतिरिक्त मानव संसाधन, आधुनिक जांच सुविधाएं, जनजागरूकता अभियान और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से पूर्णिया जिला टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करेगा। जिला यक्ष्मा विभाग अब नए उत्साह और बेहतर संसाधनों के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे आने वाले समय में जिले में टीबी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।