छपरा में प्रखंड विकास पदाधिकारी पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में काली पट्टी बांधकर किया कार्य का निष्पादन, राज्य सरकार से की अधिकारियों की सुरक्षा की पुरजोर मांग
बिहार के प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य के छपरा जिले में एक प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पर हुए गंभीर हमले और उन्हें लहूलुहान किए जाने की घटना के बाद अब इसका विरोध पूरे बिहार में सुलग उठा है। इसी कड़ी में पूर्णिया जिले के जलालगढ़ प्रखंड में भी प्रशासनिक महकमे का आक्रोश खुलकर सामने आया है। जलालगढ़ के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने छपरा की घटना के विरोधस्वरूप अपनी बांह पर काली पट्टी (Black Armband) बांधकर अपने कार्यालय में कार्य का निर्वहन किया। इस शांतिपूर्ण लेकिन कड़े विरोध प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन को यह संदेश दिया है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और सरकार को तत्काल उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
क्या है पूरी घटना और क्यों भड़का प्रशासनिक महकमा?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, कुछ दिन पहले छपरा जिले में एक प्रखंड विकास पदाधिकारी पर कुछ असामाजिक तत्वों या दबंगों द्वारा अचानक हमला बोल दिया गया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने पूरे बिहार के प्रशासनिक और सिविल सेवा अधिकारियों को झकझोर कर रख दिया है। प्रखंड स्तर पर जनता के बीच रहकर सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले इन अधिकारियों पर इस प्रकार के जानलेवा हमले इस बात का प्रमाण हैं कि अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ किस हद तक कम हो चुका है।
जब इस निर्मल और कायराना हमले की खबर पूर्णिया के जलालगढ़ पहुँची, तो वहाँ के बीडीओ और अन्य प्रशासनिक कर्मियों में भारी रोष व्याप्त हो गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि ड्यूट पर तैनात एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो वे बिना किसी डर के निष्पक्ष होकर जनहित के कार्य कैसे कर पाएंगे।
जलालगढ़ बीडीओ का अनूठा और शांतिपूर्ण विरोध: बांधी काली पट्टी
छपरा के घायल बीडीओ के प्रति एकजुटता (Solidarity) दिखाने और अपनी सुरक्षा की मांग को बुलंद करने के लिए जलालगढ़ के बीडीओ ने विरोध का एक अनूठा और अनुशासित रास्ता चुना। उन्होंने कार्यालय पहुंचकर अपनी बांह पर काली पट्टी बांधी और उसी हालत में जनता की समस्याओं को सुना तथा फाइलों का निष्पादन किया।
प्रशासनिक कामकाज जारी रखते हुए विरोध: बीडीओ ने यह सुनिश्चित किया कि इस विरोध प्रदर्शन के कारण आम जनता या दूर-दराज से आने वाले फरियादियो को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने अपने कार्यालय के सभी कार्य पूरी मुस्तैदी और जिम्मेदारी के साथ पूरे किए, लेकिन उनकी बांधी गई काली पट्टी ने पूरे कार्यालय और क्षेत्र में साफ संदेश दे दिया कि प्रशासनिक तंत्र इस घटना से बेहद आहत और चिंतित है।
राज्य सरकार से सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग
कार्य के दौरान मीडिया और स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए जलालगढ़ के प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य स्थानीय अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में राज्य सरकार से कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं:
कठोर कार्रवाई की मांग: छपरा में बीडीओ पर हमला करने वाले सभी नामजद और अज्ञात उपद्रवियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें ऐसी सख्त सजा दी जाए जो अन्य अपराधियों के लिए एक मिसाल बने।
कार्यालय और क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंध: प्रखंड कार्यालयों, अंचलों और मैदानी दौरों (Field Visits) के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए, खासकर संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जाए।
सरकारी कर्मियों का मनोबल: अधिकारियों का कहना है कि यदि उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहेंगी और उन पर हमले होते रहेंगे, तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाएगी। इसलिए सरकार को कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करना होगा ताकि अधिकारी बिना किसी भय के कार्य कर सकें।
स्थानीय स्तर पर और प्रबुद्ध जनों के बीच चर्चा का विषय
जलालगढ़ बीडीओ द्वारा काली पट्टी बांधकर कार्य करने की यह खबर पूरे पूर्णिया जिले में आग की तरह फैल गई। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा है कि लोकतंत्र के स्तंभों में से एक प्रशासनिक व्यवस्था पर इस तरह के हमले किसी भी कीमत पर सहन नहीं किए जाने चाहिए।
यदि समय रहते सरकार और पुलिस प्रशासन ने मैदानी अधिकारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो आने वाले दिनों में यह विरोध और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल, जलालगढ़ में काली पट्टी बांधकर किया गया यह सांकेतिक विरोध पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी।