टीएमबीयू से लोकभवन को भेजी गई डिग्री के लंबित मामलों की विस्तृत रिपोर्ट; छात्रों की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने की कवायद तेज
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के उच्च शैक्षणिक परिदृश्य से एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन ने वर्षों से लंबित पड़ी डिग्रियों और उससे जुड़े मामलों का पूरा ब्योरा तैयार कर राज्य के उच्च प्राधिकार यानी लोकभवन को आधिकारिक रूप से प्रेषित कर दिया है। विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रहित से जुड़े मामलों को लेकर बरती जा रही सुस्ती के बीच लोकभवन द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद टीएमबीयू प्रशासन हरकत में आया है। लंबित डिग्रियों, उनके बैकलॉग और समय पर प्रमाण पत्र न मिलने के कारण छात्रों को हो रही परेशानियों से जुड़ी तमाम जानकारियों की रिपोर्ट लोकभवन को भेजे जाने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि इन मामलों का जल्द से जल्द और पारदर्शी तरीके से निष्पादन किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी लोकभवन को रिपोर्ट भेजने की जरूरत?
भागलपुर विश्वविद्यालय में पिछले कई सत्रों से हजारों विद्यार्थियों की मूल डिग्रियां, अंक पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से लंबित पड़े हुए हैं।
छात्रों का वर्षों से चक्कर लगाना: छात्र अपनी डिग्रियां प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग और चक्कर काटने को विवश थे, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों और पुराने रिकॉर्ड (टैबुलेशन रजिस्टर) के व्यवस्थित न होने के कारण मामलों का निस्तारण अटका हुआ था।
लोकभवन की सख्ती: राज्य स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे लोकभवन ने विश्वविद्यालयों में लंबित मामलों, विशेषकर छात्रों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और डिग्रियों के वितरण में हो रही देरी को बेहद गंभीरता से लिया था। लोकभवन के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही टीएमबीयू प्रशासन ने लंबित डिग्रिमामलों का पूरा खाका तैयार किया और उसे समीक्षा के लिए भेजा।
विवि प्रशासन ने तैयार किया डेटा, डिजिटल पोर्टल से मिल रही मदद
विश्वविद्यालय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकभवन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के मद्देनजर टीएमबीयू के परीक्षा विभाग ने उन सभी पेंडिंग मामलों की सूची को अंतिम रूप दिया जो लंबे समय से धूल फांक रहे थे।
विभिन्न सत्रों के लंबित मामले: रिपोर्ट में उन तमाम सत्रों का विवरण शामिल किया गया है, जिनके विद्यार्थियों ने परीक्षा पास कर ली है लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें अब तक उनकी मूल डिग्रियां या प्रोविजनल सर्टिफिकेट नहीं मिल पाए हैं।
डिजिटल पहलों का असर: हाल ही में विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा प्रणाली को डिजिटल करने और ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की जो पहल की गई है, उससे भी पेंडिंग डेटा को ट्रैक करने में आसानी हुई है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट हो गया है कि किस वर्ष और किस पाठ्यक्रम के कितने छात्रों के मामले लंबित हैं।
छात्रों को राहत मिलने की जगी उम्मीद
विश्वविद्यालय द्वारा लंबित डिग्रियों के मामलों की रिपोर्ट लोकभवन को भेजे जाने के बाद छात्र संगठनों और विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली है। छात्रों का कहना है कि यदि उच्च स्तर पर इन मामलों की मॉनिटरिंग होगी, तो विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर दबाव बनेगा और कागजी प्रक्रिया में तेजी आएगी।
उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद देश-विदेश में नौकरियों या उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अपनी डिग्री के अभाव में जो मानसिक और पेशेवर संकट झेलना पड़ता था, उस पर अब विराम लगने की उम्मीद बंध गई है।
जानकारों का मानना है कि लोकभवन के हस्तक्षेप के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह नैतिक और प्रशासनिक दबाव रहेगा कि वह एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित डिग्रियां तैयार कर संबंधित विद्यार्थियों तक पहुंचाए।
टीएमबीयू से डिग्री के लंबित मामलों की रिपोर्ट का लोकभवन भेजा जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब विश्वविद्यालय के कामकाज में पारदर्शिता लाने और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के लिए प्रशासनिक शिकंजा कस चुका है। यदि यह प्रक्रिया इसी गति से आगे बढ़ी, तो भागलपुर विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों का वर्षों पुराना इंतजार जल्द ही समाप्त होगा और उन्हें उनकी डिग्रियां आसानी से मिल सकेंगी।