मानसून के बावजूद बिहार में बारिश का संकट, आधी से अधिक नदियों का जलस्तर घटा; आज पांच जिलों में बारिश की संभावना
पटना। बिहार में मानसून के दस्तक देने के बाद भी अपेक्षित बारिश नहीं होने से राज्य के अधिकांश हिस्सों में चिंता का माहौल है। जुलाई का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका असर अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की आधे से अधिक नदियों के जलस्तर में भी लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। कई छोटी और मध्यम आकार की नदियां पर्याप्त जल प्रवाह के अभाव में सिकुड़ती जा रही हैं, जिससे सिंचाई, पेयजल और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत की उम्मीद जताते हुए मंगलवार को बिहार के पांच जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना व्यक्त की है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राज्य में व्यापक और लगातार बारिश होने तक सूखे जैसी स्थिति से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल है।
सामान्य से काफी कम हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार मानसून की शुरुआत तो समय पर हुई, लेकिन इसके बाद बारिश की रफ्तार लगातार कमजोर पड़ गई। कई जिलों में सामान्य से 30 से 50 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। राजधानी पटना सहित गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, जहानाबाद, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर और रोहतास जैसे जिलों में बारिश की कमी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने और बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र नहीं बनने के कारण बिहार में पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पा रही है। यही वजह है कि बादल तो बन रहे हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर बारिश नहीं हो रही है।
आधी से ज्यादा नदियों में घटा जलस्तर
कम बारिश का सबसे अधिक असर बिहार की नदियों पर दिखाई दे रहा है। राज्य की आधे से अधिक नदियों का जलस्तर सामान्य से नीचे पहुंच गया है। कई छोटी नदियों में पानी का प्रवाह काफी कम हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर नदी का तल भी दिखाई देने लगा है।
गंडक, पुनपुन, फल्गु, सकरी, किऊल, बदुआ, चानन और अन्य सहायक नदियों में जलस्तर लगातार गिर रहा है। हालांकि कोसी, गंगा और बागमती जैसी बड़ी नदियों में अभी स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो इन नदियों पर भी असर पड़ सकता है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन बारिश की कमी यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
किसानों की बढ़ी चिंता
राज्य के किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि धान की रोपाई का कार्य इसी अवधि में बड़े पैमाने पर होता है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की कमी बनी हुई है, जिससे रोपाई प्रभावित हो रही है।
कई जिलों के किसान निजी बोरिंग और डीजल पंप के सहारे सिंचाई कर रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और छोटे किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
भूजल स्तर पर भी असर
बारिश की कमी का प्रभाव भूजल स्तर पर भी पड़ने लगा है। लगातार कम वर्षा होने से जमीन में पानी का पुनर्भरण (रीचार्ज) नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई चापाकलों और कुओं का जलस्तर घटने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून के शेष महीनों में भी सामान्य से कम बारिश होती है तो आने वाले समय में पेयजल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
मौसम विभाग ने पांच जिलों के लिए जारी किया पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए बिहार के पांच जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है।
हालांकि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है और तापमान में भी विशेष गिरावट की उम्मीद नहीं है।
उमस और गर्मी से लोग परेशान
बारिश नहीं होने के कारण बिहार के अधिकांश शहरों में उमस और गर्मी लगातार बढ़ रही है। दिन के समय तेज धूप और शाम को नमी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजधानी पटना सहित कई शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। उमस के कारण बिजली की मांग भी बढ़ गई है और कई स्थानों पर बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है।
कृषि विभाग की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी है। जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां धान की रोपाई जारी रखने और खेतों में नमी बनाए रखने के लिए आवश्यक सिंचाई करने को कहा गया है।
इसके साथ ही किसानों को कम पानी वाली फसलों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की भी सलाह दी जा रही है ताकि बारिश की कमी का असर कम किया जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम के पैटर्न और जलवायु परिवर्तन का असर मानसून पर भी दिखाई दे रहा है। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी लंबे समय तक सूखा जैसी स्थिति अब सामान्य होती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा जल संरक्षण, तालाबों का पुनर्जीवन, जलाशयों की सफाई और भूजल संरक्षण जैसे उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
सरकार की नजर स्थिति पर
राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार मौसम की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो किसानों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
आगे क्या है संभावना?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में यदि आने वाले दिनों में कोई नया निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होता है तो बिहार में मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना बनेगी, जिससे नदियों का जलस्तर सुधरेगा और किसानों को राहत मिलेगी।
फिलहाल बिहार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त वर्षा का अभाव है। मानसून के बावजूद बारिश नहीं होने से कृषि, जल संसाधन और आम जनजीवन पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। अब लोगों की निगाहें मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान और मानसून की सक्रियता पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही व्यापक बारिश नहीं हुई तो राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति और गंभीर हो सकती है।