उप नगर आयुक्त ने की नगर निगम की विभिन्न विकास परियोजनाओं और लंबित आवेदनों की उच्चस्तरीय समीक्षा; जनता से जुड़ी फाइलों के त्वरित निष्पादन के दिए कड़े निर्देश

भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर में शहरी विकास योजनाओं को गति देने और आम नागरिकों को मिलने वाली नागरिक सुविधाओं में पारदर्शिता व तेजी लाने के उद्देश्य से नगर निगम प्रशासन ने अपनी कार्यशैली को और अधिक चुस्त-दुरस्त करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को भागलपुर नगर निगम कार्यालय में उप नगर आयुक्त (Deputy Municipal Commissioner) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य एजेंडा शहर में चल रही विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना और लंबे समय से लंबित पड़े आवेदनों (Pending Applications) का त्वरित निष्पादन करना रहा। बैठक के दौरान विभिन्न शाखाओं से जुड़े कार्यों की फाइलें खंगाली गईं और लापरवाह कर्मियों को सख्त चेतावनी भी दी गई।

लंबित आवेदनों की समीक्षा और जनता की समस्याओं पर विशेष जोर

बैठक की शुरुआत करते हुए उप नगर आयुक्त ने नगर निगम के विभिन्न विभागों—जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा, होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस, भवन निर्माण अनुमति और स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतों—के अद्यतन आंकड़ों की समीक्षा की।

समयसीमा के भीतर फाइलों का निष्पादन: समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई आवेदन तकनीकी कारणों या फाइलों के लंबे समय तक एक ही टेबल पर अटके रहने के कारण लंबित हैं। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उप नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। हर आवेदन के लिए एक निश्चित समयसीमा (Timeline) तय की गई है, जिसके भीतर उसका निपटारा करना अनिवार्य होगा।

ऑनलाइन व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के निर्देश: शहरवासियों को निगम के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आने वाले आवेदनों की मॉनिटरिंग रोजाना करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को हिदायत दी गई कि यदि किसी आवेदन को अस्वीकार किया जाता है, तो उसका ठोस और स्पष्ट कारण ऑनलाइन दर्ज किया जाना चाहिए।

शहरी विकास परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तलब

लंबित मामलों के निस्तारण के साथ-साथ बैठक में भागलपुर शहर के भीतर चल रहे विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की भी गहन समीक्षा की गई:

सड़क और नाला निर्माण कार्य: अमृत योजना और अन्य शहरी विकास योजनाओं के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में चल रहे पक्की सड़कों, नालियों और जल निकासी प्रोजेक्ट्स की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। संवेदकों (Contractors) को सख्त निर्देश दिए गए कि जिन क्षेत्रों में कार्य अधूरे पड़े हैं, उन्हें बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए शीघ्र पूरा किया जाए।

सफाई और जलापूर्ति व्यवस्था: शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठान और जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर मिल रही शिकायतों पर भी चर्चा हुई। उप नगर आयुक्त ने संबंधित प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे मैदानी स्तर पर औचक निरीक्षण करें और लापरवाह एजेंसियों पर जुर्माना लगाएं, ताकि शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में कोई कोताही न बरती जाए।

कर्मचारियों और अधिकारियों को सख्त चेतावनी

समीक्षा बैठक के अंत में उप नगर आयुक्त ने सभी शाखा प्रभारियों और कर्मियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नगर निगम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधा प्रदान करना है।

जवाबदेही तय करने का निर्देश: उन्होंने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में किसी भी नागरिक का कार्य बिना किसी वैध कारण के लंबे समय तक लंबित पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जनता के कार्यों में हील-हुज्जत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फोटो सत्र और दस्तावेजीकरण: बैठक की कार्यवाही के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने और प्रशासनिक रिकॉर्ड के लिए पूरी बैठक का आधिकारिक दस्तावेजीकरण एवं फोटो सत्र भी आयोजित किया गया, ताकि लिए गए निर्णयों का अनुपालन समय पर सुनिश्चित हो सके।

भागलपुर नगर निगम के उप नगर आयुक्त द्वारा ली गई यह समीक्षा बैठक प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और जनता के प्रति जवाबदेही तय करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन और विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए दिए गए इन कड़े निर्देशों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में शहरवासियों को नगर निगम से मिलने वाली सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इस प्रकार की नियमित समीक्षाएं शहरी विकास को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।