SKMCH परिसर के ATM में 53 हजार की साइबर ठगी, तकनीकी खराबी का फायदा उठाकर शातिरों ने उड़ाई रकम

मुजफ्फरपुर। जिले में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। अब ठगों ने लोगों की मजबूरी और तकनीकी समस्याओं का फायदा उठाकर ठगी करने का नया तरीका अपना लिया है। ताजा मामला श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) परिसर स्थित एक एटीएम से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति से 53 हजार रुपये की साइबर ठगी कर ली गई। पीड़ित ने एटीएम में तकनीकी खराबी आने के बाद सहायता के लिए एक मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, लेकिन वह नंबर साइबर ठगों का निकला। खुद को बैंक का कस्टमर केयर अधिकारी बताकर ठगों ने बातों में उलझाया और कुछ ही मिनटों में खाते से 53 हजार रुपये निकाल लिए।

घटना के बाद पीड़ित ने स्थानीय थाने और साइबर पुलिस से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और लोगों से एटीएम के बाहर लिखे अनजान नंबरों पर कॉल नहीं करने की अपील की है।

एटीएम में तकनीकी खराबी के बाद हुई घटना

जानकारी के अनुसार, पीड़ित शत्रुध्न शर्मा किसी कार्य से एसकेएमसीएच परिसर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें नकदी की आवश्यकता हुई तो उन्होंने परिसर स्थित एटीएम से रुपये निकालने का प्रयास किया। एटीएम मशीन में बार-बार तकनीकी समस्या आने के कारण उनका ट्रांजेक्शन पूरा नहीं हो सका।

मशीन के बाहर उन्हें एक मोबाइल नंबर दिखाई दिया, जिसे उन्होंने बैंक का हेल्पलाइन नंबर समझकर कॉल कर दिया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का कस्टमर केयर अधिकारी बताते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का तुरंत समाधान कर दिया जाएगा।

मदद के नाम पर मांगी गोपनीय जानकारी

फोन पर बात करने वाले शातिर ने पहले पीड़ित से एटीएम कार्ड और बैंक खाते से संबंधित सामान्य जानकारी पूछी। इसके बाद उसने विभिन्न बहाने बनाकर मोबाइल पर आए ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारी साझा करने के लिए कहा।

पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि यह प्रक्रिया केवल एटीएम को दोबारा चालू करने और फंसे हुए ट्रांजेक्शन को पूरा करने के लिए है। जैसे ही पीड़ित ने मांगी गई जानकारी साझा की, कुछ ही मिनटों में उनके मोबाइल पर खाते से अलग-अलग किस्तों में कुल 53 हजार रुपये निकाले जाने के मैसेज आने लगे।

खाते से पैसे कटने के बाद उड़े होश

मोबाइल पर लगातार डेबिट मैसेज आने के बाद शत्रुध्न शर्मा को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क कर अपना कार्ड ब्लॉक कराया। इसके बाद स्थानीय थाना और साइबर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने मदद की उम्मीद में फोन किया था, लेकिन उसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने उनके खाते से बड़ी रकम उड़ा ली।

साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की सूचना मिलने के बाद साइबर थाना की टीम ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस उस मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिससे पीड़ित ने संपर्क किया था। साथ ही खाते से पैसे किस बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर किए गए, इसकी भी जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते ट्रांजेक्शन का पता चल जाए तो कई मामलों में रकम को होल्ड कराया जा सकता है। इसलिए ठगी की जानकारी मिलते ही तत्काल शिकायत करना बेहद जरूरी है।

एटीएम परिसर में लगे फर्जी नंबरों से रहें सावधान

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ठग एटीएम मशीनों या उनके आसपास बैंक हेल्पलाइन के नाम पर फर्जी मोबाइल नंबर चिपका देते हैं। तकनीकी समस्या आने पर लोग इन्हीं नंबरों पर कॉल कर बैठते हैं और फिर साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं।

बैंक कभी भी फोन पर एटीएम पिन, सीवीवी, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो समझ लेना चाहिए कि वह साइबर ठग है।

पुलिस ने लोगों से की अपील

मुजफ्फरपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि—

  • एटीएम में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी होने पर केवल बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन पर ही संपर्क करें।
  • एटीएम के बाहर लिखे या चिपकाए गए अनजान मोबाइल नंबरों पर कभी कॉल न करें।
  • किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, यूपीआई पिन या बैंक पासवर्ड साझा न करें।
  • यदि साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत बैंक को सूचना देकर कार्ड और खाते को ब्लॉक कराएं।
  • तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं तथा साइबर क्राइम पोर्टल पर भी रिपोर्ट करें।
  • घटना की जानकारी निकटतम साइबर थाना या स्थानीय पुलिस को तुरंत दें।

लगातार बढ़ रहे हैं साइबर ठगी के मामले

मुजफ्फरपुर सहित पूरे बिहार में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। कभी केवाईसी अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन, लॉटरी, नौकरी और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो कभी एटीएम में तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर ठगी की जाती है।

पुलिस का मानना है कि जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। लोग यदि बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करेंगे और केवल आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करेंगे, तो अधिकांश साइबर ठगी की घटनाओं को रोका जा सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर बड़ी रकम उड़ा सकते हैं। ऐसे में हर बैंक ग्राहक को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश से बचने की आवश्यकता है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों तक जल्द पहुंच बनाई जाएगी।