समस्तीपुर में साइबर ठगी का पर्दाफाश: एनआरआई बनकर महिला से ठगे 13.30 लाख रुपये, मास्टरमाइंड शमशाद और प्रिंस कुमार गिरफ्तार कर भेजे गए जेल
बिहार के समस्तीपुर जिले से साइबर अपराध का एक बेहद शातिर मामला सामने आया है, जहाँ खुद को एनआरआई (NRI) बताकर एक महिला से 13.30 लाख रुपये की बड़ी ठगी करने वाले दो कुख्यात अपराधियों को पुलिस ने धर दबोचा है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना क्षेत्र के भैरोखड़ा गांव की रहने वाली पीड़िता रंजू देवी लंबे समय से ठगी के इस जाल में फंसी हुई थीं।
साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद इस सनसनीखेज कांड के मुख्य आरोपियों—मो. शमशाद और प्रिंस कुमार—को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? (एनआरआई बनकर बुना जाल)
यह पूरा मामला सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से जुड़े हाई-प्रोफाइल फ्रॉड का है। पीड़िता रंजू देवी की शिकायत के अनुसार, आरोपी मो. शमशाद ने सोशल मीडिया और कॉलिंग के जरिए उनसे संपर्क साधा था।
खुद को बताया एनआरआई: शातिर ठग शमशाद ने महिला और उनके परिवार को अपने प्रेम जाल और चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाने के लिए खुद को एक समृद्ध एनआरआई (अनिवासी भारतीय) बताया। उसने विश्वास दिलाया कि वह विदेश में बड़ा बिजनेस करता है और उनके परिवार की हरसंभव मदद करेगा।
महंगे तोहफे और पैसों की मांग: विदेशी तोहफे, डॉलर और अन्य कीमती सामान भेजने के नाम पर ठग ने कस्टम ड्यूटी, एयरलाइंस चार्ज और टैक्स के बहाने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 13.30 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
ठगी का अहसास: जब पैसे ऐंठने के बाद भी आरोपी लगातार और पैसों की मांग करने लगा और उसका फोन बंद होने लगा, तब रंजू देवी को समझ आया कि उनके साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय थाने और साइबर सेल में दर्ज कराई।
पुलिस अनुसंधान और आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। साइबर सेल की तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाना शुरू किया।
लोकेशन की ट्रेसिंग: पुलिस ने बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और मोबाइल नंबरों की लोकेशन के जरिए मुख्य आरोपी मो. शमशाद और उसके सहयोगी प्रिंस कुमार तक पहुँचने में सफलता हासिल की।
छापेमारी और धरपकड़: पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को उनके ठिकानों से दबोच लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
आपराधिक साक्ष्य बरामद: पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई फर्जी बैंक खातों के दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल पैसों की हेराफेरी के लिए किया जाता था।
कोर्ट में पेशी और जेल भेजे जाने की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों—मो. शमशाद और प्रिंस कुमार—को कड़ी सुरक्षा के बीच संबंधित अदालत में पेश किया गया।
न्यायिक हिरासत: मामले की नजाकत और साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
रिमांड पर लेने की तैयारी: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर पुलिस अदालत से दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है, ताकि ठगी गई रकम और गिरोह के अन्य सदस्यों का सुराग मिल सके।
समस्तीपुर में साइबर अपराध और पुलिस की चेतावनी
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करना और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
साइबर सेल की अपील: पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर खुद को विदेशी नागरिक या एनआरआई बताकर महंगे उपहार भेजने का झांसा देने वाले ठगों के झांसे में बिल्कुल न आएं।
सतर्कता ही बचाव है: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते की डिटेल साझा न करें और न ही किसी अज्ञात खाते में पैसे ट्रांसफर करें। यदि कोई ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
समस्तीपुर के ताजपुर क्षेत्र की रंजू देवी से 13.30 लाख रुपये की ठगी के मामले में मो. शमशाद और प्रिंस कुमार की गिरफ्तारी पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है। इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि कानून की नजरों से साइबर अपराधी बच नहीं सकते। हालांकि, इस तरह के मामलों से बचने के लिए नागरिकों का जागरूक रहना सबसे बड़ा हथियार है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि पीड़ित महिला को उसके डूबे हुए पैसे वापस मिल सकें और इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया हो सके।