उद्घाटन के दो साल भी नहीं बीते और पोल खुलने लगी; सदर अस्पताल के मॉडल भवन में बारिश का पानी टपकने से मचा हड़कंप, संक्रमण के साए में जीने को मजबूर हैं मरीज और तीमारदार

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को अत्याधुनिक बनाने और ग्रामीण व शहरी इलाकों के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के दावे की पोल भागलपुर में खुद-ब-खुद खुलती नजर आ रही है। भागलपुर सदर अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए भव्य 'मॉडल अस्पताल' (Model Hospital Building) के निर्माण पर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति यह है कि इस आधुनिक अस्पताल भवन के उद्घाटन को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, और मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने इसकी पोल खोल दी है। अस्पताल की छतों से पानी टपकने लगा है, वार्डों और गलियारों में जलजमाव जैसी स्थिति बन गई है, जिससे मरीजों के बीच संक्रमण (Infection) फैलने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और निर्माण एजेंसियां इस समस्या से मुंह चुराती नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला? करोड़ों की लागत से बना मॉडल अस्पताल या कागजी महल

कुछ ही समय पहले भागलपुर सदर अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अत्याधुनिक मॉडल अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था। इस बहुमंजिला भवन के उद्घाटन के समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि यहाँ मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सीय सुविधाएं, आधुनिक वार्ड और पूरी तरह से संक्रमण-मुक्त (Sanitized & Hygienic) माहौल मिलेगा।

लेकिन, हाल ही में हुई बारिश ने इस आधुनिक इमारत की पोलपट्टी खोलकर रख दी। अस्पताल के ओपीडी कक्ष, दवा वितरण काउंटर, प्रतीक्षा कक्ष और कई अन्य वार्डों की छतों और दीवारों से पानी रिस-रिसकर नीचे गिरने लगा। स्थिति इतनी बदतर हो गई कि फर्श पर पानी जमा होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को चलने-फिरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी टपकते पानी के बीच ही अपनी सेवाएं देने को विवश होना पड़ा।

संक्रमण फैलने का बढ़ा गंभीर खतरा (High Risk of Hospital-Acquired Infections)

चिकित्सा जगत के जानकारों का मानना है कि अस्पताल एक ऐसी जगह है जहाँ पहले से ही बीमार और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले (Low Immunity) मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में पानी टपके, सीलन पैदा हो और दीवारों पर नमी के कारण फफूंद (Fungus) जमे, तो वहाँ संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

बैक्टीरिया और वायरस का पनपना: सीलन और नमी वाले स्थानों पर हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे मरीजों को न्यूमोनिया, त्वचा रोग, और अन्य संक्रामक बीमारियां होने का खतरा पैदा हो जाता है।

दवाओं और उपकरणों पर असर: पानी टपकने के कारण अस्पताल में रखी जीवन रक्षक दवाएं, सर्जिकल उपकरण और महंगे मेडिकल रिकॉर्ड भी भीगने या खराब होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

जिम्मेदारों की उदासीनता: अधिकारी दे रहे गोलमोल जवाब

जब इस गंभीर मामले की खबर मीडिया और स्थानीय लोगों के माध्यम से सामने आई, तो सदर अस्पताल प्रबंधन और संबंधित निर्माण विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए। लेकिन अपनी कमियों को स्वीकार करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए।

मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति: शुरुआती तौर पर अधिकारियों ने इसे मामूली तकनीकी कमी बताते हुए जल्द ठीक कराने का आश्वासन दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

भ्रष्टाचार के आरोप: स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले में भारी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग होता है, यह इस मॉडल अस्पताल की टपकती छतें चीख-चीख कर बयां कर रही हैं। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि किसी भी दोषी इंजीनियर या ठेकेदार पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

आम जनता और मरीजों में गहरा आक्रोश

सदर अस्पताल में इलाज कराने दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों में इस व्यवस्था को लेकर भयंकर गुस्सा है। मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल खुद ही बीमार और जर्जर हो जाए, तो वहाँ आने वाले मरीज कैसे स्वस्थ होकर लौटेंगे? बारिश के दिनों में इलाज के लिए आने वाले लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर इस टपकती इमारत के नीचे बैठना पड़ रहा है।

भागलपुर के सदर अस्पताल स्थित मॉडल भवन का यह हाल प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। उद्घाटन के दो साल के भीतर ही इमारत का इस तरह से जर्जर होना और बारिश का पानी टपकना यह साबित करता है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से भारी समझौता किया गया था। यदि समय रहते इस दिशा में कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और भवन की वाटरप्रूफिंग व मरम्मत ठीक से नहीं कराई गई, तो यह आधुनिक अस्पताल जल्द ही मरीजों के लिए जीवन रक्षक की बजाय जीवन के लिए खतरा बन जाएगा।