श्रावणी मेले के दौरान भोलानाथ पुल की बदहाली पर फूटा पार्षद शांडिल्य नंदीकेश का गुस्सा; नगर निगम प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा—लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ हो रहा है खिलवाड़
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: पवित्र श्रावणी मेले का पावन अवसर चल रहा है और देश-विदेश से लाखों की संख्या में कांवड़िए व शिवभक्त बाबा भोलेनाथ की नगरी सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। इस बीच, सिल्क सिटी भागलपुर के अतिसंवेदनशील और व्यस्ततम भोलानाथ पुल (Bholanath Pul) की नारकीय स्थिति को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आक्रोश फूट पड़ा है। भागलपुर नगर निगम के लोकप्रिय पार्षद शांडिल्य नंदीकेश ने भोलानाथ पुल की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ सीधे तौर पर नगर निगम प्रशासन और रेलवे के अधिकारियों के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। पार्षद ने तीखे शब्दों में कहा है कि सावन जैसे पवित्र महीने में भी इस महत्वपूर्ण मार्ग पर फैली गंदगी, जलभराव और जर्जर स्थिति के कारण श्रद्धालुओं और आम जनता को भारी जिल्लत उठानी पड़ रही है।
क्या है भोलानाथ पुल की वास्तविक स्थिति? क्यों भड़के हैं पार्षद?
श्रावणी मेले के दौरान भागलपुर से गुजरने वाले शिव भक्तों और स्थानीय निवासियों के लिए भोलानाथ पुल एक मुख्य आवागमन का मार्ग है, लेकिन इसकी बदहाली हर साल एक बड़े संकट के रूप में सामने आती है:
एकमात्र प्रमुख विकल्प, लेकिन बदहाल: पार्षद शांडिल्य नंदीकेश ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि भागलपुर रेलवे स्टेशन और शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरकर सुल्तानगंज या झारखंड की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पुल मुख्य मार्गों में से एक है। इसके बावजूद, इस पुल के नीचे और आसपास हमेशा जलभराव, कीचड़ और भारी गंदगी का साम्राज्य बना रहता है।
गंदे पानी और कीचड़ के बीच से गुजरने की मजबूरी: सावन के इस पवित्र महीने में जब दूर-दूर से कांवड़िए और नंगे पांव शिवभक्त गुजरते हैं, उन्हें इस पुल के नीचे घुटने भर गंदे पानी और सीवर के ओवरफ्लो के बीच से होकर निकलना पड़ता है। पार्षदों का कहना है कि यह स्थिति न केवल प्रशासन के दावों की पोल खोलती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और उनके स्वास्थ्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।
पार्षद शांडिल्य नंदीकेश का प्रशासन पर कड़ा प्रहार
निगम प्रशासन के रवैये से क्षुब्ध होकर पार्षद शांडिल्य नंदीकेश ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है:
अधिकारियों की नींद क्यों नहीं खुलती?: पार्षद ने कहा कि श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, कागजों पर करोड़ों रुपए खर्च करने की योजनाएं दिखाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्या अधिकारियों को इस बात का अहसास नहीं है कि सावन में इस रास्ते से लाखों की संख्या में श्रद्धालु गुजरते हैं?
रेलवे और निगम में समन्वय की कमी: भोलानाथ पुल के चौड़ीकरण और जल निकासी के मुद्दे पर हमेशा से रेलवे और नगर निगम प्रशासन के बीच गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकी जाती रही है। पार्षद ने दो टूक शब्दों में कहा कि आपसी खींचतान और प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज भागलपुर की जनता और देश भर से आने वाले शिवभक्तों को सजा भुगतनी पड़ रही है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यवसायियों की बढ़ रही है परेशानी
भोलानाथ पुल की इस बदहाली से केवल कांवड़िए ही नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिक और व्यापारी वर्ग भी बुरी तरह त्रस्त हैं:
व्यापार पर असर और जाम की समस्या: पुल के नीचे जलभराव और गड्ढों के कारण आए दिन गाड़ियां फंस जाती हैं, जिससे घंटों भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी इस जाम में फंसकर रह जाती हैं।
बीमारियों का खतरा: गंदे पानी के जमा होने और कचरे के सड़ने से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के इलाकों में संक्रामक बीमारियों फैलने का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है।
पार्षद की चेतावनी: सुधार नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए पार्षद शांडिल्य नंदीकेश ने प्रशासन को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है:
तत्काल सफाई और जलापूर्ति सुधार की मांग: उन्होंने नगर निगम के आयुक्त और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से भोलानाथ पुल के पास से पानी की निकासी कराई जाए, ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव हो तथा निरंतर साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
सड़क पर उतरने की चेतावनी: पार्षद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे स्थानीय जनता और शिवभक्तों को साथ लेकर नगर निगम कार्यालय के खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
श्रावणी मेले जैसे पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के दौरान भागलपुर के भोलानाथ पुल की यह बदहाली प्रशासनिक व्यवस्था पर एक गंभीर दाग है। पार्षद शांडिल्य नंदीकेश द्वारा उठाए गए इस मुखर कदम ने एक बार फिर प्रशासन की पोल खोल दी है। अब देखना यह होगा कि इस चेतावनी के बाद कुंभकर्णी नींद सो रहा नगर निगम प्रशासन हरकत में आता है या श्रद्धालुओं को यूं ही दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।