मुजफ्फरपुर जंक्शन पर कोच इंडिकेटर की गड़बड़ी से यात्रियों में अफरातफरी, सहरसा-अहमदाबाद एक्सप्रेस के यात्रियों को हुई भारी परेशानी
मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल मुजफ्फरपुर जंक्शन पर रविवार रात उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर लगा कोच इंडिकेटर डिस्प्ले यात्रियों को सही जानकारी देने में विफल रहा। सहरसा-अहमदाबाद एक्सप्रेस के आगमन के दौरान तकनीकी गड़बड़ी के कारण यात्रियों को अपने कोच की सही स्थिति का पता नहीं चल सका। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में यात्री इधर-उधर दौड़ते नजर आए। इस दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन के आने से पहले प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ मौजूद थी। अधिकांश यात्री कोच इंडिकेटर पर प्रदर्शित जानकारी के आधार पर अपने-अपने डिब्बों के सामने खड़े थे। लेकिन जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो डिस्प्ले बोर्ड पर दिखाई गई जानकारी और वास्तविक कोच पोजिशन में अंतर पाया गया। इससे यात्रियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
कोच खोजने के लिए दौड़ते रहे यात्री
सहरसा-अहमदाबाद एक्सप्रेस लंबी दूरी की महत्वपूर्ण ट्रेन है, जिसमें बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही यात्रियों को एहसास हुआ कि उनका कोच वहां नहीं है जहां इंडिकेटर ने बताया था। इसके बाद लोग सामान लेकर तेजी से एक कोच से दूसरे कोच की ओर भागने लगे।
कई यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के रुकने का समय सीमित होने के कारण उन्हें काफी तनाव का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों को अपने आरक्षित कोच तक पहुंचने के लिए प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी तक दौड़ना पड़ा। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को संभालना भी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों को हुई सबसे ज्यादा दिक्कत
घटना के दौरान सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं को हुई। कई बुजुर्ग यात्रियों ने बताया कि वे कोच इंडिकेटर पर भरोसा कर निर्धारित स्थान पर खड़े थे, लेकिन ट्रेन आने के बाद उन्हें पता चला कि उनका डिब्बा प्लेटफॉर्म के दूसरे छोर पर है। ऐसे में भारी सामान के साथ तेजी से चलना उनके लिए मुश्किल हो गया।
कुछ यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सही दिशा-निर्देश मिल सके।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
घटना के बाद कई यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आधुनिक रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए डिजिटल कोच इंडिकेटर यदि सही जानकारी नहीं देंगे तो उनका कोई औचित्य नहीं रह जाता। यात्रियों ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण न केवल समय की बर्बादी हुई बल्कि ट्रेन छूटने का डर भी बना रहा।
कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद सूचना प्रणाली पूरी तरह सक्रिय नहीं थी और समय रहते कोई वैकल्पिक घोषणा भी नहीं की गई। यदि लाउडस्पीकर से सही कोच पोजिशन की जानकारी दे दी जाती तो स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हो सकती थी।
रेलवे अधिकारियों ने लिया संज्ञान
घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी या डेटा अपडेट में त्रुटि को संभावित कारण माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि कोच इंडिकेटर प्रणाली की जांच कराई जाएगी और दोष मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम को ट्रेन की कोच संरचना से जोड़कर संचालित किया जाता है। यदि अंतिम समय में कोचों की स्थिति में कोई बदलाव होता है और सिस्टम अपडेट नहीं हो पाता, तो इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
बढ़ती भीड़ के बीच सूचना प्रणाली की अहम भूमिका
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में स्टेशनों पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सूचना प्रणाली की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। कोच इंडिकेटर, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली यात्रियों को सही जानकारी देने के प्रमुख माध्यम हैं। इनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सीधे तौर पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारों, छुट्टियों और लंबी दूरी की ट्रेनों के दौरान प्लेटफॉर्म पर भीड़ अधिक रहती है। ऐसे समय में यदि कोच पोजिशन की जानकारी गलत प्रदर्शित होती है तो भगदड़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए रेलवे को सूचना प्रणाली की नियमित जांच और रखरखाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
यात्रियों ने की बेहतर व्यवस्था की मांग
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर हुई इस घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे से मांग की है कि कोच इंडिकेटर सिस्टम को और अधिक विश्वसनीय बनाया जाए। साथ ही प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने, समय पर उद्घोषणा करने और तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में वैकल्पिक सूचना व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है।
यात्रियों का कहना है कि रेलवे लगातार आधुनिकीकरण की दिशा में कार्य कर रहा है, लेकिन यात्रियों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब तकनीकी प्रणालियां बिना किसी त्रुटि के काम करें।