बिलौटी टाउनशिप से जगी उम्मीद, चार दशक पुराने पर्चाधारी अब मांग रहे अपनी जमीन पर कब्जा

शाहपुर (भोजपुर)। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत बिलौटी पंचायत में कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विकसित की जा रही नई टाउनशिप अब केवल विस्थापित परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि चार दशक पहले गृहस्थल योजना के तहत जमीन का पर्चा प्राप्त करने वाले भूमिहीन परिवारों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आई है। वर्षों से अपनी आवंटित भूमि पर अधिकार पाने का इंतजार कर रहे अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति के दर्जनों परिवार अब प्रशासन से अपनी जमीन की पैमाइश कराकर विधिवत कब्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बिलौटी गांव के दक्षिणी हिस्से में जवइनिया गांव के गंगा कटाव प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टाउनशिप विकसित की जा रही है। इस परियोजना के चलते क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। इसी बदलाव ने पुराने पर्चाधारियों की उम्मीदों को भी नया जीवन दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि गृहस्थल योजना के तहत कई भूमिहीन परिवारों को वर्ष 1983 में जमीन के पर्चे दिए गए थे। इसके बाद अलग-अलग चरणों में वर्ष 1995, 2005 और 2014 में भी पात्र लाभार्थियों को भूमि आवंटित की गई। लेकिन पर्चा मिलने के बावजूद अधिकांश परिवार अपनी जमीन पर स्थायी रूप से बस नहीं सके। वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया, जिससे वे आज भी अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बताया जाता है कि जिन लोगों को भूमि आवंटित की गई थी, उनमें से कई लाभार्थियों का अब निधन हो चुका है। उनके उत्तराधिकारी आज भी अपने पूर्वजों को आवंटित जमीन पर अधिकार पाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि सरकारी अभिलेखों में उनके नाम जमीन दर्ज है, लेकिन वास्तविक रूप से वे उस भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

कुछ परिवारों ने वर्षों पहले अपने आवंटित भूखंड पर झोपड़ीनुमा मकान बनाकर रहने की कोशिश भी की थी। लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, एक रात अज्ञात लोगों ने उन झोपड़ियों में आग लगा दी थी। इस घटना के बाद वहां रहने वाले परिवारों में भय का माहौल बन गया और किसी ने दोबारा वहां बसने का साहस नहीं किया। इस घटना के बाद से वह भूमि लंबे समय तक लगभग खाली पड़ी रही।

ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्हें जमीन का पर्चा मिला था, उस समय वहां तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी। बिजली, पेयजल, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। ऐसे में दूर-दराज के निर्जन क्षेत्र में जाकर बसना अधिकांश परिवारों के लिए व्यावहारिक नहीं था। यही कारण रहा कि कई लोगों ने चाहकर भी अपने भूखंड पर स्थायी घर नहीं बनाया।

अब परिस्थितियां बदल रही हैं। कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बनाई जा रही टाउनशिप के कारण पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है। सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार से आसपास का इलाका आबादी के लिए अधिक उपयुक्त बनता जा रहा है। इससे पुराने पर्चाधारियों को भी विश्वास जगा है कि अब वे अपनी जमीन पर सम्मानपूर्वक घर बनाकर रह सकते हैं।

पर्चाधारियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आवंटित भूमि की जल्द से जल्द पैमाइश कराई जाए, सीमांकन कराया जाए और उन्हें विधिवत कब्जा दिलाया जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार ने उन्हें वर्षों पहले भूमि का अधिकार दिया था तो अब उस अधिकार का वास्तविक लाभ भी मिलना चाहिए। कई परिवारों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपनी निजी जमीन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकार द्वारा आवंटित भूमि ही उनके स्थायी आशियाने का एकमात्र सहारा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि सरकार की विभिन्न आवास और पुनर्वास योजनाओं का उद्देश्य भूमिहीन परिवारों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। यदि पात्र लाभार्थियों को वर्षों बाद भी अपनी आवंटित भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाता, तो योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने प्रशासन से मामले को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील की है।

क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन पुराने पर्चाधारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेता है तो इससे दर्जनों परिवारों को स्थायी आवास मिल सकेगा। साथ ही टाउनशिप का विकास भी अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि विवाद और लंबित मामलों का समाधान होने से भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या सामाजिक समस्या की संभावना भी कम होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि इस संबंध में आवश्यक आवेदन और अभिलेख उपलब्ध कराए जाते हैं तो नियमानुसार उनकी जांच की जाएगी। भूमि अभिलेखों का सत्यापन, पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार की मंशा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ उपलब्ध कराना है।

बिलौटी गांव में विकसित हो रही नई टाउनशिप ने वर्षों से अपने अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों के मन में एक नई आशा जगाई है। अब उनकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय लिया जाता है, तो चार दशक से लंबित भूमि अधिकार का सपना साकार हो सकता है और अनेक भूमिहीन परिवार अपने स्वयं के घर में सम्मानपूर्वक जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।