बिहार का महा-टेंडर घोटाला! रिशुश्री की गिरफ्तारी के बाद अब 'सुपरकॉप्स' के रडार पर IAS संजीव हंस और पवन कुमार

 बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस वक्त 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' चल रहा है। राज्य का सबसे चर्चित और करोड़ों का टेंडर घोटाला अब अपने अंजाम की तरफ बढ़ रहा है। विशेष सतर्कता इकाई (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस पूरे नेक्सस की कमर तोड़नी शुरू कर दी है।

27 मई को इस सिंडिकेट की बेहद अहम कड़ी रिशुश्री की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी रफ्तार दोगुनी कर दी है। अब अगला नंबर इस घोटाले के मास्टरमाइंड माने जा रहे 1997 बैच के सीनियर आईएएस (IAS) अधिकारी संजीव हंस और उनके खास राजदार पवन कुमार का है। दोनों फिलहाल फरार चल रहे हैं, लेकिन कानून का शिकंजा उन पर कस चुका है।

 द डर्टी गेम: कैसे चलता था यह 'करोड़पति सिंडिकेट'?

यह सिर्फ पैसों की हेराफेरी का मामला नहीं है, बल्कि यह नौकरशाह (Bureaucrat) + राजनेता (Politician) + बिचौलिये (Middlemen) का एक ऐसा खतरनाक त्रिकोण था, जिसने बिहार के सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया।

किंगपिन (IAS संजीव हंस): जल संसाधन और ऊर्जा विभाग जैसे मलाईदार विभागों के प्रधान सचिव रहते हुए इन्होंने कथित तौर पर टेंडर की शर्तों को अपने हिसाब से 'ट्विस्ट' किया, ताकि पसंदीदा कंपनियों को ठेके मिल सकें।

पॉलिटिकल पार्टनर (गुलाब यादव): पूर्व आरजेडी विधायक गुलाब यादव इस खेल के राजनीतिक सारथी थे, जिन्होंने पावर और पैसे को मैनेज करने में अहम भूमिका निभाई।

मनी मैनेजर (पवन कुमार): संजीव हंस और गुलाब यादव का सबसे भरोसेमंद सिपहसालार। पवन कुमार का काम था टेंडर से आने वाले 'कमीशन' के काले धन को शेल कंपनियों (Fake Companies) के जरिए ठिकाने लगाना।

द लॉकर (रिशुश्री): 27 मई को दबोची गई रिशुश्री इस सिंडिकेट की वो राजदार है, जिसके नाम पर बेनामी संपत्तियां, किलो के भाव सोना और लग्जरी गाड़ियां खरीदी गईं।

 '30 डेज काउंटडाउन': एक महीने में चार्जशीट की तैयारी

कानूनी जानकारों की मानें तो रिशुश्री की गिरफ्तारी के बाद SVU के पास वक्त बेहद कम है। जांच एजेंसी किसी भी कीमत पर आरोपियों को 'डिफॉल्ट बेल' का मौका नहीं देना चाहती।

इनसाइड सोर्स: "SVU बेहद आक्रामक मोड में है। रिशुश्री से मिले व्हाट्सएप चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन्स और डिजिटल सबूतों को कंपाइल किया जा रहा है। रिशुश्री की गिरफ्तारी के ठीक एक महीने के भीतर कोर्ट में पुख्ता चार्जशीट (Aarop Patra) दाखिल करने की तैयारी है, ताकि आरोपियों के बचने के सारे रास्ते बंद हो जाएं।"

 अगला टारगेट: संजीव हंस और पवन कुमार की गिरफ्तारी!

बिहार ब्यूरोक्रेसी में कभी अपनी उंगलियों पर सिस्टम नचाने वाले संजीव हंस आज खुद कानून से भाग रहे हैं। कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद SVU की स्पेशल टीमें दिल्ली, पटना और मुंबई समेत कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।

क्या है एजेंसियों का अगला प्लान?

कुर्की-जब्ती की तलवार: अगर संजीव हंस और पवन कुमार ने जल्द ही सरेंडर नहीं किया, तो कोर्ट के आदेश पर उनकी आलीशान कोठियों और संपत्तियों की कुर्की शुरू कर दी जाएगी।

ED का 'मनी लॉन्ड्रिंग' जाल: एक तरफ SVU जहां भ्रष्टाचार की धाराएं लगा रही है, वहीं ED इस काले धन से खरीदी गई जमीनों और फ्लैट्स को सील (Attach) करने की तैयारी में है।

नीतीश सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में 'नो कॉम्प्रोमाइज'। संजीव हंस को पहले ही उनके मलाईदार पदों से हटाकर साइडलाइन किया जा चुका है।

अब देखना यह है कि कानून की आंख में धूल झोंक रहे आईएएस संजीव हंस और पवन कुमार कब तक फरार रह पाते हैं। लेकिन एक बात साफ है—रिशुश्री के जेल जाने के बाद, इस महाघोटाले की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है!