भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: बेतिया के युवक ने शुरू किया आमरण अनशन, बिलौटी गांव बना न्याय की मांग का केंद्र
आरा/भोजपुर। भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर पूरे बिहार में चर्चा तेज है और न्याय की मांग को लेकर विभिन्न जिलों से लोग भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में पश्चिम चंपारण के बेतिया निवासी एक युवक ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। वहीं जहानाबाद की एक नीट छात्रा की मां ने भी बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी की मां से मुलाकात की और न्याय की लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया है।
भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध अब केवल भोजपुर तक सीमित नहीं रह गया है। राज्य के विभिन्न जिलों से सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, युवा संगठन और आम लोग बिलौटी गांव पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर बेतिया निवासी सचिन मिश्रा ने आमरण अनशन का रास्ता चुना है।
मुंडन कराकर अनशन पर बैठे सचिन मिश्रा
जानकारी के अनुसार, पश्चिम चंपारण के बेतिया निवासी सचिन मिश्रा ने बिलौटी गांव पहुंचकर पहले अपना मुंडन कराया और उसके बाद आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी मामले में न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। सचिन का कहना है कि जब उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पूरी घटना की जानकारी ली, तब उन्हें लगा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। इसी कारण उन्होंने अनशन का निर्णय लिया।
अनशन स्थल पर विभिन्न मांगों से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। इनमें मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने जैसी मांगें शामिल हैं। अनशन की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। चिकित्सकों की एक टीम समय-समय पर अनशनकारी के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है।
बिलौटी गांव पहुंच रहे हैं विभिन्न जिलों के लोग
भरत तिवारी की मौत के बाद बिलौटी गांव लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। गांव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, छात्र नेता, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और आम नागरिक परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। कई लोग इसे न्याय की लड़ाई बताते हुए परिवार के साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं।
इसी बीच पश्चिम बंगाल के मालदा से अयोध्या जा रहे कुछ श्रद्धालु भी बिलौटी गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस घटना की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने अपना रास्ता बदलकर गांव पहुंचने का निर्णय लिया। श्रद्धालुओं ने भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों से मुलाकात की।
नीट छात्रा की मां ने की भरत की मां से मुलाकात
मामले का सबसे भावुक पक्ष तब सामने आया जब जहानाबाद की रहने वाली एक नीट छात्रा की मां बिलौटी गांव पहुंचीं। उन्होंने भरत तिवारी की मां से मुलाकात की और लंबे समय तक बातचीत की। मुलाकात के दौरान दोनों परिवारों के बीच भावुक माहौल देखने को मिला।
नीट छात्रा की मां ने कहा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वे अन्य पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना समाज की जिम्मेदारी है और जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
मुलाकात के दौरान मौजूद महिलाओं ने भी भरत की मां को हिम्मत बंधाई और कहा कि अब दुख में टूटने का नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का समय है। इस दौरान प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। पटना हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में एनकाउंटर की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही परिजनों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद इस प्रकरण को लेकर कानूनी बहस भी तेज हो गई है।
पुलिस ने स्वीकार की चूक
इस बीच बिहार पुलिस की ओर से भी महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना है कि इस मामले में कुछ स्तर पर चूक हुई है। मामले की जांच शाहाबाद क्षेत्र के डीआईजी को सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की इस स्वीकारोक्ति के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
न्याय की मांग बनी जनआंदोलन
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस अब केवल एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग से जुड़ा बड़ा जन मुद्दा बनता जा रहा है। बेतिया के युवक का आमरण अनशन, विभिन्न जिलों से लोगों का बिलौटी गांव पहुंचना, नीट छात्रा की मां का समर्थन और हाईकोर्ट में दायर याचिका इस बात का संकेत हैं कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा सामाजिक महत्व प्राप्त कर सकता है।
फिलहाल पूरे राज्य की नजर जांच प्रक्रिया और न्यायालय की कार्यवाही पर टिकी हुई है। पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।