मुजफ्फरपुर: शिक्षा जगत ने खोया अपना एक चमकता सितारा, जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक पंकज कुमार का निधन

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के शिक्षा जगत के लिए सोमवार का दिन एक अपूरणीय क्षति लेकर आया। शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान 'जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल' के निदेशक और एक दूरदर्शी शिक्षाविद् पंकज कुमार का लंबी बीमारी के बाद मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर ने पूरे जिले के शैक्षणिक समुदाय, अभिभावकों और छात्रों को गहरे सदमे में डाल दिया है। वे 50 वर्ष के थे और अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ गए हैं।

एक दूरदर्शी शिक्षाविद् का सफर

पंकज कुमार केवल एक स्कूल के निदेशक नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक शिक्षा पद्धति के समर्थक और युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत थे। शिक्षकों और सहकर्मियों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि पंकज कुमार ने न केवल जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि मुजफ्फरपुर के अन्य स्कूलों के साथ भी तालमेल और सहयोग की एक नई संस्कृति विकसित की।

उनके साथ काम करने वाले वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि पंकज कुमार का विजन स्पष्ट था—वे शिक्षा को किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक और चरित्र निर्माण का माध्यम बनाना चाहते थे। उनके नेतृत्व में स्कूल ने अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

शिक्षक समुदाय में शोक की लहर

पंकज कुमार के निधन की खबर सुनते ही शहर के विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने शोक व्यक्त किया। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति बताते हुए शिक्षकों ने कहा:

प्रेरक व्यक्तित्व: पंकज कुमार शिक्षकों के लिए सदैव एक मार्गदर्शक की तरह रहे, जो हर मुश्किल परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाते थे।

सामुदायिक तालमेल: वे मुजफ्फरपुर के स्कूलों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धी माहौल और आपसी सहयोग को मजबूत करने के पक्षधर थे।

छात्र हितैषी: छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए उनके द्वारा लिए गए निर्णय आज भी स्कूल की कार्यप्रणाली का आधार हैं।

शोक सभाओं का दौर

मंगलवार को शहर के कई प्रमुख स्कूलों में शोक सभाएं आयोजित की गईं, जहां दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। जीडी मदर इंटरनेशनल स्कूल परिसर में आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में शिक्षकों और कर्मचारियों की आंखें नम थीं। वक्ताओं ने उनके कार्यकाल के उन संस्मरणों को साझा किया, जो उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाते थे।

मुजफ्फरपुर के विकास में योगदान

शिक्षा के अलावा, पंकज कुमार सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े थे। वे खेल गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों को प्रायोजित करने में सदैव आगे रहते थे। उनके निधन से मुजफ्फरपुर ने एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है, जो शिक्षा के जरिए समाज में बदलाव लाने के लिए समर्पित था।

 पंकज कुमार का जाना मुजफ्फरपुर के शैक्षणिक इतिहास के एक अध्याय का अंत है। उनके द्वारा लगाए गए शिक्षा के पौधे आज विशाल वृक्ष बन चुके हैं, जो भविष्य की पीढ़ियों को छाया देते रहेंगे। उनकी विचारधारा, उनका अनुशासन और उनका 'छात्र-प्रथम' दृष्टिकोण सदैव उन लोगों को प्रेरित करता रहेगा, जो शिक्षा की राह पर चल रहे हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस वज्रपात को सहने की शक्ति प्रदान करे।