पूर्णिया पुलिस का बड़ा एक्शन! बाइक चोर गिरोह के 2 शातिर चोर दबोचे गए, 3 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद

रंगे हाथ या गुप्त सूचना पर दबोचे गए: पूर्णिया पुलिस की विशेष टीम ने जाल बिछाकर दो शातिर अपराधियों को दबोचा।

बरामदगी: चोरों के पास से अलग-अलग इलाकों से चोरी की गई 3 चमचमाती बाइक्स बरामद।

अगला टारगेट: गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी की बाइक खरीदने वाले गैराज मालिकों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी जारी।

ग्राउंड रिपोर्ट: भीड़भाड़ वाले इलाकों को बनाते थे निशाना

पूर्णिया जिला और इसके आस-पास के शहरी व ग्रामीण इलाकों (जैसे केहाट, सहायक थाना, मरंगा और लाइन बाजार) में पिछले कुछ समय से लगातार वाहन चोरी की शिकायतें सामने आ रही थीं। अस्पताल परिसर, शॉपिंग मॉल, सब्जी मंडियों और साप्ताहिक बाजारों के बाहर से पलक झपकते ही मोटरसाइकिलें गायब हो जा रही थीं।

इस बढ़ते सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए पूर्णिया पुलिस की टीम लगातार टेक्निकल सेल और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की मदद से इन चोरों का सुराग तलाश रही थी। इसी क्रम में मिली एक सटीक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम ने नाकेबंदी की और छापेमारी कर गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को दबोच लिया।

 

कैसे देते थे वारदात को अंजाम? (Modus Operandi)

गिरफ्तार चोरों से जब पुलिसिया अंदाज में पूछताछ की गई, तो उन्होंने वाहन चोरी के ऐसे-ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए जिसे सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।

 ये अपराधी पहले किसी व्यस्त बाजार, कोर्ट परिसर या अस्पताल के बाहर खड़ी बाइकों की रेकी करते थे। जैसे ही इन्हें लगता था कि बाइक का मालिक काफी देर के लिए अंदर गया है, ये तुरंत एक्टिव हो जाते थे। इनके पास विशेष रूप से तैयार की गई 'मास्टर की' (Master Key) होती थी, जिससे ये किसी भी गाड़ी का हैंडल और इग्निशन लॉक महज 10 से 15 सेकंड के भीतर तोड़ देते थे और गाड़ी लेकर रफूचक्कर हो जाते थे।

पूछताछ में खुला 'सिंडिकेट' का राज: सस्ते दामों में बेचते थे गाड़ियां

पुलिस की पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे केवल मोहरे हैं। इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह (Organized Gang) काम कर रहा है।

चोरी के बाद कहां जाती हैं बाइक्स?

गैराज मालिकों से साठगांठ: ये चोर गाड़ियों को चुराने के बाद सीधे जिला मुख्यालय से दूर ग्रामीण इलाकों या पड़ोसी जिलों (जैसे अररिया, कटिहार) के कुछ चिन्हित गैराज मालिकों को सौंप देते थे।

पार्ट्स का अवैध धंधा: कई बार महंगी बाइकों के चेचिस और इंजन नंबर को घिसकर या मिटाकर उनके कल-पुर्जों (पार्ट्स) को अलग-अलग कर दिया जाता था और उन्हें स्क्रैप या रिपेयरिंग मार्केट में बेहद कम दामों पर बेच दिया जाता था।

फर्जी कागजात का खेल: कुछ मामलों में देहाती इलाकों के भोले-भले लोगों को बिना कागजात के या फर्जी ऑन-पेपर एग्रीमेंट बनाकर 10 से 15 हजार रुपये में गाड़ियां बेच दी जाती थीं।

पुलिस का कड़ा अल्टीमेटम: अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज

इस मामले की पुष्टि करते हुए स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों ने बताया कि दो चोरों का पकड़ा जाना इस गिरोह की कमर तोड़ने की शुरुआत है।

"हमारे पास इस गिरोह के सरगना (Mastermind) और अन्य सदस्यों के नाम-पते आ चुके हैं। पुलिस की विशेष टीम (Special Task Force) लगातार कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। बहुत जल्द इस रैकेट से जुड़े अन्य अपराधियों और चोरी का माल खरीदने वाले दुकानदारों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।"

पुलिस अब बरामद की गई तीनों बाइकों के इंजन नंबर और चेचिस नंबर के जरिए उनके असली मालिकों का पता लगा रही है, ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत गाड़ियां उनके वास्तविक मालिकों को सौंपी जा सकें।

पब्लिक के लिए पुलिस की जरूरी एडवाइजरी: रहें सतर्क

इस घटना के बाद पूर्णिया पुलिस ने आम जनता से भी अपने वाहनों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने की अपील की है:

डबल लॉक का इस्तेमाल: केवल हैंडल लॉक के भरोसे गाड़ी न छोड़ें, हमेशा व्हील लॉक या डिस्क लॉक का अतिरिक्त उपयोग करें।

सुरक्षित पार्किंग: गाड़ियों को लावारिस हालत में सड़क किनारे छोड़ने के बजाय हमेशा अधिकृत या सीसीटीवी की निगरानी वाली पार्किंग में ही खड़ी करें।

एंटी-थेफ्ट अलार्म: संभव हो तो अपनी दोपहिया गाड़ियों में एंटी-थेफ्ट अलार्म या जीपीएस ट्रैकर (GPS Tracker) जरूर लगवाएं।

 पूर्णिया पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से निश्चित रूप से वाहन चोरों के मनोबल पर चोट पहुंची है। लेकिन असली सफलता तब मिलेगी जब इस गिरोह का सरगना और गाड़ियों को काटने वाले अवैध गैराज सील होंगे। बहरहाल, पुलिस की टीमें इस वक्त सड़कों पर हैं, रेड्स जारी हैं और उम्मीद है कि आने वाले कुछ घंटों में पूर्णिया पुलिस किसी और बड़े खुलासे के साथ सामने आएगी!