मायागंज अस्पताल में मरीजों की सेहत से खिलवाड़, फफूंद लगी ब्रेड परोसने पर खानपान एजेंसी को शोकॉज

भागलपुर: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में मरीजों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के मरीजों को नाश्ते में फफूंद लगी (सड़ी हुई) ब्रेड परोसने का मामला सामने आया है। इस घटना से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और मरीजों के परिजनों ने एजेंसी की घोर लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया है।

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह जब मरीजों को अस्पताल की ओर से निर्धारित नाश्ता दिया गया, तो कई मरीजों ने ब्रेड में फफूंद (Mold) लगी होने की शिकायत की। ब्रेड का पैकेट खोलते ही उसमें हरे-सफेद रंग के धब्बे दिखाई दिए, जो इस बात का स्पष्ट संकेत थे कि यह खाद्य सामग्री कई दिन पुरानी है और पूरी तरह खराब हो चुकी है।

अस्पताल में भर्ती मरीजों ने जब इस दूषित भोजन का विरोध किया और इसकी सूचना वार्ड में मौजूद नर्सों व अन्य स्टाफ को दी, तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी मिली। मरीजों ने आरोप लगाया कि पहले भी भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन एजेंसी पर कोई असर नहीं पड़ा है।

अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दूषित खाद्य सामग्री को जब्त कर लिया। इसके साथ ही, अस्पताल को भोजन आपूर्ति करने वाली संबंधित खानपान एजेंसी (Catering Agency) को तत्काल प्रभाव से 'कारण बताओ नोटिस' (Show-cause notice) जारी किया गया है।

अधीक्षक डॉ. दुबे ने एजेंसी से पूछा है कि:

मरीजों को इतनी घटिया और दूषित खाद्य सामग्री किन परिस्थितियों में परोसी गई?

भोजन की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई?

इस लापरवाही के लिए एजेंसी के खिलाफ क्यों न अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और अनुबंध रद्द किया जाए?

दो दिनों में मांगा जवाब

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में एजेंसी को अपना पक्ष रखने के लिए मात्र 48 घंटे (दो दिन) का समय दिया है। डॉ. दुबे ने स्पष्ट किया है कि यदि एजेंसी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अस्पताल प्रबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल

यह पहली बार नहीं है जब मायागंज अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता को लेकर विवाद हुआ है। पहले भी अक्सर मरीजों को ठंडा या खराब भोजन मिलने की शिकायतें आती रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल में खानपान की व्यवस्था की निगरानी के लिए जो समिति बनाई गई है, वह अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रही है, जिसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ता है।

इस घटना के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि भविष्य में मरीजों को दिए जाने वाले हर भोजन के पैकेट की रैंडम चेकिंग की जाएगी और गुणवत्ता से समझौता करने वाली एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल, मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि संबंधित एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।