बरौनी में लगेगी 800 मेगावाट की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट, बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ बैट्री स्टोरेज सिस्टम की भी तैयारी
पटना। बिहार में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के जरिए ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के प्रमुख बिजली उत्पादन केंद्र बरौनी थर्मल पावर स्टेशन में 800 मेगावाट क्षमता की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक आधारित थर्मल बिजली उत्पादन इकाई स्थापित करने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) रिपोर्ट तैयार की जा रही है और ऊर्जा मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना पर तेजी से काम शुरू होने की संभावना है।
इस परियोजना की खास बात यह है कि नई इकाई के साथ अत्याधुनिक बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी विकसित किया जाएगा। इससे अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर पीक आवर के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी बदलाव लाने के साथ-साथ राज्य की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पुरानी बंद पड़ी यूनिट की जमीन पर बनेगी नई परियोजना
सूत्रों के अनुसार नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। बरौनी थर्मल पावर स्टेशन परिसर में पहले से बंद पड़ी पुरानी ताप विद्युत इकाई की खाली जमीन का उपयोग इस नई परियोजना के लिए किया जाएगा।
इससे परियोजना की लागत कम होगी और निर्माण कार्य भी अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जा सकेगा। साथ ही पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी।
क्या होती है अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक?
ऊर्जा क्षेत्र में अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक को सबसे आधुनिक और अधिक दक्ष तकनीकों में गिना जाता है। इस तकनीक में उच्च तापमान और उच्च दबाव पर भाप तैयार कर टरबाइन चलाए जाते हैं, जिससे कोयले का अधिकतम उपयोग संभव होता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समान मात्रा में बिजली उत्पादन के लिए पारंपरिक थर्मल प्लांटों की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत कम कोयले की आवश्यकता होती है। कम कोयला जलने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है।
इसके अलावा पानी की खपत भी कम होती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है।
पहली बार बिहार में एनटीपीसी लगाएगी बैट्री स्टोरेज सिस्टम
इस परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Battery Energy Storage System) होगा। यह तकनीक अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में संग्रहित करने की सुविधा देती है ताकि मांग बढ़ने पर तुरंत बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
बिहार में पहली बार एनटीपीसी इस तरह का बैट्री स्टोरेज सिस्टम विकसित करने जा रही है। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और अचानक बढ़ने वाली मांग को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ भी यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी।
पीक आवर में नहीं होगी बिजली की कमी
गर्मी और त्योहारों के दौरान बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। कई बार उत्पादन और मांग के बीच अंतर होने से बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है।
बैट्री स्टोरेज सिस्टम के माध्यम से सामान्य समय में अतिरिक्त बिजली संग्रहित की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर उसी बिजली को ग्रिड में वापस भेजा जाएगा। इससे पीक आवर में भी निर्बाध बिजली आपूर्ति संभव हो सकेगी।
यह तकनीक बिजली वितरण कंपनियों को भी बेहतर लोड प्रबंधन में मदद करेगी।
बिहार की उत्पादन क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
वर्तमान में बिहार अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा अन्य राज्यों और केंद्रीय विद्युत उत्पादन इकाइयों से प्राप्त करता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं।
फिलहाल बिहार में एनटीपीसी की 800 मेगावाट क्षमता वाली एक प्रमुख यूनिट औरंगाबाद जिले के नवीनगर स्थित बीआरबीसीएल स्टेज-2 में संचालित है।
यदि बरौनी में प्रस्तावित 800 मेगावाट की नई यूनिट स्थापित होती है तो राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कहलगांव और कांटी में भी बन सकती हैं नई इकाइयां
एनटीपीसी के सूत्रों के अनुसार केवल बरौनी ही नहीं बल्कि कहलगांव और कांटी स्थित थर्मल पावर परिसरों में भी 800-800 मेगावाट क्षमता वाली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट स्थापित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
यदि इन परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलती है तो बिहार पूर्वी भारत के प्रमुख बिजली उत्पादन राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे उद्योगों, कृषि, व्यापार और घरेलू उपभोक्ताओं को लंबे समय तक स्थिर बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य के औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है।
नई बिजली परियोजनाओं के शुरू होने से बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को बेहतर बिजली उपलब्ध होगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प
अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पारंपरिक ताप विद्युत संयंत्रों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है। कम कोयला उपयोग होने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटता है और वायु प्रदूषण में भी कमी आती है।
इसके अलावा जल की कम खपत के कारण प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होता है। यही कारण है कि देश में स्थापित होने वाली अधिकांश नई कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजनाओं में इसी तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है।
बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में नई शुरुआत
बरौनी में प्रस्तावित 800 मेगावाट क्षमता वाली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट और बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बिहार के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर बिजली प्रबंधन का भी नया मॉडल प्रस्तुत करेगी।
ऊर्जा मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। यदि योजना तय समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जाएगा।