जेएलएनएमसीएच में स्थापित दो ऑक्सीजन प्लांट बदहाल; पीएम केयर फंड और राज्य सरकार के सहयोग से लगे संयंत्रों की उपेक्षा से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल / JLNMCH) से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की जान बचाने के लिए जिस ऑक्सीजन की किल्लत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, उसी संकट से निपटने के वास्ते भागलपुर के मायागंज अस्पताल में लाखों-करोड़ों की लागत से दो बड़े ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किए गए थे। इनमें से एक प्लांट पीएम केयर फंड (PM Cares Fund) और दूसरा राज्य सरकार (मुख्यमंत्री राहत कोष/स्वास्थ्य विभाग) के संसाधनों से लगाया गया था। लेकिन, विडंबना देखिए कि रखरखाव (Maintenance) और प्रशासनिक उदासीनता के अभाव में ये दोनों महत्वपूर्ण ऑक्सीजन प्लांट पिछले करीब तीन वर्षों से पूरी तरह बंद पड़े हैं और कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला और कैसे उजागर हुई बदहाली?

दैनिक समाचार पत्र 'हिन्दुस्तान' की एक विशेष पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग संभावित संक्रमणों या आपातकालीन स्थितियों से निपटने के दावे कर रहा है, वहीं धरातल पर गंभीर स्वास्थ्य अवसंरचनाएं दम तोड़ रही हैं।

तीन वर्षों से ठप पड़े हैं दोनों प्लांट: कोरोनाकाल की विभिषिका के बाद भविष्य की आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मायागंज अस्पताल परिसर में दो हाई-कैपेसिटी ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाए गए थे। एक प्लांट का निर्माण केंद्र सरकार के 'पीएम केयर फंड' के जरिए हुआ था, जबकि दूसरा प्लांट राज्य सरकार के सहयोग से स्थापित किया गया था।

देखरेख और मेंटेनेंस का अभाव: शुरुआती कुछ महीनों तक सुचारू रूप से चलने के बाद तकनीकी खराबी और नियमित मेंटेनेंस न होने के कारण ये दोनों प्लांट धीरे-धीरे बंद हो गए। वर्तमान स्थिति यह है कि इन प्लांट्स से मरीजों के बेड तक सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है।

लिक्विड ऑक्सीजन की खरीद पर हर महीने खर्च हो रहे लाखों रुपये

अस्पताल के भीतर ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट चालू रहने की स्थिति में संस्थान आत्मनिर्भर हो सकता था और स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता था। लेकिन प्लांट्स के बंद रहने के कारण अस्पताल प्रशासन को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।

लाखों का अतिरिक्त वित्तीय बोझ: वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर महीने लिक्विड ऑक्सीजन के कई टैंकर भागलपुर भेजे जा रहे हैं। इस वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ऑक्सीजन की भारी-भरकम खरीद पर हर महीने राज्य के खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

सरकारी धन की बर्बादी: जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इन दोनों प्लांटों के रखरखाव और मरम्मत पर मात्र आंशिक राशि खर्च कर दी जाती, तो न केवल हर महीने होने वाले लाखों रुपये के खर्च की बचत होती, बल्कि आपात स्थिति में अस्पताल पूरी तरह सुरक्षित रहता।

फैब्रिकेटेड वार्ड और पाइपलाइन कनेक्शन की लचर व्यवस्था

मायागंज अस्पताल के मेडिसिन इमरजेंसी विभाग का संचालन 100 बेड के फैब्रिकेटेड वार्ड में किया जाता है। किसी भी संक्रामक बीमारी या गंभीर आपात स्थिति में संदिग्ध मरीजों को सबसे पहले इसी वार्ड में रखने का प्रावधान है।

सिलेंडरों के भरोसे चल रही जिंदगी: इतने महत्वपूर्ण फैब्रिकेटेड वार्ड में अब तक सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन पाइपलाइन का कनेक्शन नहीं जोड़ा जा सका है। इस वार्ड में आज भी मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए भारी-भरकम जंबो सिलेंडरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

अधिकारियों के पत्रों का असर बेअसर: अस्पताल प्रबंधन और विभागों के अध्यक्षों द्वारा कई बार मुख्य पाइपलाइन से जोड़ने के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी यह कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। निजी एजेंसियों और तकनीकी विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण यह कार्य अटका हुआ है, जिससे मरीजों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।

अधीक्षक की लाचारी और बजट का रोना

इस पूरे मामले पर जब अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनका जवाब व्यवस्था की लचारी को उजागर करने के लिए काफी था।

मेंटेनेंस के लिए 25 लाख की दरकार: अस्पताल अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे ने स्वीकार किया कि पीएम केयर और राज्य फंड से स्थापित दोनों ऑक्सीजन प्लांटों के संपूर्ण मेंटेनेंस और तकनीकी सुधार पर लगभग 25 लाख रुपये का खर्च आएगा।

विभाग को भेजे गए पत्र पर चुप्पी: इस राशि और फंड के आवंटन के लिए स्वास्थ्य विभाग को कई बार आधिकारिक पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन उच्च स्तर पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया या राशि प्राप्त नहीं हुई है। अधीक्षक ने यह भी लाचारी जताई कि कई बार निर्देश देने के बावजूद संबंधित मेंटेनेंस एजेंसियां ​​उनकी बात नहीं सुन रही हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन बेबस नजर आ रहा है।

भागलपुर के जेएलएनएमसीएच (मायागंज अस्पताल) में पीएम केयर फंड और राज्य सरकार के संसाधनों से स्थापित दो-दो ऑक्सीजन प्लांटों का इस तरह बदहाल होना और बंद पड़ा रहना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। एक तरफ जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक और सुलभ बनाने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर करोड़ों की मशीनें धूल फांक रही हैं। यदि समय रहते इन प्लांट्स की मरम्मत नहीं कराई गई और फैब्रिकेटेड वार्ड की पाइपलाइन व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो किसी भी आपात स्थिति में यह लापरवाही भागलपुर के मरीजों के लिए भारी पड़ सकती है।