भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कांवरियों के लिए वरदान साबित हो रहा ‘कृत्रिम झरना’; सुल्तानगंज से देवघर मार्ग पर राहत की ठंडी फुहारों से झूम उठे शिव भक्त
भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: विश्व प्रसिद्ध पवित्र श्रावणी मेले के दौरान इन दिनों उत्तरवाहिनी गंगा तट सुल्तानगंज से लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर तक का पूरा कांवड़ मार्ग 'बोल बम' के जयकारों से गूंज रहा है। इस वर्ष मौसम के तेवर बेहद तल्ख हैं। भीषण गर्मी, उमस और आसमान से बरसती आग जैसी चिलचिलाती धूप ने कांवरियों की कठिन पदयात्रा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में कांवरियों को इस भीषण ताप से राहत दिलाने के लिए विभिन्न स्थानों पर प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनोखे इंतजाम किए गए हैं। विशेष रूप से कांवरिया मार्ग पर बनाए गए 'कृत्रिम झरने' (Artificial Waterfalls) और ठंडी फुहारों की व्यवस्था कांवरियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। इन झरनों के नीचे आते ही शिव भक्तों की सारी थकान पलभर में छूमंतर हो जा रही है।
भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से कांवरियों की कड़ी परीक्षा
सावन के इस पवित्र महीने में प्रकृति के तेवर इस बार कड़े नजर आ रहे हैं:
सूरज की तपिश और उमस भरा मौसम: सुबह होते ही सूरज की किरणें अंगार बरसाने लगती हैं। दोपहर के समय तापमान और उमस का स्तर इतना बढ़ जाता है कि पक्की सड़कों पर चलना कांवरियों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा हो जाता है।
पैरों में छाले और शरीर की थकान: मीलों लंबी पैदल यात्रा, कंधों पर भारी कांवर और ऊपर से चिलचिलाती धूप के कारण कई बार कांवरियों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं और वे डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) का शिकार होने लगते हैं। ऐसे विकट समय में उन्हें थोड़ी सी भी ठंडक या राहत मिल जाए, तो उनके कदम फिर से तेजी से आगे बढ़ने लगते हैं।
राहत का अनूठा जरिया: कांवरिया मार्ग पर बने कृत्रिम झरने
श्रद्धालुओं की इस पीड़ा को समझते हुए इस बार सुल्तानगंज से आगे बढ़ने वाले मुख्य कांवरिया मार्ग पर सेवा शिविरों और स्थानीय प्रशासनिक सहयोग से जगह-जगह कृत्रिम झरने और शावर (Shower) की व्यवस्था की गई है:
ठंडी फुहारों का सुकून: रास्तों में बनाए गए इन झरनों के पास पहुंचते ही ऐसा प्रतीत होता है मानों किसी पहाड़ी इलाके के प्राकृतिक झरने की छांव मिल गई हो। पाइपलाइन और मोटर के जरिए ऊंचाई से गिरती पानी की ठंडी बूंदें और फुहारें जब कांवरियों के तन-मन को भिगोती हैं, तो उनकी सारी थकान दूर हो जाती है।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष राहत: इस यात्रा में केवल युवा ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल होते हैं। चिलचिलाती धूप में ये झरने उनके लिए ऊर्जा के नए स्रोत का काम कर रहे हैं। पानी की इन फुहारों के बीच खड़े होकर कांवरिया जमकर झूमते हैं और फिर नए उत्साह के साथ आगे की यात्रा पर निकल पड़ते हैं।
सेवा शिविरों और स्थानीय लोगों की सराहनीय पहल
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय कमेटियों और प्रशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:
स्वतःस्फूर्त सेवा भाव: कांवरिया पथ पर जगह-जगह शिविर लगाकर न केवल ठंडे पानी और शर्बत की व्यवस्था की गई है, बल्कि इन झरनों और शावरों के जरिए कांवरियों को तरबतर करने का अनूठा इंतजाम किया गया है। सेवादार पूरी तन्मयता से कांवरियों के स्वागत और उनकी सेवा में जुटे हैं।
चिकित्सा और प्राथमिक उपचार: झरनों के आसपास ही मेडिकल कैंप भी लगाए गए हैं जहां धूप से प्रभावित होने वाले या थके हुए कांवरियों को तुरंत ओआरएस (ORS), ग्लूकोज और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
कांवरियों की जुबानी: "भोले की कृपा और राहत की फुहारें"
दूर-दराज के राज्यों से पहुंचे शिव भक्तों ने इन झरनों की व्यवस्था की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है:
भक्तों की प्रतिक्रिया: झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से आए कांवरियों ने कहा कि इस बार गर्मी बहुत ज्यादा है, जिससे चलना मुश्किल हो रहा था। लेकिन रास्ते में अचानक जब इन ठंडे झरनों की फुहारें शरीर पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव ने खुद उनके कष्टों को दूर करने के लिए शीतलता का प्रबंध कर दिया हो। इससे उन्हें आगे की यात्रा तय करने में अभूतपूर्व ऊर्जा मिल रही है।
सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले मार्ग पर भीषण गर्मी और धूप के बीच कांवरियों के लिए बनाए गए ये कृत्रिम झरने केवल पानी का फुहारा मात्र नहीं हैं, बल्कि यह शिव भक्तों के प्रति सेवाभाव और उनकी यात्रा को सुगम बनाने का एक जीवंत उदाहरण हैं। इन झरनों की ठंडी बूंदें और राहत भरी फुहारें कांवरियों के मार्ग की हर बाधा को पार करने का हौसला दे रही हैं, जिससे संपूर्ण कांवड़ यात्रा भक्ति और उत्साह के साथ अनवरत आगे बढ़ रही है।