आरा-बक्सर मुख्य मार्ग की 18.43 करोड़ रुपये की फोरलेन परियोजना एक साल बाद भी अधूरी, 1.98 किमी सड़क निर्माण में देरी से बढ़ी लोगों की परेशानी
आरा। भोजपुर जिले के आरा शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और बढ़ते वाहनों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई करीब 18.43 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण सड़क परियोजना तय समय सीमा के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। लगभग एक वर्ष पहले शुरू हुए इस निर्माण कार्य के अधूरा रहने से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह परियोजना एनएच-922 और एसएच-102 के जंक्शन से जुड़े पुराने एनएच-84 के लगभग 1.98 किलोमीटर लंबे हिस्से को फोरलेन सड़क में विकसित करने से संबंधित है। परियोजना का उद्देश्य शहर में जाम की समस्या को कम करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और आरा-बक्सर मार्ग पर यातायात को अधिक सुचारु बनाना था। हालांकि, निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
यातायात सुधार के लिए शुरू हुई थी महत्वाकांक्षी परियोजना
आरा-बक्सर मुख्य मार्ग बिहार के महत्वपूर्ण सड़क मार्गों में से एक माना जाता है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। शहर के भीतर बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए इस हिस्से को फोरलेन बनाने की योजना तैयार की गई थी।
परियोजना के तहत एनएच-922 और एसएच-102 के जंक्शन से पुराने एनएच-84 के लगभग 1.98 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण, सड़क का पुनर्निर्माण, नालियों का निर्माण, डिवाइडर, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट और अन्य आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाना था।
इस परियोजना के पूरा होने से शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होने और आवागमन तेज एवं सुरक्षित होने की उम्मीद जताई गई थी।
एक वर्ष बाद भी अधूरा निर्माण
करीब एक वर्ष पहले शुरू हुआ यह निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर सड़क निर्माण अधूरा पड़ा है, जबकि कुछ हिस्सों में खुदाई के बाद कार्य धीमी गति से चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से अधूरे निर्माण के कारण सड़क पर धूल, गड्ढे और अव्यवस्थित यातायात की समस्या बनी हुई है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
रोजाना लग रहा है जाम
निर्माण कार्य अधूरा होने का सबसे बड़ा असर यातायात पर पड़ा है। सड़क के कई हिस्सों में संकरी लेन और निर्माण सामग्री पड़े रहने के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है।
सुबह और शाम के समय कार्यालय जाने वाले लोगों, स्कूल बसों, एंबुलेंस और मालवाहक वाहनों को अक्सर जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे लोगों का काफी समय बर्बाद होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना का उद्देश्य जाम खत्म करना था, वही फिलहाल जाम की बड़ी वजह बन गई है।
व्यापारियों पर भी पड़ा असर
सड़क निर्माण में देरी का असर आसपास के व्यापारियों पर भी दिखाई दे रहा है। दुकानदारों का कहना है कि निर्माण कार्य के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
धूल और निर्माण सामग्री के कारण कई लोग बाजार आने से बचते हैं। इससे व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि समय पर परियोजना पूरी हो जाती तो बाजार की गतिविधियां सामान्य रहतीं।
बरसात में बढ़ी परेशानी
मानसून के दौरान अधूरी सड़क लोगों के लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर रही है। कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती।
गड्ढों में पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। पैदल चलने वालों को भी कीचड़ और जलजमाव के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बरसात के दौरान अस्थायी मरम्मत कराने की मांग की है ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परियोजना शुरू होने के समय उम्मीद थी कि एक वर्ष के भीतर सड़क पूरी तरह तैयार हो जाएगी। लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति ने लोगों को निराश किया है।
रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि अधूरी सड़क के कारण यात्रा का समय बढ़ गया है और वाहनों का रखरखाव खर्च भी बढ़ रहा है।
लोगों ने संबंधित विभाग से निर्माण कार्य में तेजी लाने और तय समय के भीतर परियोजना पूरी करने की मांग की है।
प्रशासन से लोगों की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी से परियोजना की नियमित निगरानी करने तथा निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि सड़क परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसलिए इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित की जानी चाहिए।
साथ ही निर्माण अवधि के दौरान वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
आर्थिक विकास से भी जुड़ी है परियोजना
यह सड़क केवल शहर के यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से माल परिवहन आसान होगा, जिससे व्यापार और उद्योग को गति मिलेगी।
फोरलेन सड़क बनने के बाद आसपास के क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं और स्थानीय व्यवसायों को नया अवसर मिल सकता है।
निर्माण एजेंसी पर बढ़ा दबाव
परियोजना में हो रही देरी के कारण निर्माण एजेंसी पर भी समय पर कार्य पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। यदि निर्माण कार्य में और देरी होती है तो परियोजना की लागत बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर न केवल सार्वजनिक धन की बचत की जा सकती है, बल्कि आम लोगों को भी समय पर सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।
आरा-बक्सर मुख्य मार्ग पर 18.43 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 1.98 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना का एक वर्ष बाद भी अधूरा रहना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। जिस परियोजना से जाम की समस्या दूर होने और आवागमन आसान होने की उम्मीद थी, उसकी धीमी प्रगति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अब लोगों की निगाहें संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि निर्माण कार्य में तेजी लाकर परियोजना को जल्द पूरा किया जाएगा, ताकि आरा शहर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम यातायात सुविधा मिल सके।