छह महीने से मानदेय नहीं मिलने से बेनीपुर की आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं परेशान, आर्थिक संकट गहराया
दरभंगा। दरभंगा जिले के बेनीपुर अनुमंडल क्षेत्र में कार्यरत आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को पिछले छह महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। मानदेय के अभाव में कई कर्मियों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सेविकाओं और सहायिकाओं का कहना है कि नियमित भुगतान नहीं होने से उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने तक की चुनौती खड़ी हो गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, बेनीपुर क्षेत्र की सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं का मानदेय भुगतान लंबित है। इस कारण बड़ी संख्या में महिला कर्मियों में असंतोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द बकाया राशि जारी करने की मांग की है।
छह महीने से नहीं मिला मानदेय
आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं का कहना है कि उन्हें पिछले छह महीनों से मानदेय नहीं मिला है। नियमित आय बंद होने से कई परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
उनका कहना है कि वे लगातार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में जुटी रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर भुगतान नहीं होने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।
आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारी
मानदेय नहीं मिलने का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत यही राशि है। कई सेविकाओं ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, दवा, बिजली बिल, राशन और अन्य घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना कठिन हो गया है।
कुछ कर्मियों ने बताया कि उन्हें दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उधार तक लेना पड़ रहा है। लगातार भुगतान में देरी से आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
जिम्मेदारियों का लगातार निर्वहन
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेविकाएं और सहायिकाएं पोषण, टीकाकरण जागरूकता, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं।
इसके अलावा समय-समय पर उन्हें विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों, विशेष अभियानों और जनजागरूकता कार्यक्रमों में भी भाग लेना पड़ता है। बावजूद इसके, समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनमें निराशा का माहौल है।
विभागीय स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया
विभागीय सूत्रों का कहना है कि लंबित मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। संबंधित कार्यालयों से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं ताकि बकाया राशि जल्द जारी की जा सके।
हालांकि अधिकारियों की ओर से भुगतान की निश्चित तिथि की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सेविकाएं और सहायिकाएं भुगतान की तारीख घोषित किए जाने की मांग कर रही हैं।
सेविकाओं ने की जल्द भुगतान की मांग
आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने सरकार तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से अनुरोध किया है कि लंबित मानदेय का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
उनका कहना है कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं, इसलिए उन्हें समय पर मानदेय मिलना उनका अधिकार है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी लगाई गुहार
मानदेय भुगतान में हो रही देरी को लेकर कई सेविकाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
कुछ कर्मियों ने यह भी कहा कि समय पर भुगतान होने से वे अपने कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगी।
बच्चों और योजनाओं पर भी पड़ सकता है असर
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि उनके मानदेय का भुगतान लंबे समय तक लंबित रहता है, तो इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि सेविकाओं ने स्पष्ट किया कि वे बच्चों और लाभार्थियों की सेवाओं में कोई कमी नहीं आने देंगी, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों का समाधान होना भी आवश्यक है।
विभाग ने दिया समाधान का भरोसा
विभागीय सूत्रों के अनुसार, लंबित मानदेय जारी करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया जारी है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही आवश्यक स्वीकृतियां और वित्तीय प्रक्रिया पूरी होगी, भुगतान कर दिया जाएगा।
हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश या समय-सीमा जारी नहीं की गई है।
भुगतान का इंतजार
फिलहाल बेनीपुर क्षेत्र की सैकड़ों आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं पिछले छह महीनों के बकाया मानदेय का इंतजार कर रही हैं। सभी की निगाहें अब विभागीय निर्णय पर टिकी हैं। सेविकाओं को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द भुगतान सुनिश्चित करेगी, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रहें।