श्रावणी मेले में अटूट आस्था और अनूठी मिसाल; महज दो माह की बेटी को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं पिता मिथिलेश कुमार, मन्नत पूरी होने पर बाबा बैद्यनाथ दरबार की ओर कदम

भागलपुर, विशेष संवाददाता: पवित्र सावन मास के अवसर पर पूरे देश में देवाधिदेव महादेव की आराधना का दौर जारी है। सुल्तानगंज से देवघर तक फैले प्रसिद्ध कांवरिया पथ पर इन दिनों शिव भक्तों का सैलाब उमड़ा हुआ है। इस बीच, भागलपुर के कांवरिया पथ से एक ऐसा हृदयस्पर्शी और अद्भुत नजारा सामने आया है, जिसने हर आने-जाने वाले श्रद्धालु को भावुक कर दिया है। यहाँ एक पिता अपनी महज दो महीने की दुधमुंही बेटी को एक छोटी सी सजाई गई डोली में बैठाकर खुद जमीन पर लेट-लेट कर दंडवत यात्रा कर रहे हैं। पिता की यह अगाध भक्ति और श्रद्धा जहां एक ओर भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह आधुनिक समाज में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'बेटी सम्मान' का एक अत्यंत सशक्त संदेश भी दे रही है।

क्या है पूरी मन्नत की दास्तान? (अनोखा संकल्प)

मिली जानकारी के अनुसार, इस अनोखी और कठिन यात्रा को अंजाम देने वाले श्रद्धालु मिथिलेश कुमार मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी यह आस्था भागलपुर के रास्ते देवघर की पावन भूमि की ओर बढ़ रही है:

पिछले साल मांगी थी पुत्री रत्न की मन्नत: मिथिलेश कुमार ने बताया कि वे पिछले वर्ष (2025 में) सावन के दौरान बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और पूजन के लिए गए थे। उस दौरान उन्होंने भोलेनाथ के दरबार में मन्नत मांगी थी कि उनके घर में पुत्री रत्न (बेटी) की प्राप्ति हो।

अनोखा संकल्प: उन्होंने बाबा से यह संकल्प भी लिया था कि यदि उनकी यह मनोकामना पूरी हो जाती है और उनके घर बेटी का जन्म होता है, तो वे अगली श्रावणी यात्रा में अपनी नन्हीं सी परी को साथ लेकर दंडवत करते हुए बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचेंगे।

मुराद पूरी होने पर निभाया वादा: उनकी यह मनोकामना वर्ष 2026 में पूरी हुई और उनके घर एक स्वस्थ बेटी का जन्म हुआ। अपनी मन्नत पूरी होने के बाद मिथिलेश ने बिना एक पल गंवाए अपने कठिन संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया और अपनी दो महीने की बिटिया को डोली में बैठाकर इस दुष्कर यात्रा पर निकल पड़े।

डोली में बच्ची के आराम का विशेष इंतजाम

सड़क पर लेटकर की जाने वाली दंडवत यात्रा शारीरिक रूप से बेहद कष्टसाध्य और कठिन होती है, ऐसे में एक दो महीने की मासूम बच्ची को यात्रा में साथ रखना किसी चुनौती से कम नहीं है:

सुविधाजनक और सुरक्षित डोली: पिता मिथिलेश कुमार ने अपनी बेटी के लिए विशेष रूप से एक छोटी और सुरक्षित डोली तैयार कराई है। इस डोली में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि नन्हीं बच्ची को धूप, धूल और गर्मी से बचाया जा सके।

हवा और रोशनी का प्रबंध: डोली के भीतर बच्ची के आराम के लिए छोटे पंखे, पर्याप्त वायुसंचार (ventilation) और अन्य जरूरी इंतजाम किए गए हैं ताकि सफर के दौरान उसे किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवार के अन्य सदस्य भी इस यात्रा में उनका सहयोग कर रहे हैं ताकि बच्ची की देखरेख में कोई कमी न आए।

कांवरिया पथ पर बने मुख्य आकर्षण का केंद्र

भागलपुर से देवघर जाने वाले कांवरिया मार्ग पर यह अनूठी यात्रा इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है:

श्रद्धालुओं में उमड़ रहा कौतूहल और सम्मान: जो भी कांवरिया या स्थानीय लोग इस दृश्य को देख रहे हैं, वे अभिभूत हुए बिना नहीं रह पा रहे हैं। लोग मिथिलेश कुमार के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं और बाबा भोलेनाथ के साथ-साथ इस पिता के चरणों में भी शीश झुका रहे हैं।

"बेटी है तो परिवार पूरा है" का संदेश: मिथिलेश का कहना है कि उनके परिवार में पहले से एक बेटा मौजूद है, लेकिन बेटी के आने से उनका परिवार पूरी तरह मुकम्मल हो गया है। उनका यह कदम समाज की उस रूढ़िवादी सोच पर करारा प्रहार है जो बेटा और बेटी में फर्क करती है। यह यात्रा साबित करती है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि ईश्वर का वरदान और परिवार का गौरव होती हैं।

भागलपुर के रास्ते देवघर की ओर बढ़ रही यह दंडवत यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान या मन्नत पूरी होने का प्रतीक भर नहीं है, बल्कि यह मातृत्व और पितृत्व के उस पवित्र भाव का दस्तावेज है जो समाज को एक सकारात्मक दिशा देता है। दो महीने की मासूम बेटी को डोली में लेकर चल रहे पिता मिथिलेश कुमार की यह निष्ठा यह बता देती है कि सच्ची आस्था और प्रेम के आगे कठिन से कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। यह यात्रा आने वाले दिनों में समाज के लिए प्रेरणा की एक मिसाल बन चुकी है।