क्वार्टर आवंटन समिति ने एक दर्जन से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को दी सौगात

भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर में लंबे समय से लंबित आवासीय समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की क्वार्टर आवंटन समिति ने एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर कई शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों को आवास आवंटित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में खाली पड़े आवासों को व्यवस्थित करने और कर्मचारियों की आवासीय समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया है।

कुलसचिव आवास में मंथन

यह महत्वपूर्ण बैठक विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) आवास में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता क्वार्टर आवंटन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुदामा यादव ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा उन तमाम आवेदनों पर विचार करना था जो काफी समय से धूल फांक रहे थे और योग्य आवेदकों द्वारा आवास के लिए जमा किए गए थे। बैठक में समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे, जिन्होंने प्रत्येक आवेदन की पात्रता, वरिष्ठता और विश्वविद्यालय के नियमों के आलोक में सूक्ष्म समीक्षा की।

आवेदनों का गहन मूल्यांकन

बैठक के दौरान एक दर्जन से अधिक आवेदनों को सूचीबद्ध किया गया था। समिति के सदस्यों ने न केवल उपलब्ध आवासों की संख्या का आकलन किया, बल्कि आवेदकों की वास्तविक आवश्यकता और उनकी वर्तमान तैनाती को भी ध्यान में रखा।

डॉ. सुदामा यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि विश्वविद्यालय परिसर में काम करने वाले शिक्षक और कर्मी जो अभी तक आवास सुविधा से वंचित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें वरीयता क्रम (Seniority List) का कड़ाई से पालन किया गया है।

किन लोगों को मिला लाभ?

बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार:

शिक्षक वर्ग: विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के उन शिक्षकों को आवास आवंटित किए गए जिन्होंने लंबे समय से आवेदन दे रखा था।

शिक्षकेतर कर्मी: विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में दिन-रात जुटे उन तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को भी आवास दिए गए हैं, जिनके लिए आवास का होना अत्यंत आवश्यक था।

समिति के इस कदम से उन कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है जो अब तक निजी आवासों का भारी किराया देने को मजबूर थे।

पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर

आवास आवंटन को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों और विवादों के बीच, इस बार समिति ने पूरी तरह पारदर्शी रवैया अपनाया है। डॉ. सुदामा यादव ने बताया कि आवंटन के बाद यदि कोई व्यक्ति उस आवास का उपयोग नहीं करता है या किसी और को हस्तांतरित करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय का मुख्य लक्ष्य कैंपस की जीवंतता को बढ़ाना है, जिसे तभी संभव बनाया जा सकता है जब अधिकांश कर्मचारी परिसर में ही निवास करें।

विश्वविद्यालय परिसर में खुशहाली की उम्मीद

विश्वविद्यालय के जानकारों का मानना है कि शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों को परिसर में आवास मिलने से कार्य संस्कृति में भी सुधार आएगा। जब कर्मी कैंपस के पास रहेंगे, तो समय पर विश्वविद्यालय पहुंचने में आसानी होगी और शैक्षणिक कार्यों में भी गुणवत्ता आएगी। लंबे समय से कैंपस के कई क्वार्टर जर्जर स्थिति में थे या अवैध कब्जे में थे, जिसे मुक्त कराकर अब इसे नए आवंटन के लिए योग्य बनाया गया है।

हालांकि यह आवंटन एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अभी भी कई ऐसे आवास हैं जो मरम्मत के अभाव में रहने लायक नहीं हैं। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई कि जिन आवासों को आवंटित किया जा रहा है, उनकी तत्काल मरम्मत (Maintenance) सुनिश्चित की जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि अगले कुछ महीनों में उन सभी आवासों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

टीएमबीयू द्वारा क्वार्टर आवंटन समिति के माध्यम से लिया गया यह निर्णय विश्वविद्यालय के सुशासन की ओर एक बड़ा कदम है। डॉ. सुदामा यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने दर्जनों परिवारों के लिए सुकून का मार्ग प्रशस्त किया है। अब उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इसी प्रकार अन्य लंबित मामलों को भी त्वरित गति से निपटाएगा ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल को और बेहतर बनाया जा सके।