झमाझम बारिश से खिले किसानों के चेहरे, धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार
भागलपुर: लंबे समय से मानसून की बेरुखी और भीषण उमस का सामना कर रहे भागलपुर वासियों और किसानों के लिए सोमवार का दिन किसी सौगात से कम नहीं रहा। तड़के हुई झमाझम बारिश ने न केवल शहर के तापमान को गिराया, बल्कि खेती-किसानी के लिए एक नई उम्मीद की किरण भी जगा दी है। इस बारिश ने किसानों की सबसे बड़ी चिंता—धान की रोपनी—को लेकर बने संकट को काफी हद तक कम कर दिया है।
राहत का मौसम और तापमान में गिरावट
सोमवार को हुई बारिश के बाद जिले का अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले कई दिनों से चल रही तपिश और उमस भरी गर्मी के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त था, लेकिन इस बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक आकाश में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे भागलपुर में मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।
किसानों के लिए 'लाइफलाइन' बनी बारिश
भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में धान की खेती खरीफ सीजन की रीढ़ मानी जाती है। हालांकि, जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में अपेक्षित बारिश न होने के कारण खेतों में दरारें पड़ गई थीं और धान का बिचड़ा (सीडलिंग) सूखने के कगार पर था।
किसान रामेश्वर प्रसाद बताते हैं, "खेतों में पानी नहीं होने के कारण धान की रोपनी का समय निकलता जा रहा था। सरकारी नलकूपों की बदहाली ने हमें निजी पंपों पर निर्भर कर दिया था, जिससे खेती की लागत बढ़ गई थी। सोमवार की बारिश ने खेतों को आवश्यक नमी प्रदान की है, जिससे अब हम धान की रोपनी का काम पूरे जोर-शोर से शुरू कर सके हैं।"
रोपनी का काम शुरू, सिंचाई का संकट अब भी चुनौती
बारिश ने धान की खेती में नई जान जरूर फूँक दी है, लेकिन जिले की सिंचाई व्यवस्था पर सवाल अभी भी बरकरार हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर में कुल 345 सरकारी नलकूप हैं, जिनमें से 134 लंबे समय से तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि इस बारिश के पानी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए खेतों की मेड़बंदी (Field Bunding) मजबूत करें ताकि नमी लंबे समय तक बनी रहे। जहां बारिश का असर कम है, वहां 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) तकनीक अपनाने का सुझाव भी दिया जा रहा है ताकि पानी की खपत कम हो।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के मध्य तक अच्छी बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो जिले में धान की पैदावार पिछले वर्षों के स्तर तक पहुँच सकती है। हालांकि, मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को वैकल्पिक फसलों (जैसे मूंग, उड़द और तिल) के लिए भी तैयार रहने को कहा गया है।
जिला कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। किसानों की मांग है कि जो नलकूप खराब हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि मानसून के भरोसे न रहकर वे अपनी फसल को बचा सकें।
भागलपुर में सोमवार की बारिश ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान तो लौटा दी है, लेकिन यह केवल एक शुरुआत है। आने वाले दिन धान की फसल और जिले की आर्थिक स्थिति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। प्रशासन और किसान दोनों को मिलकर अब जल संरक्षण और सिंचाई के आधुनिक साधनों पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि प्रकृति की बेरुखी के बावजूद खेत लहलहाते रहें।