भागलपुर में नीलाम पत्र शाखा की जून 2026 रैंकिंग जारी, डीसीएलआर सदर अपेक्षा मोदी रहीं प्रथम; ₹46.40 लाख की राजस्व वसूली से बनाया रिकॉर्ड

भागलपुर। जिला नीलाम पत्र शाखा द्वारा जून 2026 की मासिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। इस बार की रैंकिंग में भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) सदर-सह-नीलाम पत्र पदाधिकारी अपेक्षा मोदी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने न केवल लंबित नीलाम पत्र वादों के त्वरित निष्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की, बल्कि सरकारी राजस्व वसूली में भी नया रिकॉर्ड कायम किया। जून माह के दौरान उनके न्यायालय से कुल 46.40 लाख रुपये की राजस्व वसूली हुई, जिसके आधार पर उन्हें जिले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले नीलाम पत्र पदाधिकारी के रूप में प्रथम स्थान दिया गया।

जिला प्रशासन द्वारा जारी रैंकिंग में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कहलगांव दूसरे स्थान पर रहे, जबकि वरीय उपसमाहर्ता-सह-नीलाम पत्र पदाधिकारी सुधीर कुमार ने तीसरा स्थान हासिल किया। अधिकारियों का कहना है कि यह मासिक रैंकिंग न केवल विभिन्न नीलाम पत्र पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा का माध्यम है, बल्कि इससे राजस्व वसूली की प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा और कार्यकुशलता भी बढ़ती है।

जिला नीलाम पत्र शाखा के अनुसार, इस रैंकिंग को जारी करने का मुख्य उद्देश्य सरकारी राजस्व की वसूली में तेजी लाना, लंबित नीलाम पत्र मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करना तथा सभी संबंधित अधिकारियों के कार्यों की नियमित निगरानी करना है। प्रशासन का मानना है कि समयबद्ध समीक्षा और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन से राजस्व संग्रहण प्रणाली अधिक प्रभावी बनती है और सरकारी बकाया राशि की वसूली में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है।

शाखा से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक अपेक्षा मोदी के न्यायालय में कुल 653 नीलाम पत्र वाद लंबित थे। इनमें से उन्होंने केवल जून माह के दौरान 32 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया। इन मामलों के निष्पादन के परिणामस्वरूप सरकार को 46.40 लाख रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल राजस्व वसूली के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि लंबित मामलों के प्रभावी निपटारे का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

सूत्रों के अनुसार, अपेक्षा मोदी ने मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए नियमित समीक्षा बैठकें, संबंधित पक्षों को समय पर नोटिस जारी करने, अभिलेखों का व्यवस्थित परीक्षण तथा राजस्व वसूली की प्रक्रिया की लगातार निगरानी जैसी कई प्रशासनिक पहल कीं। इन प्रयासों के कारण लंबित मामलों के समाधान की गति तेज हुई और वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

नीलाम पत्र शाखा के अधिकारियों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित रहते हैं, जिनमें सरकारी बकाया राशि की वसूली करनी होती है। यदि इन मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो, तो राजस्व संग्रहण प्रभावित होता है और सरकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक नीलाम पत्र पदाधिकारी की कार्यप्रणाली का मासिक मूल्यांकन किया जाता है ताकि प्रदर्शन के आधार पर आवश्यक सुधार और प्रोत्साहन दोनों सुनिश्चित किए जा सकें।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदर्शन आधारित रैंकिंग प्रणाली अधिकारियों को अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाती है। जब प्रत्येक अधिकारी के कार्यों की नियमित समीक्षा होती है और उपलब्धियों का सार्वजनिक मूल्यांकन किया जाता है, तो कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में स्वतः सुधार देखने को मिलता है। इससे लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ती है और सरकारी राजस्व संग्रहण अधिक प्रभावी बनता है।

रैंकिंग में दूसरे स्थान पर रहे एसडीओ कहलगांव ने भी अपने क्षेत्र में लंबित मामलों के निपटारे और राजस्व वसूली में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वहीं वरीय उपसमाहर्ता-सह-नीलाम पत्र पदाधिकारी सुधीर कुमार ने तीसरा स्थान प्राप्त कर शीर्ष अधिकारियों की सूची में अपनी जगह बनाई। प्रशासन का मानना है कि सभी अधिकारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से पूरे जिले में राजस्व प्रशासन को मजबूती मिलेगी।

राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नीलाम पत्र वादों का समय पर निष्पादन केवल सरकारी आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया की प्रभावशीलता भी मजबूत होती है। लंबित मामलों का शीघ्र समाधान होने से संबंधित पक्षों को भी समय पर राहत मिलती है और न्यायिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी कम होती है।

जिला प्रशासन ने सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें, निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करें और राजस्व वसूली की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएं। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि प्रत्येक मामले में विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए पारदर्शिता बनाए रखें, ताकि किसी भी प्रकार की शिकायत की संभावना न रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में राजस्व प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, समयबद्ध समीक्षा, ई-गवर्नेंस और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल कार्यों में पारदर्शिता बढ़ रही है, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है।

जिला नीलाम पत्र शाखा की जून 2026 की यह रैंकिंग प्रशासनिक कार्यकुशलता का एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। अपेक्षा मोदी द्वारा 46.40 लाख रुपये की राजस्व वसूली और लंबित मामलों के प्रभावी निष्पादन ने यह साबित किया है कि योजनाबद्ध कार्यशैली, नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई से सरकारी राजस्व संग्रहण में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

आने वाले महीनों में भी जिला प्रशासन इसी प्रकार की मासिक रैंकिंग जारी कर विभिन्न अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी, बल्कि राजस्व वसूली और लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया भी पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी होने की उम्मीद है।