शाहकुंड के किरणपुर चौक पर पेयजल के लिए त्राहिमाम; अंबा पंचायत में भीषण जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण और राहगीर, मुखिया राकेश कुमार की गुहार के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड अंतर्गत आने वाली अंबा पंचायत के किरणपुर चौक इन दिनों एक गंभीर और विकट पेयजल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और भू-जल स्तर में लगातार आ रही भारी गिरावट के कारण इस व्यस्त इलाके में पानी की त्राहिमाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों यात्रियों और दुकानदारों को भी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए बूंद-बबूंद पानी को तरसना पड़ रहा है। पंचायत के मुखिया राकेश कुमार द्वारा संबंधित जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और जिला प्रशासन से लगातार गुहार लगाए जाने के बावजूद अब तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में विभागीय उदासीनता के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

क्या है किरणपुर चौक पर जल संकट की असली तस्वीर?

शाहकुंड क्षेत्र का यह इलाका वैसे भी जल संकट के मामले में संवेदनशील रहा है, लेकिन वर्तमान हालात ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:

सरकारी चापाकल और बोरिंग शो पीस: किरणपुर चौक पर लगाए गए अधिकांश सार्वजनिक चापाकल या तो पूरी तरह से सूख चुके हैं या फिर उनसे पानी की जगह केवल हवा और गंदा कीचड़ निकल रहा है। सार्वजनिक जलापूर्ति योजनाएं या तो ठप पड़ी हैं या बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण उनका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

यात्रियों और राहगीरों की परेशानी: किरणपुर चौक एक ऐसा चौराहा है जहाँ से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, व्यापारी और राहगीर गुजरते हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों को जब प्यास बुझाने के लिए पीने का पानी तक नसीब नहीं होता, तो उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय होटलों और दुकानों पर भी पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है।

मवेशियों और दैनिक जीवन पर संकट: इंसानों के साथ-साथ इस इलाके के मवेशी भी पानी के बिना बेहाल हैं। महिलाओं को सुबह से ही मीलों दूर से पानी ढोकर लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनके घरेलू कामकाज के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

मुखिया राकेश कुमार की चेतावनी और प्रशासन की बेरुखी

इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए अंबा पंचायत के मुखिया राकेश कुमार ने मोर्चे पर खुद कमान संभाल रखी है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण उनके प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं:

विभाग को दी गई बार-बार सूचना: मुखिया राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर पीएचईडी (PHED) विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया है। उन्होंने मांग की थी कि तुरंत प्रभाव से किरणपुर चौक पर टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाए और खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत कराई जाए।

अधिकारियों की टालमटोल नीति: मुखिया का आरोप है कि विभाग के अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर राहत पहुंचाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। फंड की कमी या तकनीकी अड़चनों का बहाना बनाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं, जिससे जनता की मुसीबतें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही से आजिज आ चुके किरणपुर चौक के दुकानदारों और ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है:

प्रदर्शन की तैयारी: स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर क्षेत्र में पेयजल की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।

स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा: शुद्ध पेयजल उपलब्ध न होने के कारण इस बात का भी अ अंदेशा बना हुआ है कि लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे क्षेत्र में डायरिया, उल्टी-दस्त और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं।

शाहकुंड के अंबा पंचायत स्थित किरणपुर चौक पर गहराया यह जल संकट केवल एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। जब तक सरकार और संबंधित विभाग इस प्रकार की आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid Response) देना नहीं सीखेंगे, तब तक आम जनता को ऐसी परेशानियों से मुक्ति नहीं मिल सकती। जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करते हुए टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करे और युद्ध स्तर पर खराब पड़े जल स्रोतों की मरम्मत करवाकर जनता को इस नरकीय स्थिति से बाहर निकाले।